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Writers : - Indu Singh, Jyoti Singh & Vinay Singh

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Bhavana – Sharir Vygyan

भावना- शरीर विज्ञान

कई बार शारीरिक अवस्था में बदलाव लाने से भी बहुत से लाभों को प्राप्त किया जा सकता है। जब कोई व्यक्ति गुस्से, तनाव या अवसाद की अवस्था में होता है तो अक्सर वह धूम्रपान, शराब जैसी नकारात्मक क्रियाओं का सहारा लेने लगता है। नकारात्मक अवस्था को ध्यान, व्यायाम, संगीत आदि द्वारा दूर किया जा सकता है। कंधे बिचकाना, सिर झटकना आदि निम्न भावनात्मक पहलू को दर्शाते हैं। जब हम पूरी तरह जोश में भरे होते हैं, प्रसन्न मुद्रा और आत्म-विश्वास से सरोबार होते हैं तो हमारा सीना गर्व से फूल जाता है, कंधे ऊंचे उठ जाते हैं और सांसे बेहतर हो जाती हैं।
Bhavana - Shareer Vigyan Suvichar and Thought

अपनी शारीरिक अवस्थाओं में बदलाव लाने से आप अपने भावनात्मक पहलू को बदल सकते हैं क्योंकि हमारी हर भावना का संबंध शारीरिक क्रियाओं से होता है।

मुस्कराहट - अगर आप मुस्कराते हो तो संसार भी आपके साथ मुस्कराने लगेगा।

एक सप्ताह तक, रोजाना दिन में पांच बार एक मिनट के लिए शीशे के सामने खड़े हो जाएं और जी भरकर मुस्कराएं। ऐसा करते हुए आपको थोड़ा सा अजीब सा तो लगेगा, लेकिन जब आपकी मुस्कराहट बनावटी न होकर मौलिक तथा चमकदार होगी तब आप अंदर से बहुत ही अच्छा महसूस करेंगे।

आपकी भावनाएं आपकी शारीरिक क्रियाओं का हिस्सा हैं?- अपनी भावनाओं के दायरे को महसूस करने की कोशिश कीजिए। अपनी जरा सी कोशिश तथा उदगम केन्द्र में बदलाव लाकर आप अपनी खुशी को दुगना कर सकते हैं। आप अपनी स्वाभाविक तथा सकारात्मक भावनाओं में से किसी एक को चुनें तथा अलग-अलग मुद्राओं, हरकतों और अपने हाव-भाव से उस भावना का आनंद उठाएं।

जब आप किसी परेशानी में हों, तब इसे याद करें- अपने जीवन के उन पलों को याद करें जब आप किसी से बहुत ज्यादा गुस्सा थे, किसी के प्रति ईर्ष्या में जल रहे थे या किसी मुसीबत में घिरे हुए थे। उन पलों को याद करके शायद आपको हंसी आए कि आप बेकार में परेशान थे जबकि ऐसी कोई बात थी ही नहीं। अब दोबारा पलों पर जी खोलकर हंसें तो आप अपनी इस परेशानी वाली घड़ी को भी अपनी मुट्ठी में पाएंगे।


केन्द्रित ध्यान- भावना- क्रिया-प्रतिक्रिया- कई बार ऐसा होता है कि आपने अपने साथी को मिलने के लिए बुलाया हो और वह समय पर न आया हो, तो ऐसे समय में आपने कैसा महसूस किया होगा, आपके दिल में बैचेनी बढ़ गई होगी, यह सोचकर कि क्या उसको आपकी परवाह ही नहीं है या यह समझ लिया होगा कि उसकी तो आदत ही ऐसी है। क्या आपकी बैचेनी इतनी बढ़ गई होगी कि आपके मन में बुरे ख्याल आने लगें होंगे कि उसके साथ कहीं कोई दुर्घटना तो नहीं हो गई? क्या आपने ऐसा भी सोचा होगा कि वह मेरे लिए फूल खरीदने के लिए रास्ते में कहीं रूका होगा?
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