Guru Ji Quote, Status and Thought | गुरु के लिए सुविचार

 Guru Ji Quote, Status and Thought in Hindi

Teacher Status in Hindi

Guru Ji Quote, Status and Thought in Hindi: नमस्कार दोस्तों, आज हम यहां पर गुरु के लिए दो शब्द या उन पर दिये गए सुविचार की चर्चा करेंगे। हम जानते हैं कि गुरू की महिमा सबसे महान होती है। गुरू के बिना ज्ञान पाना समंभव नहीं। इस संसार में सबसे बड़ा पापी वही व्यक्ति होता है जो गुरू का अपम्मान करता है। दोस्तों यदि आपको जीवन में सफलता प्राप्त करनी हो तो गुरू के सभी बातों को फोलों करना सीखें। इस संसार में बहुत से महापुरुष हुये है जिंहोने गुरू के बातों को अपने जीवन में अपनाकर सफलता पाई है। उन्होंने गुरु के लिए कई वचन और उपदेश भी दिये हैं जिनका वर्णन हम यहां पर करेंगे। 


बिन गुरु होय न ज्ञान -तुलसीदास


Guru Thoughts (गुरु के लिए सुविचार)

ऊपर दी गई Guru Thoughts में तुलसीदास जी ने यह समझाने की कोशिश की है कि बिना गुरु से ज्ञान लिए आप कभी भी ज्ञानवान नहीं बन सकते। यह बिल्कुल सत्य वजन है। दोस्तों क्या आपको पता है कि हमारे जीवन में हमारा सबसे पहला गुरु कौन होता है। अगर नहीं तो कोई बात नहीं। दोस्तों हमारा पहला गुरु हमारी मां होती है। क्योंकि वही हमें सबसे पहले चलना, खाना और पीना  सिखाती है। वही हमें जीवन को कैसे जीन है यह सिखाती है। क्या बिना मां के आप अपने जीवन को जीन सीख लेते क्या। नहीं ना। इसलिए गुरु का महात्व सबसे आगे होता है। उसका कभी भी अपम्मान न करें। 

दोस्तों बहुत से लोगों को गुरु शब्द का अर्थ पता नहीं होगा। चलये इसे समझने के लिए हम एक गुरगीता का सविचार लेते हैं। 

‘गु’ शब्द का अर्थ है ‘अंधकार’ और ‘रू’ का अर्थ है तेज; 

अज्ञान का नाथ करने वाला तेजरूप ब्रहृा, गुरु ही है, इसमें संशय नहीं है. – गुरुगीता


कहने का अर्थ है कि यदि आपको अज्ञांता से बाहर निकलना है तो आप सबसे पहले ऐसे गुरु को ढूंढे जो आपको प्रकार की ओर ले जाकर आपकी अज्ञांता को दूर करें। आपको इतना ज्ञान दें कि आप सही मार्ग को पहचान सकें। 



गुरु के लिए दो शब्द

हमारे देश में गुरु की महिमा को बताने के लिए गुरु पूर्णिमा नामक त्योहार मनाते हैं। इसके अलावा डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के दिन शिक्षक दिवस अथार्त टीचर्स डे भी मनाया जाता है। दोस्तों इन त्यौहार को मनाने के पीछे का मुख्य कारण है कि आपको गुरु के महानता को याद दिलाना तथा उनकी बातों का कैसे अमल करना है वह बताना। दोस्तों नीचे guru ji quotes और teacher quotes दी जा रही है जिसको पढ़ें और अच्छा लगे तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। 

Guru Ji Quote, Status and Thought


यह तन विष की बेलरी गुरु अमृत की खान

सीस दिए जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान -कबीर

गुरु सुविचार (Teacher Status in Hindi)

गुरू शिष्य को सफलता का मार्ग दिखाता है लेकिन उस मार्ग पर चलना शिष्य के स्वय का निर्णय होता है। 

विद्यालय के सबसे बड़ी संपत्ति उसमें पढ़ाने वाले गुरु होते हैं। 

किताब से मिला ज्ञान शयद लम्बे समय तक न चले लेकिन गुरु से मिला ज्ञान आपके साथ उम्र भर रहता है। 

गुरु का भार हर कोई नहीं उठा सकता क्योंकि उस पर भविष्य को बचाने का भार होता है। 

पिता का ऋणी तो हर पुत्र होता है लेकिन गुरु का ऋणी तो पुरा संसार है। 
जीवन में लेना है तो अनुभव लो क्योंकि उचित पाठ पढ़ाने वाला गुरु वही होता है।

गुरु की महिमा पर अन्य महापुरुषों का सुविचार


जो शिष्य होकर भी शिष्यचित बर्ताव नहीं करता, अपना हित चाहने वाले गुरू को उसकी घृष्टता क्षमा नहीं करनी चाहिए।- वेदव्यास

जिसने ज्ञान-रूपी अंजन की सलाई से अज्ञानरूपी अंधेरे से अंधी हुई आंखों को खोल दिया, उन श्री गुरू को नमस्कार है। - स्कन्दपुराण

शिष्य के धन का हरण करने वाले गुरू बहुत से हैं परन्तु शिष्य के दुःख को हरने वाला गुरू दुर्लभ है - स्कन्दपुराण

अभिमान करने वाले, कार्य और अकार्य को न जानने वाले तथा कुपथ पर चलने वाले गुरू का भी परित्याग कर देना चाहिए। - कृष्ण मिश्र

जो केवल कहता फिरता है, वह शिष्य है। जो वेद का पाठ मात्र करता है, वह नाती है। जो आचरण करता है, वह हमारा गुरू है और हम उसी के साथी हैं।- गोरखनाथ

ज्ञान की प्रथम गुरू माता है। कर्म का प्रथम गुरू पिता है. पे्रम का प्रथम गुरू स्त्री है और कर्त्तव्य का प्रथम गुरू सन्तान है।  - आचार्य चतुरसेन शास्त्री
 
 हमारे गुरू का न आदि है, न अन्त. हमारे गुरू का न पूर्व है, न पश्चिम। हमारा गुरू है परिपूर्णता। - साने गुरूजी

शिष्य के ज्ञान पर सही करना, इतना ही गुरू का काम। बाकी शिष्य स्वावलंबी है।- विनोवा भावे

उपदेश ऐसे करे जैसे मेघ बरसे, पर गुरू बनकर किसी को शिष्य न बनावे। - तुकाराम

तुमको अन्दर से बाहर विकसित होना है. कोई तुमको न सिखा सकता है न आध्यात्मिक बना सकता है। तुम्हारी आत्मा के सिवा और कोई गुरू नहीं है। - विवेकानन्द

गुरू की कृपा से, शिष्य बिना ग्रंथ पढ़े ही पंड़ित हो जाता है।- विवेकानंद

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