Door tak jisaki najar-Geet aur Kavita-20


दूर तक जिसकी नज़र चुपचाप जाती ही नहीं  हम समझते हैं समीक्षा उसको आती ही नहीं  आपका पिंजरा है दाना आपका तो क्या हुआ आपके कहने से चिड़िया गुनगुनाती ही नहीं

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