12 सित॰ 2026

हरतालिका तीज 2026: व्रत विधि, कथा और शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। प्रातःकाल पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:12 बजे से 7:06 बजे तक है। इस बार Hartalika Teej पर खास बात यह है कि हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों एक ही दिन पड़ रही हैं।

हरतालिका तीज उन कुछ व्रतों में से है जो सबसे कठिन माने जाते हैं — पूरे दिन और रात, बिना अन्न और बिना जल। और फिर भी हर साल लाखों महिलाएं इसे पूरी श्रद्धा से रखती हैं।

हरतालिका तीज 2026 तिथि और मुहूर्त

व्रत की तिथिसोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल तृतीया
तृतीया तिथि आरंभ13 सितंबर 2026, सुबह 7:08 बजे
तृतीया तिथि समाप्त14 सितंबर 2026, सुबह 7:06 बजे
प्रातःकाल पूजा मुहूर्तसुबह 6:12 – सुबह 7:06
प्रदोष काल पूजासूर्यास्त के बाद लगभग दो घंटे

13 या 14 सितंबर — कौन सी तारीख सही है?

दोनों तारीखें आपको अलग-अलग कैलेंडर में दिख सकती हैं, और दोनों के पीछे तर्क अलग-अलग है।

तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होती है और 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे खत्म होती है। जो पंचांग उदया तिथि का नियम मानते हैं — यानी सूर्योदय के समय जो तिथि चल रही हो — वे 14 सितंबर बताते हैं। यही ज़्यादातर पंचांगों में छपा है।

वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में प्रदोष व्यापिनी नियम माना जाता है, जिसके हिसाब से 13 सितंबर की शाम पूजा होती है।

सीधा जवाब: आपके घर में जो परंपरा हमेशा से चली आ रही है, वही सही है। नई तारीख अपनाने की ज़रूरत नहीं।

Hartalika Teej Suvichar


व्रत के नियम

  • यह निर्जला व्रत है — पूरे दिन-रात न अन्न, न जल।
  • व्रत अगले दिन सुबह पूजा के बाद पारण करके खोला जाता है।
  • रात्रि जागरण की परंपरा है — भजन-कीर्तन के साथ रात बिताई जाती है।
  • व्रत रखने वाली महिलाएं दिन में सोती नहीं हैं।
  • हरे रंग की साड़ी, हरी चूड़ियां और सोलह श्रृंगार शुभ माने जाते हैं।
  • एक बार यह व्रत शुरू करने के बाद जीवन भर रखने की परंपरा है।

अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है, आप गर्भवती हैं, या कोई दवा नियमित लेनी है — तो निर्जला व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से बात कर लीजिए। फलाहारी व्रत भी उतना ही मान्य है। श्रद्धा नियम से बड़ी होती है।

पूजा सामग्री

  • मिट्टी या बालू से बनी शिव-पार्वती और गणेश की प्रतिमा
  • बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, आक के फूल
  • केले के पत्ते
  • सोलह श्रृंगार का सामान — चूड़ी, बिंदी, सिंदूर, काजल, मेहंदी, बिछिया
  • रोली, अक्षत, कुमकुम, हल्दी, चंदन
  • घी का दीपक, अगरबत्ती, कपूर
  • फल, नारियल, मिठाई
  • जल कलश

हरतालिका तीज पूजा विधि

  1. सुबह स्नान करके हरे या लाल रंग के वस्त्र पहनें और सोलह श्रृंगार करें।
  2. पूजा स्थान पर केले के पत्ते बिछाकर चौकी सजाएं।
  3. मिट्टी या बालू से शिव, पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाएं।
  4. सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर शिव-पार्वती की।
  5. शिव जी को बेलपत्र, शमी पत्र और धतूरा अर्पित करें।
  6. माता पार्वती को सोलह श्रृंगार का सामान चढ़ाएं।
  7. हरतालिका तीज व्रत कथा पढ़ें या सुनें — यह पूजा का सबसे ज़रूरी हिस्सा है।
  8. आरती करें और रात्रि जागरण करें।
  9. अगले दिन सुबह पूजा के बाद व्रत का पारण करें।

हरतालिका तीज की कथा

नाम में ही पूरी कहानी छिपी है। "हरत" यानी हरण, और "आलिका" यानी सखी। मतलब — सखी द्वारा हरण।

कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों कठोर तपस्या की। पर उनके पिता हिमालय राज ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया। पार्वती जी यह सुनकर व्याकुल हो गईं।

तब उनकी सखियां उन्हें घर से ले जाकर घने जंगल में छिपा आईं, ताकि वे अपनी तपस्या जारी रख सकें। वहाँ पार्वती जी ने बालू से शिवलिंग बनाकर भाद्रपद शुक्ल तृतीया को निर्जला व्रत रखा और पूरी रात जागकर आराधना की।

उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत हरतालिका तीज के नाम से मनाया जाने लगा।

इस कथा में एक बात ध्यान देने लायक है — पार्वती जी ने किसी और के फैसले को चुपचाप स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपना संकल्प चुना। यही इस व्रत की असली सीख है।

हरतालिका तीज की कथा

हरतालिका तीज के 5 सुविचार

Hartalika Teej सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, संकल्प और दांपत्य जीवन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना को याद करने का अवसर भी है। इस खास दिन पर आप अपने परिवार और प्रियजनों के साथ ये Hartalika Teej Suvichar साझा कर सकते हैं।

  1. “जहां प्रेम में विश्वास और रिश्ते में सम्मान हो, वहां हर दिन शिव-पार्वती के आशीर्वाद जैसा सुंदर बन जाता है। हरतालिका तीज की शुभकामनाएं।”

  2. “हरतालिका तीज का व्रत हमें सिखाता है कि सच्चे प्रेम के साथ किया गया संकल्प जीवन में विश्वास और मजबूती लेकर आता है। भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा सदा बनी रहे।”

  3. “माता पार्वती जैसी श्रद्धा, भगवान शिव जैसा विश्वास और रिश्तों में हमेशा बना रहे प्रेम। यही हरतालिका तीज का सबसे सुंदर संदेश है।”

  4. “सोलह श्रृंगार की सुंदरता तभी पूरी होती है, जब मन में प्रेम, चेहरे पर मुस्कान और रिश्तों में सम्मान हो। माता पार्वती सभी के जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखें।”

  5. “हरतालिका तीज पर मांगी गई हर सच्ची मनोकामना पूरी हो, घर-परिवार में प्रेम बना रहे और शिव-पार्वती का आशीर्वाद हर कदम पर साथ रहे। जय शिव-पार्वती!”

हरतालिका तीज का संदेश: यह पर्व हमें याद दिलाता है कि किसी भी रिश्ते की खूबसूरती केवल परंपराओं में नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने में होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. हरतालिका तीज 2026 कब है?

हरतालिका तीज 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। कुछ क्षेत्रों में यह 13 सितंबर को भी मनाई जाती है।

Q2. हरतालिका तीज की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रातःकाल पूजा मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 6:12 बजे से 7:06 बजे तक है। कई परिवार मुख्य पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद करते हैं।

Q3. क्या अविवाहित लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?

हां। विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए और अविवाहित लड़कियां मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं।

Q4. हरतालिका तीज का व्रत कैसे खोलते हैं?

व्रत अगले दिन सुबह पूजा पूरी करने के बाद खोला जाता है। सबसे पहले जल ग्रहण किया जाता है, फिर प्रसाद।

Q5. हरतालिका तीज और हरियाली तीज में क्या अंतर है?

हरियाली तीज सावन माह में मनाई जाती है और उसमें फलाहार की छूट होती है। हरतालिका तीज भाद्रपद माह में आती है और यह निर्जला व्रत है।


लेखक: V.S. Chandravanshi, Founder — Suvichar4u.com

11 सित॰ 2026

गणेश चतुर्थी 2026: तिथि, स्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 September 2026 को है। गणपति स्थापना का सबसे शुभ मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है। दस दिन का गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी यानी शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को गणेश विसर्जन के साथ पूरा होगा।

गणेश चतुर्थी वह त्योहार है जिसमें तैयारी ही आधा उत्सव बन जाती है। मूर्ति लाने से लेकर विसर्जन तक दस दिन घर में एक मेहमान रहता है, और वो मेहमान कोई साधारण नहीं होता। वह साक्षात गणेश जी होते हैं। गणपती बाप्पा मोरया, मंगलमूर्ती मोरया!

Ganesh Chaturthi

गणेश चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त

पर्व की तिथिसोमवार, 14 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी
चतुर्थी तिथि आरंभ14 सितंबर 2026, सुबह 7:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त15 सितंबर 2026, सुबह 7:44 बजे
गणपति स्थापना मुहूर्तसुबह 11:02 – दोपहर 1:31 (मध्याह्न काल)
चंद्र दर्शन वर्जित समय14 सितंबर, सुबह 9:01 – रात 8:09
गणेश विसर्जनशुक्रवार, 25 सितंबर 2026 (अनंत चतुर्दशी)

यहां पर दी गई समय, दिल्ली/एनसीआर के पंचांग पर आधारित हैं। मध्याह्न मुहूर्त सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है, इसलिए दूसरे शहरों में यह थोड़ा आगे-पीछे होगा। अपने शहर का पंचांग एक बार देख लें।

गणेश चतुर्थी के 25 सुंदर सुविचार

स्थापना सुबह क्यों नहीं, दोपहर में क्यों?

यह वह सवाल है जिस पर हर साल घरों में बातचीत होती रहती है। ज़्यादातर पूजाएं सुबह होती हैं, पर गणपति की स्थापना मध्याह्न काल में की जाती है।

वजह सीधी है — मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय हुआ था। इसलिए दिन का मध्य भाग, यानी मध्याह्न काल, स्थापना के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। 2026 में यह समय 11:02 AM से 1:31 PM तक है।

अगर किसी वजह से यह मुहूर्त निकल जाए तो घबराएं नहीं। चतुर्थी तिथि 15 सितंबर की सुबह 7:44 तक चल रही है — उसी के भीतर श्रद्धा से स्थापना कर लीजिए।

पूजा सामग्री की लिस्ट

  • मिट्टी की गणेश मूर्ति (Eco-friendly)
  • लाल कपड़ा और चौकी
  • रोली, चंदन, अक्षत, हल्दी, कुमकुम
  • दूर्वा घास (21 गांठ) — गणपति को सबसे प्रिय
  • मोदक या लड्डू
  • लाल फूल, विशेषकर गुड़हल
  • घी का दीपक, अगरबत्ती, कपूर
  • नारियल, सुपारी, पान के पत्ते
  • जल से भरा कलश और आम के पत्ते
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)

गणेश चतुर्थी पूजा विधि (step by step)

  1. सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान को धोकर साफ करें।
  2. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर थोड़े अक्षत रखें।
  3. मध्याह्न मुहूर्त में मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें। मूर्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
  4. प्राण प्रतिष्ठा करें — हाथ में अक्षत और फूल लेकर गणपति का आवाहन करें और "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करें।
  5. पंचामृत से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से। मूर्ति को साफ कपड़े से पोंछ लें।
  6. चंदन और सिंदूर लगाएं, जनेऊ अर्पित करें।
  7. 21 दूर्वा चढ़ाएं। बिना दूर्वा के गणपति की पूजा अधूरी मानी जाती है।
  8. मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और फल अर्पित करें।
  9. दीपक जलाकर आरती करें और परिवार के साथ प्रसाद बांटें।
  10. अगले दस दिन सुबह-शाम आरती और भोग जारी रखें।

गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखते?

कथा के अनुसार एक बार गणेश जी अपने वाहन मूषक पर सवार होकर जा रहे थे और गिर पड़े। चंद्रमा ने उनका उपहास किया। नाराज़ होकर गणेश जी ने श्राप दिया कि जो भी चतुर्थी की रात चंद्रमा को देखेगा, उस पर झूठा कलंक लगेगा — इसे मिथ्या दोष कहते हैं।

2026 में यह वर्जित समय 14 सितंबर को सुबह 9:01 बजे से रात 8:09 बजे तक है। अगर गलती से चांद दिख जाए तो घबराने की ज़रूरत नहीं — "सिंहः प्रसेनमवधीत्" वाला श्रीकृष्ण से जुड़ा श्लोक पढ़ने की परंपरा है, और स्यमंतक मणि की कथा सुनने से दोष शांत माना जाता है।

गणपति कितने दिन रखें? विसर्जन कैलेंडर 2026

डेढ़ दिन15 सितंबर 2026
3 दिन16 सितंबर 2026
5 दिन18 सितंबर 2026
7 दिन20 सितंबर 2026
10 दिन (अनंत चतुर्दशी)25 सितंबर 2026

कितने दिन रखना है, यह पूरी तरह आपके परिवार की परंपरा पर निर्भर है। सभी अवधियां समान रूप से मान्य हैं।

एक ज़रूरी बात — मिट्टी की मूर्ति ही लें

प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां पानी में घुलती नहीं, और उन पर लगे रासायनिक रंग नदियों को नुकसान पहुंचाते हैं। मिट्टी की मूर्ति घर पर ही बाल्टी या टब में विसर्जित की जा सकती है, और उस पानी को गमले में डाला जा सकता है। भाव भी पूरा रहता है और नदी भी बचती है।

भगवान गणेश की पूजा और उत्सव का पर्व

गणेश चतुर्थी के 25 सुंदर सुविचार

गणेश चतुर्थी केवल भगवान गणेश की पूजा और उत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें बुद्धि, धैर्य, सकारात्मक सोच और अच्छे कर्मों की याद भी दिलाता है। यहां दिए गए ये Ganesh Chaturthi Suvichar आप अपने परिवार, दोस्तों और प्रियजनों के साथ साझा कर सकते हैं।

  1. “जहां भगवान गणेश का आशीर्वाद हो, वहां मन में विश्वास, जीवन में उत्साह और हर कदम पर नई उम्मीद बनी रहती है।”

  2. “गणपति बप्पा हमें केवल सफलता ही नहीं, बल्कि सही रास्ते पर चलने की बुद्धि और कठिन समय में धैर्य भी दें।”

  3. “हर नई शुरुआत गणेश जी के नाम से करें, क्योंकि शुभ सोच और सच्ची मेहनत से मंजिल का रास्ता आसान हो जाता है।”

  4. “विघ्नहर्ता के चरणों में विश्वास रखिए और अपने कर्मों पर मेहनत कीजिए, रास्ते में आने वाली मुश्किलें खुद छोटी लगने लगेंगी।”

  5. “गणेश जी की सबसे बड़ी सीख यही है कि बुद्धि के साथ लिया गया सही निर्णय जीवन की कई मुश्किलों को दूर कर सकता है।”

  6. “गणपति बप्पा आपके घर में सुख-शांति लाएं, आपके मन से चिंता दूर करें और जीवन को खुशियों से भर दें।”

  7. “जिस घर में श्रद्धा से गणेश जी का नाम लिया जाता है, वहां सकारात्मकता और अपनापन अपने आप बढ़ने लगता है।”

  8. “गणेश चतुर्थी हमें याद दिलाती है कि बड़ी से बड़ी शुरुआत भी छोटे से विश्वास और एक अच्छे संकल्प से होती है।”

  9. गणेश चतुर्थी का सुंदर संदेश: भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में श्रद्धा से याद किया जाता है। इस पर्व का सबसे सुंदर भाव यही है कि हम अपने जीवन में सकारात्मक सोच, अच्छे कर्म, धैर्य और परिवार के प्रति प्रेम को जगह दें। गणपति बप्पा का आशीर्वाद हमें हर परिस्थिति में सही निर्णय लेने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहे।

    इन गणेश चतुर्थी सुविचारों को आप WhatsApp, Facebook, Instagram और अन्य Social Media Platform पर शुभकामना संदेश के रूप में भी साझा कर सकते हैं।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    Q1. गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

    गणेश चतुर्थी 2026 सोमवार, 14 सितंबर 2026 को है। यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है।

    Q2. गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?

    गणपति स्थापना का सबसे शुभ मध्याह्न मुहूर्त 14 सितंबर 2026 को सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक है।

    Q3. गणेश विसर्जन 2026 कब है?

    मुख्य गणेश विसर्जन अनंत चतुर्दशी पर शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को होगा।

    Q4. गणेश जी को कौन सा भोग सबसे प्रिय है?

    मोदक गणेश जी का सबसे प्रिय भोग है। इसके अलावा बेसन के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू और केला भी अर्पित किए जाते हैं।

    Q5. गणेश पूजा में दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?

    दूर्वा गणेश जी को सबसे प्रिय मानी जाती है। परंपरा के अनुसार 21 दूर्वा, यानी दो-दो पत्तियों की गांठ बनाकर, अर्पित की जाती हैं।

    Q6. अगर मध्याह्न मुहूर्त निकल जाए तो क्या करें?

    चतुर्थी तिथि 15 सितंबर की सुबह 7:44 बजे तक है। इसी अवधि में श्रद्धा के साथ स्थापना कर लेना पूर्णतः मान्य है।


    लेखक: V.S. Chandravanshi, Founder — Suvichar4u.com
    अंतिम अपडेट: 7 सितंबर 2026

    नोट: सभी मुहूर्त दिल्ली/एनसीआर के पंचांग पर आधारित हैं। अपने शहर के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

4 सित॰ 2026

जन्माष्टमी 2026 शुभकामनाएं, स्टेटस और श्रीकृष्ण शायरी

इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है। Suvichar4u.com के इस पेज पर आपको जन्माष्टमी की शुभकामनाएं, WhatsApp स्टेटस, इंस्टाग्राम कैप्शन और श्रीकृष्ण भगवान की शायरी मिलेगी — सब कुछ कॉपी करके सीधे भेजने लायक।

जन्माष्टमी की रात कुछ अलग ही होती है। मंदिरों में श्री कृष्ण भगवान से संबंधित झांकी सजती है, घर में लड्डू गोपाल को झूला झुलाया जाता है, और ठीक बारह बजे शंख बजते ही पूरा माहौल भक्तिभाव में बदल जाता है। उसी भाव को अपने लोगों तक पहुंचाने के लिए नीचे दिए संदेश चुन लीजिए।

जन्माष्टमी 2026 शुभकामनाएं, स्टेटस और श्रीकृष्ण शायरी

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

1. बांसुरी की धुन, माखन की मिठास,
कान्हा का आशीर्वाद रहे आपके पास।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
2. जहाँ कृष्ण हैं, वहाँ चिंता कैसी?
वो संभालते हैं, बस भरोसा रखिए।
Happy Janmashtami 2026 आप सभी को!
3. आपके घर में नन्हे कान्हा के कदम पड़ें,
और हर कोना खुशियों से भर जाए।
जय श्री कृष्ण! राधे राधे!
4. मोर मुकुट, पीतांबर, हाथ में बांसुरी,
ऐसे कान्हा की कृपा रहे आप पर सदा। Happy Janmashtami! 
5. जो उसने दिया है, वही सबसे अच्छा है।
यही कृष्ण का पहला पाठ है।
जन्माष्टमी हार्दिक शुभकामनाएं।
6. माखन चोर, नंदकिशोर,
आपके जीवन में लाएं खुशियों का शोर। राधे-राधे, जय श्री कृष्णा!
7. हर मुश्किल में एक कृष्ण चाहिए,
जो कहे — "मैं हूँ न।"
जय श्री कृष्ण! Happy Janmashtami!
8. कान्हा की बांसुरी बजती रहे,
आपके घर में खुशियाँ सजती रहें।
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
जहाँ कृष्ण हैं

जन्माष्टमी WhatsApp स्टेटस (छोटे संदेश)

9. राधे राधे 🦚 जय श्री कृष्ण
10. मेरा तो जो कुछ है, वो गिरधर गोपाल। ❤️
11. कान्हा है तो कमी किस बात की।
12. हाथ में बांसुरी, दिल में भरोसा। 🎶
13. Happy Janmashtami 2026 ✨ #JaiShreeKrishna
14. जो होता है, कान्हा की मर्ज़ी से होता है।
15. नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की! 🙏
जय श्री कृष्ण

श्रीकृष्ण शायरी

16. वो बांसुरी सिर्फ धुन नहीं थी,
वो हर उलझे दिल का जवाब थी।
17. दुनिया कहती है संभल कर चलो,
कान्हा कहते हैं — चलो, मैं साथ हूँ।
18. उसने कभी हाथ नहीं छोड़ा,
हमने ही पकड़ना छोड़ दिया था।
19. जिसके सिर पर कृष्ण का हाथ हो,
उसे किसी और सहारे की क्या ज़रूरत।
20. मीरा ने कुछ नहीं मांगा था,
बस कान्हा को मांग लिया था।
और सब मिल गया।
21. माखन तो बहाना था,
असल में वो दिल चुराने आया था।
22. गीता की एक लाइन काफी है ज़िंदगी के लिए —
कर्म कर, फल की चिंता मत कर।
Happy Janmashtami

बच्चों और परिवार के लिए संदेश

23. आपके घर का नन्हा कान्हा हमेशा हँसता रहे,
और आपका आँगन झूले की आवाज़ से गूंजता रहे।
24. दही-हांडी की मस्ती, झूले की मिठास,
यह जन्माष्टमी हो आपके लिए खास।
25. लड्डू गोपाल आपके घर में विराजें,
और हर दिन उत्सव जैसा लगे।

जन्माष्टमी 2026 — जरूरी जानकारी

पर्व की तिथिशुक्रवार, 4 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, कृष्ण अष्टमी
मुख्य पूजानिशीथ काल (मध्यरात्रि) में

पूजा का सटीक निशीथ मुहूर्त और व्रत पारण का समय अपने शहर के पंचांग से जरूर मिला लें, क्योंकि यह सूर्यास्त और चंद्रोदय के हिसाब से बदलता है।

Jai Shree Krishna

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. जन्माष्टमी 2026 कब है?

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को है। यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है।

Q2. जन्माष्टमी की पूजा किस समय की जाती है?

जन्माष्टमी की मुख्य पूजा निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में की जाती है, क्योंकि मान्यता है कि श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था।

Q3. जन्माष्टमी पर क्या भोग लगाया जाता है?

माखन-मिश्री, पंजीरी, धनिया पंजीरी, खीर, पेड़ा और मौसमी फल मुख्य भोग हैं। तुलसी दल के बिना भोग अधूरा माना जाता है।

Q4. दही हांडी कब मनाई जाती है?

दही हांडी जन्माष्टमी के अगले दिन मनाई जाती है। महाराष्ट्र और गुजरात में यह सबसे बड़े स्तर पर होती है।


लेखक: V.S. Chandravanshi, Founder — Suvichar4u.com
अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026

27 अग॰ 2026

रक्षाबंधन 2026: कब है राखी? शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के उन सभी हिस्सों में मनाया जाएगा, जहां हिंदू समुदाय के लोग रहते हैं। इस वर्ष राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक है। 

इस बार भद्रा सूर्योदय से पहले ही खत्म हो जायेगी, इसलिए सुबह का पूरा समय राखी बांधने के लिए शुभ है। लेकिन एक बात ध्यान रखिए कि पूर्णिमा तिथि 9:48 बजे समाप्त हो रही है, अथार्त इस वर्ष दोपहर या अपराह्न का कोई मुहूर्त नहीं मिलेगा। राखी सुबह ही बांध लीजिए, क्योंकि यह समय बहुत शुभ है।

रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त और राखी की थाली

हर वर्ष सावन की पूर्णिमा आते ही घर में वही चहल-पहल शुरू हो जाती है। थाली सजती है, मिठाई आती है और बहन सुबह से अपने भाई का इंतज़ार करती है, ताकि वह प्यार से अपने भाई की कलाई पर राखी बाँध सके। इस बार भी वही प्यारा दिन आने वाला है। बस, इस रक्षाबंधन को थोड़ा संभलकर और धैर्य के साथ मनाएँ।

रक्षाबंधन 2026 कब है — 27 या 28 अगस्त?

कई कैलेंडर में 27 अगस्त भी दिख रहा है, और यही कन्फ्यूजन की वजह है। सच्चाई सीधी है: पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होती है, लेकिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा 28 अगस्त को मिल रही है। हिंदू पंचांग में रक्षाबंधन की तारीख तय करने के लिए सूर्योदय के समय की तिथि देखी जाती है। इसलिए रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को ही मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त (Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat)

पर्व की तिथि शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
पूर्णिमा तिथि आरंभ 27 अगस्त 2026, सुबह 9:08 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त 28 अगस्त 2026, सुबह 9:48 बजे
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 से सुबह 9:48 बजे तक
कुल समय लगभग 3 घंटे 51 मिनट
भद्रा काल 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त
अपराह्न मुहूर्त इस वर्ष उपलब्ध नहीं

ऊपर दिए गए समय Delhi/Delhi NCR के पंचांग पर आधारित हैं। Gurugram में यही समय सुबह 5:58 से शुरू होता है। दूसरे शहरों में सूर्योदय के हिसाब से 10 से 25 मिनट का अंतर आ सकता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग एक बार जरूर देख लें।

इस बार भद्रा की चिंता क्यों नहीं है?

राखी बांधने में सबसे बड़ा डर भद्रा काल का होता है। परंपरा में भद्रा के दौरान रक्षासूत्र बांधना कभी भी शुभ नहीं माना जाता, और पिछले कुछ वर्षों में इसी वजह से लोगों को दोपहर तक इंतज़ार करना पड़ा था।

इस वर्ष ऐसा नहीं है। भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही है। मतलब जैसे ही सुबह होगी, राखी बांधने का समय शुभ हो जायेगा। बस देर मत कीजिए — 9:48 के बाद पूर्णिमा ही नहीं रहेगी।

राखी की थाली में क्या-क्या रखें?

  • राखी या रक्षासूत्र
  • रोली और चंदन
  • अक्षत (साबुत अरवा चावल)
  • घी का दीपक और अगरबत्ती
  • मिठाई या गुड़
  • नारियल (जहाँ पर भारत में परंपरा हो)
  • एक साफ लाल या पीला कपड़ा थाली के नीचे जरूर रखें

राखी बांधने की विधि (Step by Step)

  1. सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर दीपक जलाएं।
  2. सबसे पहले भगवान गणेश (Lord Ganesha) और अपने कुलदेवता को राखी अर्पित करें, फिर आगे बढ़ें।
  3. भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं।
  4. भाई के माथे पर रोली (Vermilion or Red kumkum Powde) और चंदन (Sandalwood) का तिलक लगाएं, फिर उस पर अक्षत लगाएं।
  5. भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें।
  6. दीपक से आरती उतारें और मिठाई खिलाकर मुँह मीठा कराएं।
  7. भाई बहन को उपहार दे और उसकी रक्षा का वचन दे। छोटी बहन हो तो भाई आशीर्वाद दे, बड़ी बहन हो तो भाई उसके चरण स्पर्श करे।
राखी बांधने की विधि - भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र


रक्षाबंधन का महत्व क्या है?

रक्षाबंधन का धागा दिखने में मामूली सा होता है, लेकिन उसके पीछे एक वादा होता है। बहन भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है, और भाई उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता है। यही इस पर्व की पूरी आत्मा और खूबसूरती है।

पुरानी कथाओं में इसके दो सुंदर उदाहरण मिलते हैं। एक कथा के अनुसार माता लक्ष्मी (Goddess Lakshmi) ने राजा बलि को रक्षासूत्र (Raksha Sutra) बांधकर उन्हें अपना भाई बनाया था। दूसरी कथा महाभारत की है, जिसमें द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांधा था, और श्रीकृष्ण ने जीवन भर उनकी रक्षा का वचन निभाया।

आज यह पर्व सिर्फ सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा। चचेरे-ममेरे भाई-बहन, पड़ोसी, दोस्त अथार्त जिस रिश्ते में अपनापन है, वहाँ राखी बंधती है। और जो बहनें दूर हैं, वे राखी कूरियर से भेजकर वीडियो कॉल पर वही रस्म पूरी कर लेती हैं। समय के साथ इस त्योहार को मनाने का तरीका आज कहीं-कहीं थोड़ा बदल जरूर गया है, लेकिन इसके पीछे की भावनाएँ आज भी वही हैं।

रक्षाबंधन 2026 की शुभकामनाएं और शायरी

नीचे दी गई शुभकामनाएं आप WhatsApp, Instagram, Facebook या SMS पर सीधे Share कर सकते हैं।

भाई के लिए शुभकामनाएं

1. कच्चे धागे में प्यार अपार,
भाई-बहन का रिश्ता बेशुमार।
सदा बना रहे ये प्यार का बंधन,
रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ हर पल!
2. तेरी कलाई पर मेरा नाम रहे,
हर मुश्किल में तेरा काम आसान रहे।
Happy Raksha Bandhan 2026!
3. लड़ते भी हैं, मनाते भी हैं,
पर एक-दूसरे के लिए सब कुछ छोड़ आते भी हैं।
रक्षाबंधन मुबारक हो, भाई!
4. भगवान तुम्हें इतनी खुशियाँ दे
कि गिनने के लिए दिन कम पड़ जाएं।
राखी की ढेर सारी शुभकामनाएं।
5. दुनिया चाहे साथ छोड़ दे,
मेरा भाई कभी नहीं छोड़ेगा।
यही मेरा विश्वास है, यही मेरी राखी है।
जो भाई को कुशल-मंगल रखें
6. छोटी सी राखी, बड़ा सा प्यार,
मुबारक हो तुम्हें रक्षाबंधन का त्योहार।
7. हर साल यह धागा बांधती हूँ,
और हर साल वही प्रार्थना करती हूँ —
मेरा भाई हमेशा खुश रहे।
8. तू मेरा गुस्सा भी है, मेरा सुकून भी,
मेरी शिकायत भी है, मेरा जुनून भी।
Happy Rakshabandhan, Bhai!

बहन के लिए शुभकामनाएं

9. तू घर की रौनक है, मेरी पहली दोस्त है,
तेरे बिना यह त्योहार अधूरा है।
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं, बहना।
10. तूने राखी बांधी है तो समझ ले,
तेरी हर परेशानी अब मेरी है।
11. मेरी छोटी बहन, मेरी सबसे बड़ी ताकत।
हमेशा मुस्कुराती रह। Happy Raksha Bandhan!
12. दूर रहकर भी तू पास है,
तेरी राखी मेरे लिए सबसे खास है।
13. भगवान करे तेरी हर ख्वाहिश पूरी हो,
और तेरी हँसी कभी कम न हो।
राखी की शुभकामनाएं, बहन।

दूर रहने वाले भाई-बहन के लिए

14. दूरी सिर्फ किलोमीटर की है,
दिल तो आज भी उसी आँगन में है।
Happy Raksha Bandhan!
15. राखी कूरियर से भेजी है,
पर दुआ सीधे दिल से भेजी है।
16. इस बार साथ नहीं मना पाए,
पर तेरी याद पूरे दिन साथ रही।
रक्षाबंधन मुबारक।

रक्षाबंधन 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं

 

WhatsApp और Instagram स्टेटस के लिए छोटी लाइनें

17. रिश्ता वही, जो निभाया जाए। 🧵 #RakshaBandhan2026
18. मेरी कलाई, मेरी बहन का हक। ❤️
19. एक धागा, हज़ार दुआएं।
20. भाई-बहन का रिश्ता — दुनिया का सबसे बेफिक्र रिश्ता।
21. Rakhi 2026 ✨ भाई हो तो ऐसा।
22. सारे त्योहार अच्छे हैं, पर यह वाला अपना है। 🙏

रक्षाबंधन 2026 से जुड़े सवाल-जवाब (FAQ)

Q1. रक्षाबंधन 2026 कब है?

रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को है। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9:08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी।

Q2. राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है?

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 28 अगस्त 2026 को सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक है। यह लगभग 3 घंटे 51 मिनट का समय है।

Q3. क्या 2026 में भद्रा काल राखी में बाधा बनेगा?

नहीं। 28 अगस्त 2026 को भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए पूरी सुबह राखी बांधने के लिए शुभ है।

Q4. क्या इस बार दोपहर में राखी बांध सकते हैं?

नहीं। पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे समाप्त हो रही है, इसलिए 2026 में अपराह्न (दोपहर) का मुहूर्त उपलब्ध नहीं है। राखी सुबह ही बांध लेनी चाहिए।

Q5. राखी किस हाथ में बांधी जाती है?

राखी भाई की दाहिनी कलाई पर बांधी जाती है। राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

Q6. रक्षाबंधन 27 अगस्त को क्यों दिख रहा है?

क्योंकि पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह से शुरू हो जाती है और दो तारीखों में फैली रहती है। लेकिन त्योहार की तारीख सूर्योदय के समय की तिथि से तय होती है, जो 28 अगस्त को मिल रही है। इसलिए सही तारीख 28 अगस्त 2026 है।


लेखक: V.S. Chandravanshi, Founder — Suvichar4u.com
अंतिम अपडेट: 27 अगस्त 2026

नोट: सभी मुहूर्त दिल्ली/एनसीआर के पंचांग पर आधारित हैं। अपने शहर के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

Happy Rakshabandhan 2026 | रक्षाबंधन सुविचार

Suvichar4u.com की ओर से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ


रक्षाबंधन हमारे देश में भाई-बहन के प्रेम का त्योहार (An Indian Festival) है, जो प्राचीन काल से ही मनाया जाता रहा है। यह श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस त्योहार में बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और भाई उसकी रक्षा करने का वचन देता है, तथा बहन भाई की लंबी उम्र की कामना करती है। यह भाई-बहन के प्रेम को भी प्रदर्शित करता है।

अब तो प्रकृति की रक्षा हेतु वृक्षों को भी राखी बाँधने की परंपरा शुरू हो गई है। आजकल बाजार में बहुत सारी राखियाँ बेची जाती हैं, जो कच्चे सूत, रेशमी धागे, रंगीन कलावे, सोने या चांदी से बने होते हैं और देखने में बहुत सुंदर लगते हैं।

Happy Rakshabandhan 2026


राखी का जिक्र हमारे प्राचीन ग्रंथ महाभारत में भी मिलता है। महाभारत काल में द्रौपदी ने श्रीकृष्ण को और कुंती ने अभिमन्यु को राखी बाँधी थी।

मेरे सभी मित्रजनों और इस ब्लॉग को पढ़ने वाले भाई-बहनों को मेरी ओर से तथा www.suvichar4u.com की ओर से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

रक्षाबंधन से संबंधित कुछ अनमोल वचन



Badhai Ho Badhi Rakhi Aai,  Meri Pyari Bahana Dher Saari Mithai Laai

Badhai Ho Badhi Rakhi Aai,
Meri Pyari Bahana Dher Saari Mithai Laai,
Sabse Sundar Rakhi Usne Meri Kalai Par Sajai,
Aai Re Aai Khushiyon Ki Bela Aai!

Har Bahana Karati Hain Ishawar Se Duva,  Bhai Ko Mile Jindagi Khushnuma

Har Bahana Karati Hain Ishawar Se Duva,
Bhai Ko Mile Jindagi Khushnuma,
Kabhi Na Ho Uske Mathe Par Lakire,
Jiwan Ki Ho Sada Sundar Tasvire.

Bhai Bahan Ke Rishte Ko Jo Banaye Anootha Bandhan

 Bhai Bahan Ke Rishte Ko Jo Banaye Anootha Bandhan,
Wo Nirala Tyauhar Hai Rakshabandhan,
Aaiye Manaye Aur Kare Sabhi Kan Pyar Se Abhinandan

Sawan Ki Bauchharon Ke Bich Sundar Phool Khila hai

Sawan Ki Bauchharon Ke Bich Sundar Phool Khila hai,
Bhai Bahan Ke Rishte Ki Yah Pawan Bela Hain,
Ghar Men Hain  Aisi Chahal Pahal Jaise Koi Mela,
Bahanon Ke Liye Git Ga Raha Hai Bhai Alabela

Bin Bhai Bahan Ke Hain Adhura Pariwar,  Ye Rishta Hain Ghar Ki Sabse Sundar Shaan

Bin Bhai Bahan Ke Hain Adhura Pariwar,
Ye Rishta Hain Ghar Ki Sabse Sundar Shaan,
Tyauharon Men Hain Rakhi Ka Apna Maan,
Ji Jaan Se Manayenge Rakhi Ka Tyauhar.

रक्षा बंधन - एक सच्ची कहानी

कहानी शुरू करने से पहले रक्षा बंधन के लिए एक सुविचार - 

रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

क्या आप मेरी बहन बनेगी - एक छल, छोटी सी सच्चाई

कहानी की शुरुआत होती हैं एक लड़के से, जिसने Facebook पर एक post डाली की, क्या कोई लड़की मेरी Sister बनेगी, मेरी कोई बहन नही हैं, अगर मेरी कोई sister बनना चाहें तो उसका बहुत आभार रहूंगा।

"बहुत से लोगों ने comment किया, पर उन सब से हट के, facebook पर एक लड़की थी, जिसने comment किया उस post पर क्या आप relation निभा पायेंगे?
उस लड़के का रिपालाई आया जरूर sister हम पूरें दिल से relation निभाएंगे, हम आपके लिए जान भी देंगे, बस आप मेरी बहन बन जाइयें..........

Raksha Bandhan - A true story
comment, reply में लड़की ने लड़के से पूछा कहा रहते हो, क्या करते हो अपनी Photo दिखाओं और बहुत सारी चीजें पूछी लड़के ने भी यही सब किया, कुछ दिनों तक यही सब चलता रहा, finally लड़की मान गयी, और लड़के से कहा, हाँ मैं आपकी sister बन जाऊंगी, लड़का बहुत happy हुआ, कुछ दिनों तक भाई-बहन का love चलता रहा, मानो दो बिछड़े हुये भाई-बहन मिल गयें हो, बहुत से वादें हुये, Rakshaabandhan में मिलने आना, आप अपनी wedding में बुलाना, I will definitely come, घर के Every work मैं हाथ बाटऊगा, मानों दो दिल एक हो गयें थे, दोनो बहुत खुश थे।

फिर एक दिन suddenly लड़के ने message किया, जिसे पढ़ने के बाद लड़की के ऑख में ऑसू आ गऐं, उसने लिखा, दीदी क्या आपका कोई Biofrand हैं अगर हैं तो relation कहा तक पहुंच हैं, क्या-क्या कर लिया थोड़ा बताइयें। लड़की ने reply किया brother तुम ऐसा क्यूं बोल रहें हो, तो लड़के ने जवाब दिया कि ये सब तो आजकल चलता ही रहता है। डरियें नहीं बता दीजियें, लड़की ने फिर reply किया 
you are mad. इस तरह से बात मत करों, तुम्हें शर्म आनी चाहिए।

लड़के ने इसके बाद reply किया कि इसमें शर्म की क्या बात हैं sister, तुम तो ऐसा बन रही हो, जैसे कुछ आपको पता ही न हो, ना जाने आपने कितनो के साथ मुंह मारा होगा और कितनो के साथ सोई होगी, अगर तुमको बुरा ना लगें तो मैं भी आपके साथ सो सकता हूं।

ऐसा सुनकर लड़की सोच में पड़ गई और उसे ऐसा लगा की उसके पैरों से जमी खिसक गई हो।

वह यह समझ नहीं पा रही थी कि कल तक वो लड़का जो बहन पर जान देने को तैयार था आज वह अश्लील बातों पर उतारू हो गया। लड़की के आंखों में आंसू आ गयें और रोते हुए लड़के से सिर्फ एक बात कही कि सुने मेरे बदले हुए भाई, मैं एक अनाथ लड़की हूं। कुछ दिन पहले ही मुझे नौकरी मिली है जिसमें से थोड़े रूपये बचाकर मैने मोबाईल खरीदा है और थोड़े दिन पहले ही Facebook account create किया है। मेरा कोई नहीं ना भाई, न मां, न बाप और न ही कोई रिश्तेदार। इसलिए जब तुम से बात कि तो ऐसा लगा की तुम मेरे सच्चे भाई बन सकते हों, मुझे ऐसा लगा कि मेरे बिछड़ भाई मिल गया है। मैं यह नहीं जनती थी कि दुनियां में तेरे जैसे कमीने लोग भी होते हैं जो भाई बहन के relation को तार तार करने के लिए उतारू हो जाते हैं। मैने दुनिया कि सबसे बड़ी गलती की जो तुझे भाई बना लिया। मेरी एक दोस्त कहती है कि आजकल किसी पर इतना विश्वास करना ठीक नहीं होता है। यह Facebook की दुनियां है यहां किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। 

सुन बदले हुए भाई मेरा कोई Boyfriend नहीं है।  मझे अब तक जिंदगी में इतना दुख मिला है कि मैने इस सब के बारे में कभी सोचा ही नहीं। मैने तो यह भी सोच लिया था कि इस रक्षाबंधन (Raksha Bandhan)पर तुझे राखी बांधुगी लेकिन तू तो इस इज्जत के लायक भी नहीं है। अगर अभी भी कोई शर्म बाकी हो तो जा कहीं चुल्लू भर पानी में डूब मर। मुझे अनाथ होने से इतना दुख नहीं हुआ जितना तेरी बात से। 

अब मैं शायद किसी पर विश्वास नहीं करूंगी। इसलिए मैं अपनी आईडी बंद कर रही हूं। तुमने भले ही मझे अपनी जरूरत की चीज समझा लेकिन मैं तो तुझे अपना भाई ही मानती थी। कभी भी किसी के साथ इस तरह का झुठा नाटक मत करना क्योंकि इससे बहुत दर्द होता है और किसी न सच ही कहा है कि दिल टूटने की आवाज नहीं होती पर दर्द बहुत होता है। इसके बाद लड़की ने कभी भी Facebook account नहीं create किया। 

दोस्तों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कभी भी किसी से झुठा नाटक नहीं करना चाहिए और न ही किसी का दिल दुखाना चाहिए। ऐसा करने से हम अपने आप को खुद की नजरों में तो गिरा ही लेते हैं तथा साथ ही साथ दूसरों के नजरों में भी। इस प्रकार के बहुत से केश आजकल Facebook या दूसरे और Website जैसे Twitter, Instagram आदि पर सुनने को मिलता है। इसलिए ध्यान रखिएं कही कोई आपके साथ ऐसा तो नहीं कर रहा है। 

भाई बहन का रिश्ता एक पवित्र रिश्ता होता है इसे समझे! 

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धन्यवाद

रक्षाबंधन सुविचार और अनमोल वचन

Slogan on raksha bandhan in Hindi

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Raksha bandhan status in hindi




As we grew up, my brothers acted like they didn’t care, but I always knew they looked out for, me and were there!
Your love makes me feel proud, and on this day I want to shout it out loud. Haappy Raksha Bandhan My Syster.
Raksha Bandhan
Raksha Bandhan is a special time to celebrate this emotional connecting when a sister ties a Rakhi like a Holy Thread around her brother’s wrist, prays for his long life and the brother responds by offering her the gifts she loves the most.


Raksha Bandhan Ka Tyohar

I with you Happy Raksha Bandhan and I pray to God for your wealthy life. May you discover all the enjoyments of life, may all your visions come true. My best wishes will always be with your and I wish that you will always shower your blessings on me.


Rishta Bhai Bahan Ka

One of the most excellent things about being an adult is the understanding that you can distribute with your sister still have prosperity for yourself.

Sending you Leads of love and Good wishes

A sister can be seen as an important person who is both us and very much not us. – A individual kind of double

The festival of sister and brother

Raksha Bandhan 2016 Quotes for you

Rakshabandhan ke liye suvichar

Rakshabandhan 2026 | प्यार और विश्वास के पवित्र बंधन

Rakshabandhan 2026

रक्षाबंधन 2026: प्यार और विश्वास के पवित्र बंधन का उत्सव

बचपन से ही रक्षाबंधन मेरे परिवार और मेरा सबसे प्रिय त्योहार रहा है। बचपन में मैं अपनी बहनों के साथ राखी, मिठाई और हंसी-ठिठोली से भरे कई लम्हे जी चुका हूँ। इस अनुभव ने मुझे इस पर्व की गहराई और महत्व को समझाया है। लेकिन आज मैं बहन से दूर हूँ क्योंकि उसकी शादी हो चुकी है और वह बिहार राज्य में रहती है, जबकि मैं दिल्ली में हूँ। इसलिए राखी का त्योहार हम दूर से ही मना रहे हैं। मेरे लिए राखी का त्योहार बहुत पवित्र है।

रक्षाबंधन 2026 की तिथि

इस साल रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह दिन सावन माह की पूर्णिमा को आता है और पूरे देश में भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक बनता है।

Rakshabandhan 2025

इतिहास और मान्यता

भारतीय पुराणों और इतिहास में रक्षाबंधन से संबंधित कई प्रेरणादायक प्रसंग पढ़ने को मिलते हैं — जैसे द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा या रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी। इन उदाहरणों से समझ आता है कि यह बंधन केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और आपसी विश्वास पर आधारित होता है।


परंपरागत विधि

इस दिन बहनें पूजा की थाली सजाकर, भाई को तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और राखी बांधती हैं। भाई अपनी बहन को उपहार देकर जीवनभर उसकी रक्षा और सम्मान का वचन देता है।

आज के समय में रक्षाबंधन

वैसे देखा जाए तो आज का युग डिजिटल युग है, लेकिन आज भी रक्षाबंधन त्योहार की भावना उतनी ही प्रबल है, जितनी पहले देखने को मिलती थी। दूर रहने वाली बहनें ऑनलाइन राखी भेजती हैं और वीडियो कॉल के जरिए तिलक व आशीर्वाद का आदान-प्रदान करती हैं। यह साबित करता है कि दूरी या समय रिश्तों को कमजोर नहीं कर सकते।

2026 में रक्षाबंधन को खास बनाने के सुझाव

  • परिवार के साथ समय बिताएं
  • बहनों को सिर्फ उपहार नहीं, सम्मान और स्नेह दें
  • दूर रहने वाले भाई-बहनों से मिलें या वीडियो कॉल करें
  • इको-फ्रेंडली राखी का इस्तेमाल कर पर्यावरण का ख्याल रखें
  • जरूरतमंद बच्चों को भी इस खुशी में शामिल करें

2026 में रक्षाबंधन को खास बनाने के सुझाव


विश्वसनीयता और भरोसा

मैंने भारतीय त्योहारों और परंपराओं पर कई लेख पहले भी लिखे हैं, जिन्हें मेरे पाठकों ने काफी सराहा है। मेरा उद्देश्य न केवल जानकारी देना है, बल्कि अपने अनुभव और शोध के आधार पर सांस्कृतिक मूल्यों को सटीक और विश्वसनीय रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि आप भी इससे प्रेरणा लेकर समाज में उचित और सुविचार के मूल्यों को फैलाएं।

अंत में

रक्षाबंधन हमें यह याद दिलाता है कि रिश्तों की नींव प्यार, विश्वास और जिम्मेदारी पर टिकी होती है। इस रक्षाबंधन पर केवल रस्में न निभाएं, बल्कि रिश्तों को और गहरा बनाएं तथा आपसी संबंध को मजबूत करें।

आप सभी को रक्षाबंधन 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं।

- V.S. Chandravanshi

(भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों पर गहन शोध और व्यक्तिगत अनुभव के साथ मेरे इस लेख को पढ़ें)

नीचे कुछ सुविचार के लिंक दिए गए हैं। उन्हें भी पढ़ें और अच्छा लगे तो दोस्तों के साथ साझा करें।

Happy Rakshabandhan | रक्षाबंधन सुविचार

Raksha Bandhan Quotes, Messages and Greetings

26 अक्टू॰ 2025

Chhath Puja 2025 | छठ पूजा | छठ महापर्व पूजा शुभ मुहूर्त | कब है नहाय-खाय?

छठ पूजा (छठ महापर्व) 2025, कब है खरना और नहाय-खाय?

Chhath Puja हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो सूर्य भगवान और छठी मैया की आराधना के लिए समर्पित है। इस पावन त्यौहार में व्रती चार दिनों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए प्रकृति और जीवन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पूजा करते हैं।

उत्तर भारत में खासतौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल और असम में छठ पूजा धूमधाम के साथ मनाई जाती है। अब तो छठ पूजा (Chhath Puja) की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी है कि यह त्यौहार दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा यह त्यौहार अब विदेशों में, जैसे मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया), अमेरिका और मॉरीशस आदि देशों में भी मनाया जाने लगा है। इस पर्व पर विशेष तौर पर गंगा मां और सूर्य भगवान की पूजा की जाती है।


छठ पूजा एक ऐसा भारतीय त्यौहार है जिसमें सूर्य देव और छठी मां की पूजा की जाती है। यह महापर्व दिवाली के छठे दिन मनाया जाता है। छठ का पर्व चार दिनों तक बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इसकी शुरुआत पहले दिन नहाय-खाय से होती है। इसके बाद दूसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, फिर अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद इस पर्व का समापन हो जाता है। इस त्यौहार की विशेषता यह है कि इसमें सभी प्रकार से प्रकृति की पूजा की जाती है।

छठ पूजा महत्व क्या है?

Chhat Puja मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मां की उपासना का त्यौहार है। इस त्यौहार को जो लोग रखते हैं, वे लगभग 36 घंटे का उपवास करते हैं। इस उपवास के दौरान कुछ भी खाना-पीना वर्जित होता है। यहां तक कि पानी का भी सेवन नहीं किया जाता। यह एक प्रकार का निर्जला व्रत होता है। इसलिए ही इसे हिंदुओं में महापर्व कहा जाता है, क्योंकि निर्जला व्रत रखना सबसे कठिन होता है, वह भी लगभग 36 घंटे का। इस पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। इसका समापन डूबते सूर्य और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाता है।

छठ त्योहार के दौरान छठ पूजा के गीत गाने का प्रचलन है। लोग छठ पूजा समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं। जिस परिवार के लोग Maha Parv Chhath Puja में शामिल होते हैं, उनकी आस्था पर कोई भी प्रश्नचिह्न नहीं उठाया जा सकता। यह एक महापर्व है जिसमें सूर्य भगवान और छठी मां (Chhathi Maa) की पूजा की जाती है। इसलिए छठ गीतों में सूर्य भगवान और छठी मां का गुणगान किया जाता है।

हमें एक बात स्पष्ट रूप से समझनी चाहिए कि भगवान सूर्य की कृपा से ही इस संसार में जीवन संभव है। बिना उनके जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए अगर हम जीवित प्राणी हैं, तो हमें इस महापर्व का सम्मान अवश्य करना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि भगवान सूर्य और छठी मां की इस दिन पूजा करने से उनके भक्तों पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है। उनकी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। हिंदू त्योहारों में सूर्य देव की उपासना करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
Chhath Puja 2025


छठ पूजा शुभ मुहूर्त (Chhath Puja 2025 Subh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि अथार्त इस बार 27 अक्टूबर 2025 को सुबह 06 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और 28 अक्टूबर को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर समाप्त होगी।

इस वर्ष 27 अक्टूबर की संध्या को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि 28 अक्टूबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। यही वह क्षण होता है जब छठ व्रती अपने उपवास का समापन करते हैं और भगवान सूर्य से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। 

कब दिया जाएगा अर्घ्य (Arghya 2025)

  • 27 अक्टूबर 2025 (षष्ठी तिथि): डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा।
  • 28 अक्टूबर 2025 (सप्तमी तिथि): उगते सूर्य को दूसरा और अंतिम अर्घ्य अर्पित किया जाएगा।

छठ पूजा का यह पर्व न सिर्फ श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह प्रकृति, जल और सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने का एक सुंदर उत्सव भी है। यह हमें सिखाता है कि जीवन की ऊर्जा और समृद्धि का मूल स्रोत सूर्य ही हैं, जिनकी उपासना के बिना जीवन की कल्पना भी अधूरी है।

छठ में सूर्य भगवान की पूजा के लिए चमत्कारी मंत्र


हम सभी जानते हैं कि छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मां की पूजा की जाती है। यदि आप इस पूजा में सूर्य को अर्ग देते समय नीचे दी जा रही मंत्र का जाप करते हैं तो आपकी मनोकामना जल्दी ही पूरी होती है। 
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते।।

इस मंत्र का जाप करने से बल, तेज, यश, मान-सम्मान और कीर्ति बनी रहती है।

कब है नहाय-खाय?

छठ पूजा की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जो इस बार 25 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा।

इस दिन व्रती स्नान-ध्यान कर सूर्य देव और कुल देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। फिर शुद्ध भोजन के रूप में चावल, दाल और लौकी की सब्जी खाई की जाती है। इसी के साथ छठ व्रती अगले दिनों के लिए स्वयं को शुद्ध और तैयार करते हैं।

कब है खरना?

छठ पूजा पर खरना का आयोजन 26 अक्टूबर 2025 को होगा। यह छठ पूजा का दूसरा दिन होता है और अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन छठ व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखते हैं और शाम के समय स्नान कर छठी मैया की पूजा करते हैं।

प्रसाद में चावल की खीर, गुड़, और फल-फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के बाद व्रती यही प्रसाद ग्रहण करते हैं, और इसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।

सूर्य भगवान की पूजा के लिए एक और मंत्र आपके लिए भलदायी हो सकता है। इसका जाप अवश्य ही करें-

ॐ मित्राय नम:, ॐ रवये नम:, ॐ सूर्याय नम:, ॐ भानवे नम:, ॐ खगाय नम:, ॐ घृणि सूर्याय नम:, ॐ पूष्णे नम:, ॐ हिरण्यगर्भाय नम:, ॐ मरीचये नम:, ॐ आदित्याय नम:, ॐ सवित्रे नम:, ॐ अर्काय नम:, ॐ भास्कराय नम:, ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम:

छठ पूजा में महिलाएं 36 घंटे का व्रत क्यों रखती हैं? 

Chhath का व्रत सिर्फ उपवास ही नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और आत्मसंयम की पराकाष्ठा है। महिलाएं बिना जल और अन्न के 36 घंटे तक व्रत रखती हैं ताकि सूर्य देव और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त हो सकें। यह Chhath Vart दिखाता है कि जब आस्था सच्ची हो, तो शरीर की सीमाएँ भी छोटी लगती हैं।



छठ पर नाक तक सिंदूर क्यों लगाया जाता है?

बहुत से लोग अक्सर प्रश्न करते हैं कि Chhath Puja पर महिलाएं नाक तक सिंदूर क्यों लगाती हैं। लेकिन जब आप इसका तर्क समझेंगे, तो आपको समझ में आएगा कि यह उचित है।

हम सभी जानते हैं कि हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाएं हमेशा सिंदूर लगाती हैं। छठ पूजा में महिलाओं के लिए मांग भरना अनिवार्य माना गया है। इस दिन महिलाएं मुख्य रूप से पीले सिंदूर से मांग भरती हैं।

हिंदू धर्म में सिंदूर को सुहाग की निशानी और पति की सेहतमंद, लंबी उम्र का प्रतीक माना गया है। बहुत से लोगों का मानना है कि इस दिन शादीशुदा महिलाएं जितनी लंबी सिंदूर लगाती हैं, उनके पति की उम्र भी उतनी ही लंबी होती है।

जो महिलाएं सिंदूर को छिपा लेती हैं, उनका पति समाज में छिप जाता है और तरक्की नहीं कर पाता। इससे पति की आयु कम हो जाती है। यही कारण है कि महिलाएं नाक तक सिंदूर लगाती हैं।

हिंदू धर्म में कई प्रकार की परंपराएं हैं, और हमें सभी परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।

छठ पूजा से सम्बंधित सुविचार:

Chhath Maha Parv ki Hardik Shubhkamnaye

छठ पूजा आये बनके उजाला,
खुल जाये आपकी किस्मत का ताला,
हमेशा आप पर रहे मेहरबान सूर्यदेव बनकर रखवाला,
यही दुआ करता है आपको चाहने वाला।
Wish you very happy Chhat Puja!

Chhath Puja Wishes

रथ पर होकर सवार सूर्या, देवता जी आये आपके द्वार, सुख सम्पत्ती मिले आपको आपार,
छठ पर्व की आपको शुभकामनाए। 
छठ पर्व की आपको शुभकामनाए।


Saat Ghdon ki hai jinki sawari,
N kabhi rooke, Na kabhi der kare, 
Aise hi hamare Soorydev,
Aao milkar kare is chhath par unki pooja,
Sabko hamari taraf se chhat parv ki hardik shubhkamanyen!

Sabko hamari taraf se chhat parv ki hardik shubhkamanyen!

Mandir ki Ghanti, Aarti ki thali, 
Nadi ke kinare sooraj ki laali, 
Jindagi men aaye khushiyon ki bahar, Aapko mubarak ho chhath ka tyohar!

Chhath Puja Ki Hardik Shbhkamnaye


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23 अक्टू॰ 2025

Bhai Dooj 2025: शुभ योग, तिलक मुहूर्त, और यम-यमुना कथा का महत्व

भाई दूज 2025: शुभ योग, तिलक मुहूर्त, और यम-यमुना कथा का महत्व

Suvichar4u.com की ओर से मैं V.S. Chandravanshi इस ब्लोग में स्वागत करता हूं। आज इस ब्लोग में हम भाई दूज 2025 से संबंधित शुभ योग, तिलक मुहूर्त, और यम-यमुना कथा का महत्व समझेंगे। यह त्यौहार 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) को भारत भर में भाई‑बहन के स्नेह का पर्व ‘भाई दूज’ परिवारों को फिर से एक सूत्र में बांधेगा। इस वर्ष तीन अत्यंत शुभ योग पड़ रहे हैं - आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, और रवि योग। इन योग के कारण आज का दिन बेहद मंगलकारी बन गया है।

क्या है भाई दूज का महत्व?

हिंदू पंचांग के अनुसार भाई दूज पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। यह दिवाली के पांचवें और अंतिम दिन आता है। बहनें इस दिन भाइयों को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु, समृद्धि और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं, जबकि भाई बहन को उपहार और आशीर्वाद देते हैं। कुछ राज्यों में इसे भाऊ बीज (Maharashtra & Goa), भाई फोटा (West Bengal), और भाई टीका (Nepal) भी कहा जाता है।​

भाई-बहन का रिश्ता प्यार और भरोसे का प्रतीक होता है।

भाई दूज पर यही प्यार भरा रिश्ता तब और गहरा हो जाता है जब वे एक-दूसरे के करीब आते हैं।

Bhai Dooj 2025

भाई दूज 2025: शुभ तिथि और मुहूर्त

भाई दूज का पर्व इस वर्ष 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जा रहा है। द्वितीया तिथि की शुरुआत 22 अक्टूबर की रात 8:16 बजे से हो गई है और यह 23 अक्टूबर की रात 10:46 बजे तक रहेगी।

तिलक का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक रहेगा, जो कुल 2 घंटे 15 मिनट का है। इसके अलावा, दिन के अन्य शुभ समय इस प्रकार हैं —

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:45 से 5:36 तक
  • अभिजीत मुहूर्त: 11:43 से 12:28 तक
  • अमृत काल: शाम 6:57 से रात 8:45 तक

इस वर्ष भाई दूज पर तीन विशेष शुभ योग बन रहे हैं जो इस प्रकार है-

  • आयुष्मान योग (सुबह से 24 अक्टूबर सुबह 5 बजे तक),
  • सर्वार्थ सिद्धि योग (24 अक्टूबर सुबह 4:51 से 6:28 तक),
  • और रवि योग (4:51 AM – 6:28 AM)।

ये तीनों योग भाई-बहन के लिए दीर्घायु और सौभाग्य का प्रतीक माने गए हैं।

यम‑यमुना कथा का धार्मिक महत्व

प्राचीन कथा के अनुसार, यमराज की बहन यमुना हमेशा उनसे मिलने की इच्छा रखती थीं। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज, यमुना से मिलने उनके घर पहुँचे। यमुना ने अपने भाई का तिलक किया और स्वादिष्ट भोजन से उनका स्वागत किया। प्रसन्न होकर यमराज ने कहा कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। तभी से इस दिन को यम द्वितीया या भाई दूज कहा जाने लगा और यह पर्व मनने लगा। 

यम‑यमुना कथा का धार्मिक महत्व


भाई दूज कैसे मनाया जाता है?

चलिए अब जानते हैं कि भाई दूज कैसे मानना चाहिए:

  • पूजा स्थल पर दीपक, तिलक सामग्री, रोली, चावल और मिठाई रखी जाती है।
  • बहनें तिलक करने से पहले भगवान गणेश और यम‑यमुना का पूजन करती हैं।
  • भाई को तिलक लगाकर बहन उसके मंगल‑जीवन की कामना करती है।
  • बदले में भाई अपनी बहन को उपहार और मिठाई देता है।
  • कई जगहों पर परिवार जन मिलकर भोजन करते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।
भाई दूज कैसे मनाया जाता है?


चलिए अब भाई दूज से संबंधित कुछ मत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर को जानते हैं-

Q1. Bhai Dooj 2025 कब है?

23 अक्टूबर 2025, गुरुवार को भाई दूज पूरे भारत में मनाया जा रहा है। यह द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर रात 8:16 से शुरू होकर 23 अक्टूबर रात 10:46 पर समाप्त होगी।

Q2. भाई दूज और राखी में क्या अंतर है?

रक्षा बंधन में भाई बहन की रक्षा का वचन देता है, जबकि भाई दूज पर बहन भाई की लंबी उम्र के लिए तिलक करती है।

Q3. भाई दूज पर कौन‑से योग बन रहे हैं?

आयुष्मान योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग — तीनों शुभ योग इस दिन एक साथ पड़ रहे हैं।

Q4. भाई दूज पर तिलक का मुहूर्त क्या है?

दोपहर 1:13 PM से 3:28 PM तक कुल 2 घंटे 15 मिनट का सर्वोत्तम तिलक मुहूर्त है।

Q5. भाई दूज कैसे मनाएं?

भाई‑बहन साथ पूजा करें, तिलक, मिठाई और उपहार का आदान‑प्रदान करें तथा पारंपरिक भोजन का आनंद लें।

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