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Writers : - Indu Singh, Jyoti Singh & Vinay Singh

Chankya Quotes

A man is great by deeds, not by birth.

Shree Narendra Modi Suvichar

भारत का युवा विकास का पक्षधर है और विकास के जरिये बदलेगी देश की तस्वीर।

भक्ति सागर

भगवान शिव की पूजा ईश्वर के रूप में न करके गुरू के रूप में किया जाता है। भगवान शिव ही इस संसार के पहले गुरू माने जाते हैं।

Swami Vivekanand Suvichar

You cannot believe in God until you believe in yourself.

Naute Quotes

Every Flower is a soul blossoming in nature.

Solution of Reading problem

Solution of Reading problem

Solution of any person’s problem who read slowly can be found not by one but by many ways. 

Increasing the speed:

Problem of missing words backwardly can be solved because missing words or reversing them backwardly depends on the ninety percent and it is necessary for understanding. There are ten percent words which should be understood again they can be noted down in mind map in underlined manner and later on it can be found out by good understanding. 

Reading Solution
At least ¼ second can be reduced for reaching each fixation- the reader should not become terrified by thinking this thing that the time is very less because his eyes can see at least five words in hundredth portion of a second.  

The size of fixation can be increased for reading three to five words in a time.
If it is true that the brain reads only one word in a time, this solution will appear impossible in the beginning. Generally, it can be firm equally in the group of words which is right by every way-when we read a sentence, we don’t read it for knowing the meaning of each word but we read for knowing the meaning of phrases in which there are words.

A person who reads anything slowly will have to do harder labor comparison to those people who read anything fast and clearly because he will have to meet the meaning of each word with the meaning of each word which come forward. In the above example, this number reaches to fifth or sixth. A person who reads with much proficiency and assimilate everything with a meaningful way will have to add only one simple number. 

Benefits of fast reading:

Eyes of a person who reads fast will do less physical labor on each page. It is the benefit for the person who reads anything fast. He will have only 100 fixations on each page and each makes him less tired comparison to the person who reads slowly and he will have 500 fixations on each page.

The second benefit is that the rhythm and regularity of a person who reads fast will help him in understanding its meaning whereas a person who reads anything with slow speed feels boredom because of stopping, beginning and giving jolts. His concentration can come to an end or he can face mental obstruction and he is not able in understanding whatever he is reading.   

Wrong conceptions about reading:
In this way, it can be seen that there are many wrong popular conceptions about the person who reads fast.

Read one word in a time-wrong because of our capacity to be firm and because we read anything for knowing the meaning of any word in place of reading any word. 

Reading 500 words in a minute is impossible-wrong- because the truth is that we can read only six words per fixation and it is also true that we can make four fixations in a second. Here it means to say that reading 1000 words is possible in a minute.

A person who reads anything fast cannot assess-wrong. A person who reads anything fast can understand anything properly so he will pay much attention on the material what he reads and he will get much time to reread the thing of his interest and importance.   

Fast speed has less concentration-wrong:

The faster a person reads the more inspiration and concentration he gets.
Average reading speed is natural and so it is good-wrong: because the average speed of reading is not natural. It is because of insufficient knowledge in what speed the eyes and brain work or incompleteness of initial training.

reading-ki-samasya

रीडिंग की समस्याएं

परिभाषा में सूची में वर्णित अनेक समस्याओं पर ध्यान दिया गया है। इसमें जो समस्याएं शामिल नहीं की गई हैं वे एक तरह से पढ़ने की प्रक्रिया के बाहर हैं जैसे- कि हमारे वातावरण के प्रति हमारी प्रतिक्रिया का प्रभाव, दिन का समय, ऊर्जा का स्तर, रूचि, प्रेरणा, आय व स्वास्थ्य। 

रीडिंग की समस्याएं क्यों होती हैं 

इस समय आप यह सवाल पूछ सकते हैं कि क्यों इतने सारे लोगों को ये समस्याएं होती हैं।

रीडिंग की समस्याएं क्यों होती हैं
मस्तिष्क के बारे में हमारे पूर्व ज्ञान में कमी होने के अलावा पढ़ाने के शुरुआती तरीके के प्रति हमारी सोच में इसका जवाब मौजूद है। आपमें से अधिकतर लोग जिनकी आयु पच्चीस वर्ष से ज्यादा होगी और संभवतः आपको ध्वनिक (phonic) या वर्णमाला (alphabet) तकनीक से पढ़ाया गया होगा। दूसरों को शायद इसी तरीके से या देखो और बोलो (look & say) तरीके से सिखाया गया होगा।

सबसे सरल ध्वनिक तरीके में बच्चे को सबसे पहले वर्णमाला सिखाई जाती है, फिर वर्णमाला के हर वर्ण की अलग-अलग ध्वनियां, फिर अक्षरों में ध्वनियों के संयोजन को और फिर सबसे आखिर में शब्द बनाते हुए ध्वनियों का संयोजन करना सिखाया जाता है। इसके बाद उसे धीरे-धीरे अधिक मु्श्किल किताबें दी जाती हैं। आमतौर पर 1 से 10 के क्रम में, जिनके द्वारा वह अपनी गति से आगे बढ़ता जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान वह एक मौन पाठक बन जाता है।

लुक एंड से तरीकों में बच्चों के सामने कार्ड रखकर (इन कार्डों में चित्र बने होते हैं) सिखाया जाता है। दिखाई गई वस्तु का नाम उसके नीचे साफ-साफ लिखा होता है। एक बार जब बच्चा चित्रों व उसके नाम से परिचित हो जाता है तो छपे हुए शब्द को छोड़कर चित्र को उस पर से हटा दिया जाता है। जब बच्चे की शब्दावली बढ़ जाती है तो बच्चों को ध्वनिक तरीके से सिखाने के लिए प्रयोग की गई किताबों के समान ही किताबों की एक सीरीज़ से उन्हें पढ़ाया जाता है और वह एक मौन पाठक बन जाता है।

दो तरीकों के बारे में जो चित्रण किया गया है, वह काफी संक्षिप्त है। इन्हीं के जैसे लगभग पचास और ऐसे तरीके हैं जिनकी मदद से इंग्लैंड व अन्य अंग्रेजी बोलने वाले देशों में पढ़ाया जाता है। पूरे विश्व में यही समस्या मौजूद है।
ऐसा नहीं है कि ये तरीके लक्ष्य प्राप्त करने की दृष्टि से गलत हैं, लेकिन ये किसी भी बच्चे को शब्द का पूरा मायने समझाने की दृष्टि से गलत हैं।

अगर रीड़िंग की परिभाषा के संदर्भ में बात करें तो यह पता चलेगा कि इन तरीकों को प्रक्रिया में केवल पहचानने के स्तर के बारे में बताने व कुछ हद तक आत्मसात करने व अन्तःएकीकरण के लिए बनाया गया है। ये तरीके गति, समय, मात्रा, स्मरण, दोहराना, चयन, अस्वीकृति, नोट लेने, एकाग्रता, प्रशंसा, आलोचना, विश्लेषण, संगठन, प्रेरणा, रूचि, बोरियत, परिवेश, थकान या मुद्रण शैली आदि के बारे में बात नहीं करते हैं।

इसलिए यह बात साफ हो जाती है कि आखिर लोग क्यों इतने व्यापक रूप से इस समस्या से जूझ रहे हैं।

यह नोट करना महत्त्वपूर्ण है कि पहचानने को कभी भी एक समस्या की तरह नहीं बताया गया था, क्योंकि उसे अलग से स्कूली दिनों के शुरुआती दिनों में पढ़ाया गया था। दूसरी सारी समस्याओं को इसलिए बताया गया क्योंकि शैक्षिक प्रक्रिया के दौरान उनको सुलझाने की कोशिश नहीं की गई थी।

आगे आने वाले अध्यायों में इनमें से ज्यादातर समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की गई है। आगे आपको आंख की (गति) क्रिया, ज्ञान, व आपके पढ़ने की गति के बारे में बताया जाएगा।

पढ़ते समय आंख की गतिविधियां

पढ़ते समय जब किसी से अपनी अंगुलियों से अपनी आंखों की क्रिया व गति को दिखाने के लिए कहा जाए तो ज्यादातर लोग अपनी अंगुलियों को तुरंत एक की आखिरी लाइन और एक की शुरूआती लाइन से एक सीध में बाएं से दाएं घुमाते हैं। वे सामान्यतः हर लाइन के लिए पौना या एक सेकेंड के बीच का समय लेते हैं। दो मुख्य गलतियां की गई हैं।

गति (Speed)- अगर आंख प्रति सेकेंड एक लाइन जितनी धीमी गति से हिलती है, तो शब्द 600-700 प्रति मिनट की दर से पढ़े जाएंगे। चूंकि एक साधारण लेख को पढ़ने की गति औसतन 240 शब्द प्रति मिनट है, यह देखा गया है कि जो लोग और धीमी गति में पढ़ते हैं, वे भी पहले की अपेक्षा और अधिक तेजी़ से शब्दों को पढ़ लेते हैं।

गतिविधियां (Movement)- अगर आंखें ऊपर दिखाए गए तरीके से आराम से छपे हुए पेज को पढ़ लेती हैं तो वे कुछ भी ग्रहण नहीं कर पाएंगी, क्योंकि आंख तभी किसी चीज़ को साफ रूप से देख सकती है जब वह उसे स्थिरता से देखें। अगर वस्तु स्थिर है, तो उसे देखऩे के लिए आंख का स्थिर होना भी जरूरी है और अगर वस्तु हिल रही है तो उसे देखने के लिए आंख को भी वस्तु के साथ घूमना पड़ेगा। आपके या आपके मित्र द्वारा किया एक सरल-सा प्रयोग इस बात की पुष्टि कर देगा- बिना हिलाए तर्जनी अंगुली को आंखों के सामने रखें और या तो अपनी आंखों को उस वस्तु को देखते हुए महसूस करें या अपने मित्र की आंखों को उस वस्तु को देखते हुए देखें। वे स्थिर रहेंगी। फिर अपनी आंखों के साथ घुमाते हुए अपनी अंगुली को ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं घुमाएं। और फिर अपनी आंखों को स्थिर रखते हुए अपनी अंगुली को ऊपर, नीचे, दाएं, बाएं घुमाएं या अपने चेहरे के सामने अपने दोनों हाथों को क्रास रखते हुए आगे लाएं और एक साथ उन्हें देखें भी।  अगर साफ रूप से देखना हैं तो जब वस्तु हिले तो उसके साथ आंखों को हिलना चाहिए।

इन सारे आधारों के अनुसार, यह साफ है कि अगर आंखें शब्दों को पढ़ रही हैं और शब्द स्थिर हो तो आंखों को आगे बढ़ने से पहले हर शब्द पर रुकना होगा। एक सीधी लाइन में बढ़ने की बजाय, वास्तव में आंखें रुकने व तेजी़ से आगे छलांग लगाने के क्रम में घूमती है।


ये छलांगें अपने आप में इतनी तेज होती हैं कि इनमें कोई समय नहीं लगता, पर लक्ष्य-बंधन में ¼ से लेकर सेकेंड लग सकते हैं। एक व्यक्ति जो आमतौर पर एक समय में एक शब्द पढ़ता है-और एक व्यक्ति जो शब्दों व अक्षरों को पढ़ते समय छोड़ता जाता है, उसे उसकी आंख की क्रिया के सरल गणितीय द्वारा उस गति में पढ़ने के लिए  बाधित किया जाता है जो अक्सर 100 शब्द प्रति मिनट होती है और जिसका अर्थ है कि वह जो पढ़ रहा है उसे न तो ठीक से समझ पाएगा न ही वह ज्यादा पढ़ पाएगा।

Problems of reading

Problems of reading

Attention has been given on several problems which have been described in the list of definition. Those problems which are not included in it are out of the process of reading as the lack of our reaction towards our atmosphere, day time, level of energy, interest, inspiration, income and health.

Why do problems of reading take birth?

At this time, you can ask this question why so many people have such problems.

Firs of all, are taught phonic method
Beside the lack in our knowledge about the brain, its answer is present in our thinking towards the previous manner of teaching. Most of people among you who are above 25 five would be taught by phonic or alphabet method. You would be learnt that look and say by seeing other.

In the easiest phonic way, children, firs of all, are taught phonic method and thereafter they are taught different sounds of each letter and then sounds of combination of the letters and finally they are taught combination of sounds while making words. Thereafter, they are given hard books for reading. Generally, in order from 1 to 10 by which he marches forwardly by his movement. During this process, he becomes a silent reader.  

In the method named “Look and say” children are taught by keeping cards before them (there are pictures in such cards). The name of the shown thing is present just below the picture. Once the child becomes familiar by the pictures and their names, the picture is removed from the card not name. when the vocabulary of the children get increased, they are taught by a series of books like the books which had been used for teaching them in phonic way and in this way he becomes a silent reader.  

The description which has been described by two methods is too small. Like them, there are about fifty percent more methods by which children are taught in England and other English spoken countries. This problem is present all over world. 

It is not that such methods are wrong for getting the aim but these are wrong methods to teach the children complete meaning of any word.

If we talk about the definition of reading, we will find that these methods have been made only for telling the level of recognition and for Assimilation or Intra-integration in the process. These methods don’t talk about movement, time, quantity, recall, retention, selection, disapproval, noting down, concentration, praise, criticism, analysis, association,  inspiration, interest, boredom, atmosphere, fatigue or painting style.   

Therefore, this thing becomes clear why are the people facing this problem on such large scale.

Noting down the fact is very important that recognition never had been taught as a problem because it had been taught in the early school days. Other kinds of problems had been taught because no effort had been done for solving them during the educational process. 

In the coming chapters, several efforts have been done for solving most of problems among such problems. Further, you will be taught about the speed of eyes and speed of reading.  

Eyes activities while reading:

When a person is said to show the activity and speed of your eyes with the help of fingers, most of people move their fingers from the last line of one and in a direction of the beginning line of one from left to right. Generally, they take half and quarter or one second for each line.

Speed:

If the eye moves as the one line per second, 600 to 700 words will be read per minute. Because the speed of reading words of a simple article is 240 words per minute. It has been observed that people who read with slow speed start to read faster comparison to before.  

Movement:

If eyes read anything easily by the method which has been given above, they are not able in assimilating something because they can see anything more clearly only when they see it firmly. If the thing is firm, the eye will have to become firm necessarily and if the eyes are moving, the eyes also will have to move along with the thing. a practical done by you or your friend will strengthen this thing that keep fore finger before the eyes without movement and or feel that you are seeing that thing by your eyes or see your friend seeing towards that thing. They will remain firm. Then move your finger up and down and from left to right along with by moving your eyes.  Or bring your both hands forwardly by keeping them crossed and seeing them altogether too. If you want to see them clearly, you should move your eyes along with the movement of thing.

According to all these bases, it becomes clear that if eyes are reading words and words are firm, eyes will have to stop on each word before marching forwardly. Eyes move with stoppage or marching forwardly with a speed in place of marching in a straight line. 

These bounces are so fast in themselves that they take no time but bond of aim take from ¼ to 1½ seconds. A person who generally reads a word in a time and another person who keeps on missing words and letters while reading is obstructed in reading in that speed by easy mathematical process of eyes which are about 100 words per minute and it means that neither he is able in understanding it properly nor he will read much what he is reading.  

Fast reading with much proficiency

Fast reading with much proficiency

Reading problems:

If you are a student and you are vacant on any day, spend that period in identifying you problems which disturb you in reading and learning. Thereafter, try to understand those problems. The more you understand them, the more good way you solve them.

Some teachers reached on a conclusion after many years research that each class has same common problem. A list of common problems is being presented here.

Vision
Fear
Vocabulary
Speed
Tiredness
Pronunciation
Understanding
Boredom
Selection
Time
Analysis
Disapproval
Quantity
Organization
Concentration
Note
Reversing 
Forgetting past
Capacity of remembering
Revision


Each problem mentioned in the above mentioned list is serious and these problems can create obstruction in your study. Here some efforts are being done for the solutions of such problems. 
Defining the word reading before mentioning its several aspects is very necessary. On the base of its definition you will be persuaded why have we to face several problems on great scale. 
Definition of reading

Definition of reading:

Often, Reading is defined in this way that reading or absorbing the matter written by writer by the means of book. But it can be defined in a better way. It can be defined in this way-reading is reciprocal relation of a person with symbolic information. Generally, it is a visual aspect of learning and seven steps are included in it. 

Recognition:

Knowledge of a person who reads the symbols alphabetically- This is the first step before starting reading properly. 

Assimilation:

It is that material process by which light reflexes to a word and of which eyes assimilate and then it reaches to the brain by optic nerve. 

Intra-integration:

It is equal to fundamental intellectual power and it is related to all the parts of information which is read along with other all appropriate parts.  

Extra-integration:

In it, analysis, criticism, praise, selection and disapproval are included in it. It is such process in which the reader brings the complete portion of his previous knowledge into the contact of new knowledge in a better way. 

Retention: 

fundamental gathering of information-gathering can be a problem in itself. Most of people would felt it at the time of entering into the examination hall and during two hours of exam. At that time not only collection is sufficient but also remembering it again and again is also necessary. 

Recall:

The capacity to bring it out from the gathering what is needed. 

Communication:

Communication is such source by which information is given soon or finally. In it, sub portion viz thinking which is very important is included in it.

रीडिंग ते़जी और अधिक कुशलता

रीडिंग की समस्याएं
अगर आप स्टूडेंट हो और किसी दिन खाली बैठे हो तो अपने उस खाली समय को अपनी उन समस्याओं को नोट करने में लगा दें जो आपको पढ़ने व सीखते समय आती हैं। फिर उन समस्याओं को समझने की कोशिश करें। आप जितना उन्हें समझ सकेंगे, उतने ही अच्छे तरीके से सुधार कर सकेंगे।

पिछले कुछ वर्षों में पढ़ाने वाले टीचर्स ने यह पता लगाया है कि उनकी हर क्लास में, एक ही आम समस्या पैदा होती है। नीचे आमतौर पर होने वाली समस्याओं की सूची दी जा रही है।

दृष्टि (विजन)
डर
शब्दावली
गति (स्पीड)
थकावट
उच्चारण
समझना
बोरियत
चयन
समय
विश्लेषण
अस्वीकृति
मात्रा
संगठन
एकाग्रता
नोट
पीछे हटना
पिछला भूलना
याद रखने की क्षमता
दोहराना


ऊपर दी गई सूची में दी गई हर समस्या गंभीर है और इनसे पढ़ने या सीखने में रुकावट आ सकती है। यहां इन समस्याओं को सुलझाने पर ही फोकस किया जा रहा है।

रीडिंग के बाकी पहलुओं पर नजर डालने से पहले इस शब्द को परिभाषित करना जरूरी है और फिर इस परिभाषा के आधार पर आपको समझाया जाएगा कि क्यों व्यापक रूप से हमे इन अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ता है? 

रीडिंग की परिभाषा- 

रीडिंग, जिसे अक्सर यह कहकर परिभाषित किया जाता है कि लेखक ने जो लिखा है उसे किताब के माध्यम से पढ़ना या लिखित शब्द को आत्मसात करना। लेकिन इसे और अच्छे तरीके से परिभाषित किया जाना चाहिए। इसे इस तरह परिभाषित किया जा सकता है- रीडिंग व्यक्ति का प्रतीकात्मक सूचना के साथ पूरा परस्पर संबंध है। यह आमतौर पर सीखने का चित्रित (विजुअल) पहलू है और इसमें निम्नलिखित सात चरण शामिल है-
पहचान (Recognition)- वर्णानुक्रमिक (alphabetic) के प्रतीकों के बारे में पढ़ने वाले का ज्ञान। सही तरीके से पढ़ने की शुरूआत होने से पहले यह चरण आता है।

आत्मसात करना (Assimilation)- वह भौतिक प्रक्रिया जिसके द्वारा शब्द से प्रकाश प्रतिबिंबित होता है और जिसे आंखें ग्रहण करती हैं और फिर वह दृष्टि-तंत्रिका (Optic nerve) के द्वारा मस्तिष्क तक पहुंचता है।

अन्तः-एकीकरण (Intra-integration)- यह आधारभूत बौद्धिक क्षमता के बराबर है और दूसरे सभी उचित भागों के साथ पढ़े जाने वाली सूचना के सारे भागों से जुड़ा होने से संबंधित है।

अतिरिक्त-एकीकरण (Extra-integration)- इसमें विश्लेषण, आलोचना, प्रशंसा, चयन व अस्वीकृति शामिल हैं। यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पढ़ने वाला व्यक्ति अपने पिछले ज्ञान के पूरे भाग को अपने पढ़ने के नए ज्ञान के संपर्क में उपयुक्त तरीके से लाता है।

स्मरण (Retention)- सूचना का आधारभूत संग्रहण। संग्रहण अपने आप में एक समस्या बन सकता है। ज्यादातर लोगों ने परीक्षा भवन में प्रवेश करते हुए और दो घंटे की परीक्षा के दौरान ज्यादातर सूचना का संग्रह करते हुए ऐसा अनुभव जरूर किया होगा। उस समय केवल संग्रह करना ही काफी नहीं है बल्कि उसके साथ उसे बार-बार याद करना भी जरूरी है।

दोहराना (Recall)- जिसकी ज़रूरत है उसे संग्रहण से बाहर लाने की क्षमता, खासकर उसकी जरूरत पड़ने पर।

संप्रेषण (Communication)- ऐसा माध्यम जिसके द्वारा तुरंत या अंततः सूचना दी जाती है। इसमें अति महत्त्वपूर्ण उप भाग भी सम्मिलित है- सोचना। 


Anmolv Suvichar

अनमोल सुविचार

(Quotes in Hindi)

माता-पिता जीवन देते हैं, लेकिन जीने की कला तो शिक्षक ही सिखाते हैं। - Arastu

हम दुनिया को नहीं बदल सकते, मगर दुनिया के प्रति अपना दृष्टिकोण तो बदल सकते हैं। - Swami Ramdas

बीता हुआ समय और कहे हुए शब्द कभी भी वापस नहीं आ सकते। इसलिए समय को सदप्रयोग करना उचित होता है। - Suvichar4u Team

सही समया पर लगभग हर बात सही तरीके से कही जा सकती है बस करने का प्रयास करें तो मुमकिन है। - Suvichar4u Team

विश्वास करना एक गुण है, अविश्वास दुर्बलता कि जननी है। - Mahatma Gandhi

यदि आप सच बोलते हैं, तो फिर आपको कुछ याद रखने की जरुरत नहीं है क्योंकि सच हमेशा खुद ही बोलता है। - Suvichar4u Team

Aasha Amar Hai, Uski Aaradhan Kabhi Nishaphal Nahi Hoti Hai


कार्य की अधिकता से ज्यादा घातक चिंता होती है क्योंकि मनुष्यों को अंतर आत्मा से मारती है।  Suvichar4u Team

स्वार्थ ही अशुभ संकल्पों को जन्म देता है। Guru Govind Singh

अवसर हमेंशा बुद्धिमान के ही पक्ष में होता है मूर्खों के नहीं। - Suvichar4u Team

अविचारशील मनुष्य दुख को प्राप्त होते हैं। - Rigrhveda

कोई वाद जब विवाद का रूप धारण कर लेता है तो वह अपने लक्ष्य से दूर हो जाता है। Premchand

प्रेम करने वाला पड़ोसी दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है। - Chankya

कभी कभी आलोचना मित्र को शत्रु बना देता है। - Suvichar4u Team

Happy New Year

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं


Happy New Year 2017

2017, नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दोस्तों! यह वर्ष हमारे लिए सबसे अच्छा संदेश और खुशी लेकर आये यही भगवान से प्रार्थना करता हूं। मेरे सभी चाहने वालों को नमस्कार।

Counting my blessings and wishing you

आशा है कि इस साल आपको वे सभी चीजे नसीब होंगी जिसकी आपने कामना की थी और आप पाना चाहते थे लेकिन किसी कारणवश आप न पा सके। किसी ने सच ही कहा है की जो होता है आच्छा के लिए होता है तभी तो हो सकता है ये साल आपका हो और आप उसे पा सके। इललिए आशा को कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए और अपने उमिदों को पुरा करने के लिए हमेशा मेहनत करते रहना चाहिए।

ईश्वर ने अपने हाथ बड़ाकर मुझे और आपको सही रास्ता दिखाया है और आशा है आगे भी सही हम्हें सही मार्ग पर दिखायेंगे इसी के साथा नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

नया साल के लिए सुविचार

12 महीने खुशी, 52 सप्ताह मज़ा, 365 दिन हँसी, 8760 घंटे गुड लक, 525600 मिनट खुशी, 31536000 सेकंड सफलता आदि के साथ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

Happy New Year Quotes 

A happy New Year! Grant that I
May bring no tear to any eye
When this Year in time shall end
Let it be believed I’ve played the friend,
Have lived and loved and labored here,
And created of it a happy year.

We will open the book. Its pages are blank. We are putting words on them ourselves. The book is called chance and its first chapter is new year's 2017.

Your success and happiness lies in you. Resolve to feel happy and your joy and you shall from an invincible host against difficult.

Happy 2017!
Lots of flying, new project, and more important, more critic at the slope with people I can now call friends! Hope to see you all soon for some flying.

Let this new year give you all the strength

A new year is like a blank book

Medicine and memory

Medicine and memory

Often, we find many advertisements of tablets, capsules and medicines of strength. Such advertisements claim that they can improve your memory. Can any medicine can improve the memory power of a person. This is a common question. The answer of this question can be yes.  
Memory Power aur dava
Ten person who are 23 to 27 years old have been called that there is such tonic in the market which can double your memory power if it is taken three months regularly. Memory test of all the ten students have been taken before starting the medicine viz tonic.

Tonic of a reputed company was given to the five persons whereas normal colored water was given to the rest of five persons. This experiment remained continue for three months regularly. After three months, the same memory test of all ten persons was taken.

Just imagine, what will be its result. The result was that all the ten persons scored more number in the test than the previous test and average of all the persons was same.

When this topic analyzed deeply, one truth came before us that memory power of the persons got increased because of psychological reasons. All ten persons had sent a message to their brain that they were doing something for the brain and this thing improved their brain.  

The most effective method among all the methods to develop memory power is sending message to the brain and the message is “my brain is faster than any computer of the world and it is becoming more and more powerful day by day.

Dava aur Memory

दवा और मैमोरी

अक्सर हमें गोलियों, कैप्सूलों और ताकत की दवाइयों के विज्ञापन देखऩे को मिल जाते हैं जो यह दावा करते हैं कि वे आपकी मैमोरी पॉवर को सुधार सकते हैं। क्या सच में दवाईयां किसी भी प्रकार से मैमोरी पॉवर में सुधार ला सकती है? इस प्रश्न का उत्तर हां हो सकता है।
Memory Power aur dava
एक ही जगह के 23 से 27 वर्ष की उम्र के 10 व्यक्तियों से कहा गया कि, मार्किट में एक ऐसा टॉनिक आया है जिसका अगर आप तीन महीने तक सेवन करें तो आपकी याददाश्त अर्थात मैमोरी दुगनी  हो सकती है। लेकिन प्रयोग शुरू करने से पहले उन सभी 10 के 10 व्यक्तियों का एक मैमोरी टैस्ट लिया गया।

उन 10 व्यक्तियों में से 5 व्यक्तियों को एक नामी कंपनी का टॉनिक दिया गया और बाकी 5 को सिर्फ रंगीन सादा पानी। यह प्रयोग तीन महीने तक चला। तीन महीने के अंत में उसी प्रकार का मैमोरी टैस्ट किया गया।

अब सोचिए कि इसका रिसल्ट क्या आया होगा? परिणाम यह था कि पिछली बार के लिए गए टैस्ट में मिले अंकों से उनके इस बार के टैस्ट के अंक ज्यादा थे तथा टॉनिक लेने वालें और सादा रंगीन पानी लेने वालों के औसत प्रतिशत लगभग समान ही थे।

कुछ और ज्यादा विश्लेषण करने पर यह परिणाम निकला कि उन दसों व्यक्तियों की याददाश्त मनौवैज्ञानिक काऱणों से ही तेज हुई थी। सभी दसों व्यक्तियों ने अपने दिमाग को यह संदेश पहुंचाया था कि वे अपने दिमाग के लिए कुछ ज्यादा कर रहे हैं इससे उनका दिमाग और ज्यादा अच्छा होता गया।


इसलिए दिमाग को तेज करने की विधियों में से एक असरपूर्ण विधि दिमाग को यह संदेश देना कि, मेरा मस्तिष्क संसार के किसी भी कम्प्यूटर से अधिक तेज है और रोजाना अच्छा ही होता जा रहा है।

Aaj Ka Suvichar

आज का सुविचार

शिक्षक का अर्थ

शि - शिखर तक ले जाने वाला
क्ष - क्षमा की भावना रखने वाला
क - कमजोरी दूर करने वाला
अर्थात- जो विधार्थी की हर गलती को क्षमा करने की भावना रखता हो और विधार्थी की हर कमजोरी को दूर कर के उसको शिखर (सफलता) तक ले जाता है। वही सच्चा शिक्षक होता है।

कटाक्ष

शिक्षक हुए ट्यूशन के, विधा कहां से हो,
प्रोग्राम हुए चैनल के, संस्कार कहां से हो।
इन्सान हुआ पैसों का, दया कहां से हो।
पानी हुआ केमिकल का, गंगाजल कहां से हो।
संत हुए स्वार्थ के, सत्संग कहां से हो।
भक्त हुए स्वार्थ के, भगवान कहां से हो।

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं मैं सुर बाला के,
कहनो मैं गुथा जांऊ।
जाह नहीं प्रेमी माला मैं
बिंद प्यारी को ललचाऊं।
चाह नहीं सम्राटों के शव पर
हे हार डाला जांऊ।
चाह नहीं मैं देवों के सिर
पर चढूं भाग्य के इठलाऊं।
मुझे तोड़ लेना हे वनमाली,
उस पथ पर देना फेंक।
मात्र भूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पर जांए वीर अनेक।
(माखन लाल चतुर्वेदी)

Jindagi Par Bas Itana hi, Likh Paya Mainकुछ खास रचना

जिंदगी पर बस इतना ही
लिख पाया मैं,
बहुत मजबूत रिश्ते थे
कुछ कमजोर लोगों से।



यूं तो महफिल में हैं...
हमसे भी कई शायर हसीन।
एक तेरी ही वाह वाह है...

जो मेरी कलम को जुबान देती है।

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