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Buddha Purnima and suvichar in Hindi

 बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध का जन्मदिन | बुद्ध सुविचार

बुद्ध पूर्णिमा को वेसाक या बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह दुनिया भर में बौद्धों द्वारा मनाया जाने वाला सबसे पवित्र महत्वपूर्ण त्योहार है। जानकारी के लिए बता दें कि बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध है। यह त्योहार इनके जन्म, ज्ञानोदय और मृत्यु (परिनिर्वाण) का स्मरण कराता है। यदि आप एक छात्र है तो आपके लिए, बुद्ध पूर्णिमा के महत्व को समझना न केवल विश्व धर्मों के बारे में उनके ज्ञान को समृद्ध करता है बल्कि बुद्ध की शिक्षाओं से गहन जीवन सबक भी प्रदान करता है। चलिए इस ब्लोग के माध्यम से बुद्ध पूर्णिमा के बारे में जानकारी के साथ-साथ बुद्ध सुविचार को पढ़ते हैं ताकि भगवान बुद्ध द्वारा दी गई शिक्षाओ से परिचित हो सके।

अतीत में मत उलझो, भविष्य के सपने मत देखो, मन को वर्तमान क्षण पर केन्द्रित करो। - भगवान बुद्ध

बुद्ध पूर्णिमा गौतम बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं को जनने और समझने का एक माहत्वपूर्ण दिन है। इसे भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में बहुत उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान बुद्ध के सुविचार, उनके गहन उद्धरण और शिक्षाएँ, करुणा, मनन और आंतरिक शांति का जीवन जीने आदि को जानने और समझने की कोशिश करते हैं। इस ब्लोग में हम भगवान बुद्ध के सुविचार और उनके ज्ञान पर प्रकाश डालेंगे। 

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

यह त्योहार हिंदू महीने वैशाख जो की अंग्रेजी का अप्रैल या मई महीना होता है, उसमें आता है। यह बौद्ध धर्म में सबसे पवित्र दिन होता है। इस दिन भगवान बुद्ध की शिक्षाओ, उपदेशों और अनुष्ठानों को समझा जाता है तथा भगवान बुद्ध से प्रथाना की जाती है कि उनका जीवन सार्थक और धर्म के मार्ग पर चलने वाला हो। यदि आप भगवान बुद्ध के पूरे जीवन को जानने और समझने का प्रयास करेंगे तो आपको ऐसी शिक्षाओं और ज्ञान प्राप्त होगा  जो कही और नहीं मिल सकती है। 

ऐतिहासिक संदर्भ

भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी में हुआ था। यह स्थान वर्तमान समय में नेपाल में स्थित है। बुद्ध बहुत ही सम्पन्न परिवार में जन्म लिये थे लेकिन वे बचपन से ही सत्य की खोज में लग गये जिसकी वजह से वे  राजसी जीवन त्याग दिये और आत्मज्ञान की तलाश  में लग गयें। उन्होने कई वर्षों तक भारत के बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे तपस्या की। जिसके परिणाम स्वरूप बुद्ध को यहां पर ज्ञान प्राप्त हुआ। इसके बाद वे भगवान बुद्ध कहलाने लगे। बुद्ध ने अपना सारा जीवन आत्मज्ञान का मार्ग सिखाने, करुणा, ज्ञान और नैतिक आचरण पर जोर देते हुए बिताया। 

बुद्ध का जन्मदिन

बु्द्ध का जन्मदिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में भारत, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड और जापान सहित अन्य देशों में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। चलिए इस दिन को खास बनाने के लिए उनके शिक्षाओ का अनुसरण करते हैं। 

बुद्ध सुविचार

तीन चीजें लंबे समय तक छिपी नहीं रह सकतीं: सूर्य, चंद्रमा और सत्य। - भगवान बुद्ध


आप, स्वयं, पूरे ब्रह्मांड में किसी भी व्यक्ति की तरह, अपने प्यार और स्नेह के हकदार हैं।  - भगवान बुद्ध


शांति भीतर से आती है। इसे बाहर मत खोजो।  - भगवान बुद्ध


मन ही सब कुछ है। आप जो सोचते हैं, आप बन जाते हैं।  - भगवान बुद्ध


स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ी दौलत है, वफादारी सबसे अच्छा रिश्ता है।  - भगवान बुद्ध


शरीर को अच्छे स्वास्थ्य में रखना एक कर्तव्य है... अन्यथा हम अपने दिमाग को मजबूत और स्पष्ट नहीं रख पाएंगे।  - भगवान बुद्ध


कोई भी हमें खुद के अलावा नहीं बचा सकता है। कोई भी नहीं कर सकता है और कोई भी नहीं कर सकता है। हमें खुद ही रास्ता चलना चाहिए।  - भगवान बुद्ध


एक मोमबत्ती से हज़ारों मोमबत्तियाँ जलाई जा सकती हैं, और मोमबत्ती का जीवन छोटा नहीं होगा। साझा करने से खुशी कभी कम नहीं होती।  - भगवान बुद्ध


जीवन में एकमात्र वास्तविक विफलता यह है कि आप जो सबसे अच्छा जानते हैं, उसके प्रति सच्चे न रहें।  - भगवान बुद्ध


भगवान बु्द्ध से संबंधित अन्य सुविचार के लिए नीचे दी जा रही लिंक्स पर क्लिक करें- 

Kabir Daas Ke Dohe - Amrit Vani, Poets | अमृत वचन सुविचार

Kabir Amrit Vani Aur Dohe

 कबीर दास जी के दोहे और सुविचार

नमस्कार दोस्तों, आज सुविचार के इस ब्लोग में आपको कबीर दास (Kabir Das) के दोहे की चर्चा करेंगे और उससे कुछ अनमोल वचन को समझेंगे। कबीर दास भारत के सबसे सम्मानित और प्रभावशाली कवियों (respected and influential poets) में से एक थे। इन्होंने भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने पर एक अमिट छाप छोड़ी। इनके द्वारा रचित दोहे बहुत सरल और शक्तिशाली शब्दों से गढ़े हुए है जो बहुत सारे ज्ञान को समाहित किये हुए है।  हम यहां पर कबीर दास के दोहे - अमृत वाणी (Amrit Vani) को पढ़ेंगे जो कबीर दास जी के  शिक्षाओं के सार को उजागर करता है तथा हमें अपने अंदर की गहराइयों तक सोचने के लिए प्रेरित करता है। तो चलिए फिर इनके कुछ दोहे को पढ़ते हैं तथा प्रेरित और मार्गदर्शन के इस ब्लोग में गोता लगाते हैं। 

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिल्या कोय; जो मन देखा अपना, मुझसे बुरा ना कोय। - कबीर दास

कबीर जी के इस दोहे का अर्थ यह है कि अगर मैं किसी बुरे आदमी की तलाश में गया तो कोई भी बुरा नहीं मिला लेकिन जब मैं अपने हृदय को टटोला, तो मुझे मुझसे बुरा कोई नहीं मिला। कहने का मतलब यह है कि किसी बुरे आदमी की तलाश करने से पहले अपने अंदर की बुराई को देखना चाहिए। अगर आप सही है तभी आप किसी को बात सकते हैं कि वे गलत है। नहीं तो आपको कोई हक नहीं बनता कि आप किसी की गलती को उजागर करें। 

कबीर दास जी के दोहें से हम क्या शिक्षा मिलती है?

जैसे की हमने आपको एक कबीर जी के दोहे और उसके अर्थ को जाना और समझा की उसमें कितनी गहरी और ज्ञान की बातों को पिरोया गया है। ऐसे ही इनके अन्य दोहे को पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि उसमें कितनी अधिक आध्यात्मिक ज्ञान और व्यावहारिक जीवन (spiritual knowledge and practical life) के पाठ को संजोया गया है। कबीर दास जी ने अपने दोहे को 15वीं शताब्दी में लिखे थे। इनके दोहे से हमें प्रेम, विनम्रता, आत्म-बोध और परमात्मा के विषयों को समझने का एक मौका मिलता है। कबीर दास जी काव्यात्मक अभिव्यक्तियाँ धार्मिक सीमाओं से परे हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को अपने दोहे के माध्यम से आकर्षित करते हैं। उनके द्वारा दोहों में पिरोये गये शब्द आत्मनिरीक्षण का आह्वान करते हैं और हमारे भीतर निहित शाश्वत सत्य की याद दिलाते हैं। चलिए फिर कबीर दास जी के कुछ अन्य दोहों को पढ़ते हैं और अपने ज्ञानकोष को बढ़ाते हैं। 

पोथी पढ़ पढ़ि जग उदास, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम के, जो पढ़े सो पंडित होय।। - कबीर दास

कबीर दास जी इस दोहें के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि इस संसार में आप चाहे कितने भी शास्त्र को पढ़ लें आपको एक दिन मृत्यु के द्वार पर पंहुचना ही है। इसलिए आप सबसे पहले प्रेम के ढाई अक्षर को समझने का प्रयास करें क्योंकि यही वह है जिससे द्वारा आप लोगों के लिए प्रेमी बन सकते हैं अथार्त लोगों के लिए प्रिय और अच्छे व्यक्ति बन सकते हैं। 

साईं इतना दीजिये, जामे कुटुंब समाये, 

मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाए - कबीर दास

इस दोहे के माध्यम से कबीर दास जी कहना चाहते हैं कि हे साईं मुझ पर इतना कृपा कीजिए की मैं अपने परिवार का भरण-पोषण सकूं और मैं भी भूखा न रहूं और कोई मेरे द्वार पर भिखारी भी आता है तो में उसे कुछ दे संकू। 

चलिए अब कबीर दास के अन्य दोहें को जानते और समझते हैं तथा उससे कुछ शिक्ष लेकर अपने जीवन में अमल करते हैं।

कबीर दास के दोहें और अमृत वाणी को समझते है-

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब



Kaal kare so aaj kar, aaj kare so ab; 
pal mein parlay hoyegi, bahuri karega kab? - Kabir Das
कबीर दास इस दोहे के माध्यम से कहना चाहते हैं कि कभी भी कोई काल पर नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि कल कभी आता नहीं है। हर काम को यदि आप कल पर टालेंगे तो वह कभी भी पूरा नहीं हो सकता है। इसलिए आज का काम आज ही करों और जो कल के लिए सोच रहे थे उसे अब शुरू कर दों।


Bura jo dekhan main chala bura na miliya koye

अर्थ : कबीर जी कहते है कि मैं जब इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न दिखाई दिया और जब मैंने अपने मन के अंदर झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा तो कोई नहीं है।

कबीरा खड़ा बाजार में, सबकी मांगे खैर



Kabira khada bazar mein, sabki mange khair; 
na kahu se dosti, na kahu se bair. - Kabir Das
कबीर दास जी इस दोहे के माध्यम से कहना चाहते हैं कि यह संसार एक बाजार के समान है, यहां पर किसी से दोस्ती और बैर नहीं रखना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से ही आप अपनी जीवन को ठीक प्रकार से जी सकते हैं। 

Pothi padi padi jag hua pandit bhaya na koy day aakhar prem ka pade so pandit hoye

अर्थ : कबीर जी कहते है कि  बड़ी बड़ी पुस्तकें को पढ़ कर संसार में कितने ही व्यक्ति मृत्यु के द्वार पहुँच गए, लेकिन सभी विद्वान न हो सके. वह यह भी मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार से केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले अर्थात वह प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी हो जाता है।

मोको कहां ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में

Moko kahan dhoonde re bande, main to tere paas mein; 
na teerath mein, na murat mein, na ekant niwas mein. - Kabir Daas
इस दोहों के माध्यम से कबीर दास यह संदेश देना चाहते हैं कि किसी भी ईश्वर को आप तीर्थ और मूर्तियों में क्यों देख रहे हो, वह तो आपके हृदय में बसा है। आप उसे दिल से महसूस करों वह आपके साथ ही है। 

Sadhu aisa chahiye, jaisa soop subhay, Saar saar ko gahi rahai, Thotha dei udaay.

अर्थ : कबीर जी कहते है कि  इस संसार में ऐसे व्यक्तियों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है कहने का अर्थ यह है कि जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा देंगे।

Tinka kabahu na nindiye jo paawan tar hoye.

अर्थ : कबीर जी कहते है कि  एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा नहीं करनी चाहिए जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है। अगर कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ जाता है तो बहुत अधिक पीड़ा होती है।


Dhire Dhire re mana dhere sab kuchh hoye.

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि मन में धीरज रखने से सब कुछ प्राप्त होता है और यदि कोई भी माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो समच आने पर ही आयेगा।


Mala pherat jug bhaya phira n man ka pher


अर्थ : कबीर दास जी किसी व्यक्ति को सलाह देते हुए कहते हैं कि कोई व्यक्ति चाहे लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला फेरता रहे हैं, लेकिन उसके मन का भाव नहीं बदल सकता और न ही  उसके मन की हलचल शांत होगी क्योंकि किसी भी व्यक्ति को हाथ की माला फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलना चाहिए।

Jaati n puchho saadhu ki puchh lijiye gyan


अर्थ : इस दोहे में कबीर दास जी कहते है कि सज्जन व्यक्ति की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना की कोशिश करनी चाहिए। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि  कभी भी तलवार का मूल्य होता है उसकी मयान का नहीं


Dos paraye dekhi kari, chala hasant hasant


अर्थ : कबीर दास जी इस दोहे में कहते है कि मनुष्य में एक प्रकार का ऐसा स्वभाव होता है कि जब वह दूसरों के दोष पर हंसता है तो उसे अपने दोष याद नहीं आते। इसका कभी न अंत है और न आदि।


Jin khota tin piayea gahare paani paith

अर्थ : इस दोहे में कबीर दास जी ने मेहनत के बारे में बताया है और कहा है कि जो व्यक्ति प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ उसी प्रकार से पा लेते  हैं जिस प्रकार से कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी के अंदर जाता है और कुछ प्राप्त करके आता है लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रहते हैं और कुछ भी नहीं करते।

Boli ek anmol hai, jo koi bolata hai wahi janata hai

अर्थ : इस दोहे में कबीर दास जी ने मेहनत के बारे में बताया है कि यदि कोई सही रूप से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न समान हो जाती है। इसलिए कभी भी बोली को ह्रदय के तराजू में तोलकर ही मुंह से बाहर आने देना चाहिए।

Ati ka bhala na bolana aur ati ki bhali n choop

अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि हमें कभी भी न तो अधिक बोलना चाहिए और न ही जरूरत से ज्यादा कम क्योंकि यह ठीक उसी प्रकार से है। जैसे कि बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं होती और बहुत अधिक धूप भी अच्छा नहीं कम।

Nindak niyare rakhiye aagan kuti chavay

अर्थ : कबीर दास जी ने इस दोहे में कहा हैं कि जो हमारी निंदा करता है, उस व्यक्ति के अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो ऐसा व्यक्ति होता है जो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ बनाता है।


Durlabh manushy janm hain, Deh n baarmbar

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि इस मनुष्य का जन्म मुश्किल से होता है। यह मनुष्यों का शरीर उसी तरह बार-बार नहीं प्राप्त होता जिस प्रकार वृक्ष से पत्ता  झड़ जाया करता है और दोबारा डाल पर नहीं आता।


Mange sabki khair, Kabira khada baajar men


अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि जब इस संसार में आऐ हैं तो अपने जीवन से यही तमवा रखना चाहिए कि सब जनो का भला हो और संसार में अगर किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न करें।


Kabir amrit vani- aapas men dou ladi ladi mue

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और मुस्लिम रहमान को इस बात को लेकर वे दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा जा रहे है और इसके बाद भी दोनों में से कोई सच को न जान पा रहा है।

अभी तक आपने कबीर दास जी के दोहों को पढ़ा और समझा की उसमें कौन-कौन सी ज्ञान के बाते दी गई है और वे क्यों आज के समय में हामारे लिए अमृत के समान है। चलिए अब कबीर दास से संबंधित कुछ प्रश्न और उत्तर पढ़ते हैं:

प्रश्न और उत्तर:

कबीर दास कौन थे?

कबीर दास 15वीं शताब्दी के भारतीय रहस्यवादी एक प्रसिद्ध कवि और संत थे। इनकी रचनाओं ने भक्ति आंदोलन (Bhakti movement) को उस समय बहुत अधिक प्रभावित किया था। इनके द्वारा रचित दोहे जितना उस समय प्रसिद्ध थे आज भी उतने अधिक प्रसिद्ध है। कबीर दास के दोहें बहुत सरल भाषा में है जो गहरी आध्यात्मिक और दार्शनिक अंतर्दृष्टि (spiritual and philosophical) का परिचय देते हैं। 

कबीर दास के दोहे का क्या महत्व है?

कबीर दास के दोहे उनके शाश्वत ज्ञान और सार्वभौमिक अपील (वैश्विक अपील) की तरह हैं। इनके दोहों से मानव जीवन, आध्यात्मिकता और नैतिकता के बुनियादी पहलुओं को समझने का मौका मिलता है। जब आप कबीर दास जी के दोहों को पढ़ेंगे तो आपको आत्मनिरीक्षण और स्वयं और परमात्मा की गहरी समझ को जानने और पहंचानने का सुख प्राप्त होगा। 

कबीर की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है?

कबीर दास जी की शिक्षाएँ प्रेम, विनम्रता और आत्म-जागरूकता पर बल देती है जो आज के लिए भी प्रासंगिक हैं। इनके दोहों को पढ़कर आप आंतरिक शांति, रिश्तों में सुधार और कैसे प्रेम पूर्वक जीवन व्यतित करना चाहिए आदि को जान सकते हैं। 

क्या कबीर दास की रचनाएँ धार्मिक हैं?

नहीं, कबीर दास की रचनाएँ आध्यात्मिक है और वे किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। इनकी दोहों में दी गई शिक्षाएँ धार्मिक सीमाओं को पार करती हैं और सार्वभौमिक सच्चाइयों को बताती है जो सभी धर्मों के लोगों के लिए ज्ञानवर्धक है। 

कबीर दास के दोहे कहां मिल सकते हैं?

कबीर दास के दोहे विभिन्न संकलनों और अनुवादों की बहुत सारी किताबों को आप ऑनलाइन या बुक स्टोर से खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप इंटरनेट के माधयम से भी इनके दोहो को पढ़ सकते हैं। सुविचार के इस ब्लोग में भी हमने इनके कई दोहों को ऊपर अर्थ के साथ प्रस्तुत किया है जिनको आप पढ़कर उनकी बातों को गहराई से समझ सकते हैं।

निष्कर्ष:

आपने Suvichar4u इस ब्लोग के माध्यम से कबीर दास जी के दोहे के आध्यात्मिकता और मानव अस्तित्व की एक झलक को पढ़ा। उनके सरल लेकिन शक्तिशाली शब्द दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। हम कबीर दास जी के शिक्षाओ को अपनाकर रोजमर्रा के जीवन में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं और अपने आस-पास के लोगों के साथ एक गहरा संबंध स्थापित कर सकते हैं। चलिए कबीर दास जी के दोहों से प्रेरणा लें और दूसरों को प्रेरित करने के लिए इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें।


आपके लिए कुछ अन्य सुविचार को पढ़ने के लिए लिंक्स नीचे दी जा रही है, इन्हें पढ़े और अच्छा लगे तो दूसरों के साथ साक्षा करें।

अन्य सुविचार


Happy Mothers Day - मातृ दिवस

विश्व अंतर राष्ट्रीय मातृ दिवस - मां का जीवन में महात्व

(Happy Mothers Day)

जैसा कि हम सभी को पता है कि बच्चों के दिल में मां के लिए क्या माहत्व और खास जगह है इससे सभी परिचित है। यह खास जगह क्यों न हो। मां वह होती है जिसके दिल में अपने बच्चे के लिए हमेशा प्यार भरा रहता है। इस वर्ष मातृ-दिवस कार्यक्रम को भारत में बहुत ही धूम धाम से मनाया गया। आज विश्व अंतर राष्ट्रीय मातृ दिवस पर भारत के कई स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम किया गया और जिसमें मां को लेकर कई संदेश भी लोगों को दिया गया। हमारी जिंदगी में मां शब्द इतना सुंदर शब्द होता है कि जिसको कहने व सुनने मात्र से ही दिल का सुकून व शांति मिल जाती है। 

Happy Mothers Day



मां का अस्तित्व मनुष्य जीवन में इतना अधिक होता है कि इसके बिना जिंदगी की कल्पना करना भी एक बेइमानी होगी। मां का प्यार जितना दूसरा प्यार कोई और नहीं हो सकता तभी तो देवताओं को भी मां के प्यार का सुख प्राप्त करने के लिए इस पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। 

किसी ने सच ही कहा है कि जिस घर में मां का सम्मान नहीं होता उस घर में देवताओं का आगमन भी नहीं होता है। मां की पूजा भगवान की पूजा से बड़कर मानी जाती है ।  जो भी व्यक्ति अपनी मां को सम्मान नहीं देता वह जिंदगी भर दुख भोगता है और उसकी भगवान भी कोई मदद नहीं करते हैं। कहते हैं कि भगवान हर जगह मौजूद नहीं रह सकता इसलिए उसने मां बनाया। भगवान द्वारा मां भेजा गया एक ऐसा तोफा है जो सबके चेहरे पर मुस्कान ला देता है। 

मातृ-दिवस का दिन हर बच्चे और विद्यार्थी के लिए बहुत अधिक यादगार और खुशी भरा दिन होता है। इसको मदर्स डे (Mothers Day) भी कहा जाता है। यह दिन सभी  माताओं के लिए समर्पित होता है। यह हर वर्ष मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस बार मातृ-दिवस 9 मई 2021 को मनाया गया। 

मां से संबंधित सुविचार

Happy Mothers Day mom


माँ तेरी याद Satati है मेरे पास आ जाओ, 
थक गया हूं मुझे अपने Aanchal में सुलाओ,
उँगलियां फेर कर Balon में मेरे, 
एक बार फिर से Bachapan की लोरियां सुनाओ


मन की बात Jaan ले जो, 
आँखों से पढ़ ले जो, Dard हो या चाहे ख़ुशी, 
वो हस्ती जो Bepannah प्यार करे, 
माँ ही तो है जो Bachchon के लिए जिए
हैप्पी मदर्स डे ||


मेरी दुनिया में जो इतनी Shoharat है, 
सब मेरी माँ की Badaulat है।
Happy Mother's Day


वो मेरी बदसलूकी में भी दुआ देती है, 
आगोश में लेकर सब गम भुला देती है। 
मातृ दिवस की शुभकामनाएं। 


Wo Meri Badaslooki Men Bhi Dua Deti Hai, 
Aagosh Men Lekar Sab Gam Bhula Deti hai, 
Happy Mother's Day!!


रुके तो चांद जैसी है, 
चले तो हवाओं जैसी है, 
वो माँ ही है...जो धुप में भी छांव जैसी है।
Happy Mother's Day!


दास्तान मेरे लाड़-प्यार की बस, 
एक हस्ती के इर्द गिर्द घूमती है। 
प्यार जन्नत से इसलिए है मुझे
क्योंकि ये भी मेरी माँ के कदम चूमती है। 
मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 


उसके रहते जीवन में कोई गम नहीं होता, 
दुनिया साथ दे ना दे पर मां का प्यार कभी कम नहीं होता। 
हैप्पी मदर्स डे। 

बेहद मीठा कोमल होता है, 
माँ के प्यार से ज्यादा
कुछ नहीं अनमोल होता है।
 हैप्पी मदर्स डे। 

दिल को छू लेने वाले सुविचार | Dil ko chhoone wali kahani

दिल को छूने वाली कहानी

दिल को छू लेने वाले सुविचार या कहानी, इन शब्दों या वाक्यांशों और कहानी को संदर्भित करते हैं। ये मजबूत भावनाओं को जगाते हैं। ये विशेष रूप से दिल के मामलों से संबंधित होती हैं, जैसे कि अपने दोस्त के प्रति प्यार, हानि या भावनात्मक संघर्ष, मां के प्रति प्यार, पिता के प्रति प्यार। इस प्रकार के कहानी और सुविचार गहरे अर्थ व्यक्त कर सकते हैं। इनका प्रभाव पाठक या श्रोता पर बहुत अधिक होता है। जब आप इनको पढ़ते हैं या देखते हैं तो ये आपके अनुभवों और भावनाओं के साथ प्रतिध्वनित होती रहती है। दिल को छू लेने वाले सुविचार या कहानी (Heart touching Suvichar or Kahani) प्रेरक, सांत्वना देने वाले या विचारोत्तेजक हो सकते हैं। इनका उपयोग आप अक्सर सरल और शक्तिशाली तरीके से जटिल भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो दिल को छू लेने वाले सुविचार गहरी भावनाओं को व्यक्त करने और भावनात्मक स्तर पर दूसरों के साथ जुड़ने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रुप में उपयोग किया जा सकता है। चलिए दिल को छू लेने वाले सुविचार को इस आर्टिकल के माध्यम से समझते हैं- 

दिल को छू लेने वाली कहानी

माँ जी, आप अपना खाना (Food) बना लेना, मुझे और इन्हें आज एक पार्टी (Party) में जाना है .
दिल छू लेगी ये कहानी (Story) एक बार जरूर पढें.......*
बहु ने आइने मेँ लिपिस्टिक ठिक करते हुऐ, कहा -
"माँ जी, आप अपना खाना (Food) बना लेना,
मुझे और इन्हें आज एक पार्टी (Party) में जाना है ..
"माँ ने कहा कि "बेटी गैस चुल्हा चलाना नहीं आता ..
"तो बेटे ने कहा कि "माँ, पास वाले मंदिर में आज भंडारा है ,
तुम वहाँ चली जाओ ना, खाना बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी...
"माँ चुपचाप (Silently) अपनी चप्पल पहन कर मंदिर (Temple) की ओर हो चली..
यह पुरा वाक्या (Sentence) twelve साल का अमित सुन रहा था |
पार्टी (Party) में जाते वक्त रास्ते (Way) में अमित ने अपने पापा से कहा कि
"पापा जब मैं बड़ा आदमी बन जाऊंगा तब मैं भी अपना घर (House) किसी मंदिर के पास ही बनाऊंगा.!
माँ ने पुछा - क्यों बेटा ?
अमित ने जवाब दिया, जिसे सुनकर उस बेटे और बहु का सिर, शर्म से नीचे झुक गया, जो अपनी माँ को मंदिर में छोड़ आए थे..
अमित ने कहा कि क्योंकि माँ जब मुझे भी किसी दिन ऐसी ही किसी पार्टी में जाना पड़ेगा तब तुम भी तो किसी मंदिर में भंडारे खाने जाओगी ना और मैं नहीं चाहता कि आपको कहीं दूर के मंदिर में जाना पड़े..!...

जीने में सबसे बड़ी महिमा कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है। - नेल्सन मंडेला

Kuch Khaas Suvichar

Bade Bujargo ki Ungaliyon men koi takat to na thi magar jab mera sir jhuka

कल को आज पर हावी न होने दें।" -विल रोजर्स

Har samay, Har baat ko aalochana ki kasauti par kasana achchhi baat nahi

दुनिया की सबसे अच्छी और सबसे खूबसूरत चीजों को देखा या छुआ नहीं जा सकता - उन्हें दिल से महसूस किया जाना चाहिए। - हेलेन केलर

Honesty is like a banyan

कभी-कभी आपको अपना हीरो खुद बनना पड़ता है, क्योंकि कभी-कभी जिन लोगों के बिना आप नहीं रह सकते, वे आपके बिना रह सकते हैं। - अज्ञात

Duniya men jitane bhi paap aur dukh hai we sab agyanata ke karan hai

आपके पास सबसे बड़ी खुशी यह जानना है कि आपको खुशी की आवश्यकता नहीं है। -विलियम सरॉयन

Jis prakar koi budhiman manusay aan chhodakar mitti nahi khata

जीवन एक यात्रा है, और यदि आप यात्रा से प्यार करते हैं, तो आप हमेशा के लिए प्यार में रहेंगे। -पीटर हैगर्टी

Matlabi Shayari (मतलबी शायरी) | प्यार, जमाना और दोस्ती की शायरी

 मतलबी शायरी, अर्थ और उद्दाहरण

नमस्कार दोस्तों, क्या आपको मतलबी शायरी का अर्थ पता है, अगर हां तो हमारे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें। क्योंकि आज हम यहां पर आपको मतलबी शायरी (Matlabi Shayari) का अर्थ बताते हुए कुछ ऐसी ही शायरी प्रस्तुत करेंगे जिससे आपको इनके बारे में ठीक से पता लग सकें। 

मतलबी शायरी का अर्थ - यह एक प्रकार की ऐसी शायरी होती है जिसमें कुछ छिपाकर या छिपाते हुए बयान की जाती है ताकि जिसके लिए बोली जा रही है उसको समझे ने थोड़ा गहराई से सोचना पड़े। इसमें बहुत अधिक अल्फाज़ नहीं होते लेकिन इसका प्रभाव और संदेश का भाव बहुत गहरा होता है। ऐसी शायरी में अक्सर संदेश बहुत गहरा होता है लेकिन भाव छिपा रहता है।

हमें आंसू छुपाना था इसलिए पीछे मुड़े गये,
कोई उनको बताये कि हर बार पीठ दिखाने का मतलब बेवफा नहीं होता। 

इस प्रकार की मतलबी शायरी हमेशा ऐसे लोगों के लिए बोली जाती है जो हमेशा अपने लाभ की सोचते हैं। ऐसे लोग हमेशा अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दूसरों के हित और उनकी भावना को अनदेखा करते रहते हैं।

आज के समय में बहुत से ऐसे लोग आपको मिल जायेंगे जो दूसरों के साथ संबंधों को स्थापित करने के लिए तथा किसी स्थिति को हास्यास्पद बनाने के लिए मतलबी शायरी का इस्तेमाल करते हैं। ये शायरियां भी कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे- मतलबी प्यार शायरी, मतलबी जमाना शायरी,  मतलबी दोस्ती शायरी, मतलबी धोखेबाज शायरी, आदि। चलिए अब कुछ मतलबी शायरी को देखते हैं और उसके बाद एक-एक करके सभी matlabi shayari को जानेंगे तथा उद्दाहरण के साथ इन्हें समझेंगे। 

मेरे दिल के कुछ जज्बात आपके लिए दबे पड़ें हैं,  और आप दुनिया की मतलबी रस्मों में उलझे पड़ें है।
मेरे दिल के कुछ जज्बात आपके लिए दबे पड़ें हैं, 
और आप दुनिया की मतलबी रस्मों में उलझे पड़ें है। 


कुछ मतलबी शायरी ये भी है -

वही रोता है जो सही रिश्ते की खुश्बू महसूस करता है,
अन्यथा, मतलब की रिश्तों में कोई आपको नहीं रुला सकता।

क्या तुम्हारे लिए अब मुझे बेवफा कहलाने का कोई मतलब है,
जब तुमने सबके सामने किसी और से दिल लगा लिया।

एक तरफा प्रेम भी एक रिश्ता और खुशी का अहसास दिलता है,
क्योंकि सामने वाला कभी भी मतबल नहीं रखता।

उन्होंने मुझसे दुरिया ऐसे बढ़ाई जिससे मुझे पता ही न चलें
आइस्ते-आइस्ते यू हमसे दूर हुई जैसे मुझे उनसे मतलब ही नहीं। 

जितना जरुरी है उतना ही रिश्ता निभाओं,
नहीं तो रिश्ता हमेशा बोझ और मतलबी बन जाती है। 

अच्छा है किसी के मतलब के कम तो आए,
दे जाम मुझे इतना कि मेरे दिल को आराम आए। 

एक तरफा प्यार भी एक प्रकार का रिलेशनशिप होता है शाहब,
जिसमें कोई सामने वाला मतलब न रखें लेकिन वह बेवफाई नहीं कर सकता। 

ऊपर दी गई सभी शायरियां आपको अवश्य पसंद आयेंगे। चलिए आपके लिए कुछ और प्रस्तुति के लिए लिंक्स देते हैं जिन पर क्लिक करके आप उनको पढ़ सकते हैं। 


Haldi Rasam Ya Fijul Kharchi | हल्दी रस्म या फिजूली खर्च

 हल्दी रस्म या फिजूली खर्च - एक सुविचार यह भी

Haldi Rasam Ya Fijul Kharchi

नमस्कार दोस्तों, आज हम सुविचार के इस ब्लोग में हल्दी रस्म या फिजूली खर्च पर बात करने जा रहे हैं। आजकल बहुत से गरीब अमीरों की तरह दिखने के चक्कर में पिस रहा है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली शादियों में बहुत से ऐसे रस्म होने लगे है जिसमें दिखावे करने के चक्कर में फिजूली खर्च बहुत अधिक होने लगा है। जिसकी वजह से एक गरीब मां-बाप पर शादि के खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा है। इन नई रस्मों में एक रस्म हल्दी रस्म भी है। चलिए इसकी जांच पड़ताल करते हैं तथा आइये इस लेख में छुपे विचारों को समझते हैं।

हल्दी का रस्म पूरी करें, बेफजूल खर्ची नहीं, 

नहीं तो इससे धन और इज्जत दोनों खत्म हो जायेगी।

अमीरों के चक्कर में बेचारें गरीब मां-बाप पिस रहा हैं

हल्दी का रस्म के दौरान अब हजारों रुपए खर्च करके विशेष प्रकार की सजावट की जाती है। इस दिन पर दिन दूल्हा या दुल्हन विशेष पीले कपड़े पहनते हैं। कुछ साल से पहले हल्दी के रस्म में इस प्रकार का चलन ग्रामीण इलाकों कम ही देखने को मिलता था, लेकिन पिछले दो-तीन सालों में ग्रामीण इलाकों में इसका चलन बहुत तेजी से बढ़ चुका है। जिसकी वजह से शादि के खर्च में एक अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। 

हल्दी रस्म या फिजूली खर्च

पुराने जमाने में हल्दी के रस्म पर दिखावा नहीं होता था। अब लोग इस रस्म पर बहुत अधिक दिखावा करने लगें है। दुल्हा-दुलहन अब अपने साज-सजावट में लाखों रुपये खर्च करने लगे हैं। जबकि पहले केवल हल्दी के उबटन से घिसघिस कर दूल्हे-दुल्हन को सुंदर बना दिया जाता था। यह जिम्मेदारी पहले केवल महिलाओं की होती थी। अब तो इस प्रक्रियां में पुरुष भी बराबर का हिस्सेदारी निभाने लगे हैं। इसमें कोई गलत बात नहीं लेकिन इसके लिए अधिक दिखावा की जाए और बेफजूल खर्च किया जाए तो यह तो गलत है। 

पुराने जबाने में जहां पहले घर पर ही हल्दी का रस्म पुरा किया जाता था वही आजकल हल्दी रस्म के लिए भी बड़े-बड़े मैरिज मैरिज हॉल बुक किये जाते हैं। जिसमें लाखों रुपये मां-बाप के खर्च हो जाते हैं। कई बार तो दुलाह-दुलहन अपने इस रस्म को लोगों को दिखाने के लिए सोशल मीडियों पर इसके लाई कार्यक्रम भी कर रहे हैं जो दिखावा नहीं तो क्या है। 

आज ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक रूप से असक्षम परिवार के लड़के - लड़कियां भी शहरी बनावटीपन में शामिल होकर मां-बाप के मेहनत की कमाई को बेफजूल में उड़ा रहे हैं। हल्दी का रस्म जो केवल कुछ हजार रूपये में सम्पन्न हो सकता है उसमें लाखों रुपये खर्च करने का क्या आवश्यकता है। बहुत से लड़के-लड़कियां अपने मां-बाप से जिद्द करते हैं कि महंगे से महंगे कैमरा, घर क डेकोरेशन और बहुत से दोस्तों को शादि के इस रस्म में बुलाना है। वह भी सिर्फ इसलिए कि वे अपनी इस रस्म की वीडियों, रील या शोर्ट्स को इंस्टाग्राम, फेसबुक या यूट्यूब पर अपलोड कर सकें। अब आप जरा सोचें की केवल एक रस्म को पुरा करने के लिए क्य वेबफजूल खर्च करना आवश्यक है। मेरे ख्याल से नहीं। तो फिर आजकल के दुल्हा-दुलहन क्यों अपने मां-बाप के खर्च को बढ़ा रहे हैं। 

अब बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों के लड़के - लड़कियां भी वेबफजूल खर्ची में पैसा पानी बर्बाद कर रहे हैं। इनके मां-बाप बहुत अधिक मेहनत करके पसीने की कमाई से पाई-पाई जोड़कर मकान तैयार करते हैं लेकिन लड़के-लड़कियां बिना समझे मां-बाप की हैसियत से विपरीत हल्दी का रस्म पूरा कर रहे हैं। 

जब मां-बाप इसके इसके लिए तैयार नहीं होते तो बहुत से बच्चे उनको गंवारू, पिछड़ा और पुराने जमाने का कहकर मजाक बनाते हैं तथा उनकी इज्जत को तार-तार करते हैं। अब आप सोचे की यह सही है या गलत। 

किसी भी रस्म पर फिजूलखर्ची करना ठीक नहीं वह भी केवल इसिलए की जमाने को शोसल मीडियां पर दिखाना है। 


जीवन में ख़ुशी रहने के लिए 5 सरल तरीके

 जीवन में ख़ुशी लिए 5 टिप्स

Jivan Mein Khushi Ke Liye 5 Saral Tarike

हम जीवन की अपनी यात्रा में सफलता और खुशी (Success and Happiness) के लिए अलग-अलग रास्ते और तीरको की तलाश करते रहते हैं। फिर भी, यह पहचानना ज़रूरी है कि हर जीत और उपलब्धि को हर किसी के साथ साझा करने से अनजाने में ईर्ष्या (Feelings of Jealousy) भड़क सकती है। इसलिए, जब आपको कोई उपलब्धि या खुशी हासिल होती है तो उस समय धैर्य बनाकर रखें क्योंकि यह आपके जीवन में शांति बनाये रखेगी। 

इस संसार हमेशा वहीं सुखी है जो खुश रहना सीख चुका है।

जीवन में ख़ुशी रहने के लिए 5 सरल तरीके


चलिए इस ब्लोग के माध्यम से जीवन में स्थायी खुशी के लिए 5 सरल तरीके को जानते और समझते हैं:

1. संघर्ष में बुद्धिमानी का परिचय: 

किसी भी विवाद में शामिल होने से पहले, संभावित परिणामों पर विचार जरूर करें। सावधानीपूर्वक विचार किए बिना आँख मूँद कर न्याय करने से अनावश्यक झगड़े और जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं।

2. अंतरंग संबंधों को संजोएं: 

अपनी खुशियों और जीत को अपने दिल के सबसे करीबी लोगों लोगों के साथ ही साझा करें। किसी अन्य के साथ नहीं। ऐसे व्यक्तियों पर विश्वास करते समय सावधानी बरतें जो आपका प्रतिद्वंद्विता या प्रतिस्पर्धात्मकता की भावना रखते हो। खासकर पेशेवर क्षेत्रों में तो बिलकुल भी नहीं। 

3. दिखावे के लिए नहीं, प्रामाणिक रूप से जीवन का आनंद लें: 

यदि आप किसी प्रकार के विकल्प का चुनाव करना चाहते हैं तो वहां पर अपनी बुद्धि या स्थिति का प्रदर्शन करने के प्रलोभन से बचें। इसके बजाय, अपने मन और आत्मा को ऐसे साहित्य से पोषित करने पर ध्यान केंद्रित करें जो आपके वास्तविक हितों और जुनून से मेल खाता हो।

4. आत्म-संरक्षण के साथ दयालुता को संतुलित करें: 

दयालुता को संजोया जाना एक बहुत अच्छा गुण है, लेकिन सीमाओं को बनाए रखना उतना ही अधिक महत्वपूर्ण है, खासकर चुनौतीपूर्ण समय के दौरान। दूसरों के प्रति सहानुभूति और समझ बढ़ाते हुए अपनी भलाई को प्राथमिकता दें।

5. अच्छे कार्यों की कीमत का मूल्यांकन करें: 

परोपकारिता एक सराहनीय कदम होता है लेकिन मदद के लिए हाथ बढ़ाने से पहले हमेशा अपने लिए संभावित जोखिमों का आकलन करें। दयालुता के ऐसे कार्यों से बचे जो आपके स्वयं के कल्याण को खतरे में डाल सकते हैं।

हम आशा करते हैं कि आप अपने जीवन में इन पांच तरकों को अपनाकर आप खुश रहना सीख जायेंगे। चलिए अब खुशी से संबंधित कुछ सुविचार को पढ़ते हैं ताकि उनसे भी कुछ खुश रहने के तरीके को समझ सकें। 

खुशी के लिए सुविचार

यदि आपने सपनों को पंख देने है तो खुशी की भावाना को समझें। 


जो व्यक्ति खुश रहकर एक लक्ष्य पर कार्य करता है वही सफलता का स्वाद चखता है। 


जीवन में सकारात्मक परिवर्तन तब होता है जब आप खुश रहना सीख जाते हैं। 


सफलता के साथ शांति और संतुष्टि का भाव होना जरूरी है 

तभी आपको खुशी का आनंद मिलेगा। 


इस ब्लोग में बताये गए इन पांच तरीके को अपनाकर अपने जीवन में खुशी का आनंद लें और अच्छी जीवन व्यापन करें। नीचे टिप्पणी में अपने विचार साझा करें कि ये तरीक आपके साथ कैसे मेल खाती हैं। 

हम स्वीकार करते हैं कि ये आनंद और संतुष्टि (joy and satisfaction) पाने के असंख्य तरीकों में से कुछ हैं। यदि आपके पास साझा करने के लिए कुछ अतिरिक्त तरीके और जानकारियां है, तो हमें आपसे जानना अच्छा लगेगा। ख़ुशी की इस तलाश में हमारे साथ शामिल होने के लिए धन्यवाद।

यदि आप कुछ अन्य सुविचर पढ़ना और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना चाहते हैं तो नीचे दी जा रही लिंक पर क्लिक करना न भूलें। 

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