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6 मार्च 2021

Ankita Singh (Kavitri) | Jeevani, Agyat Tathy Tatha Kavita

अंकिता सिंह (कवित्री) - जीवनी, अज्ञात तथ्य तथा कविता

दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे Kavitri के बारे में जानकारी देने वाला हूं जो आजकल Social Media पर बहुत अधिक Famous है। आजकल के नये कवियों में से अंकिता सिंह बहुत लोकप्रिय है। इनकी कविता ऐसी होती है जो बच्चों से लेकर Bujurgon तक को काफी पसंद आती है। इनका पुरा नाम Ankita Singh Rathore है। इनका जन्म बिहार के गया में हुआ था। इंहोने 2008 में नेट परीक्षा पास की और इसके बाद बैंगलोर विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग में व्याख्याता के रूप में कार्य करना शुरू किया। Ankita Singh के पति का नाम धीरेंद्र लोढ़ा है और इनका विवाह 17 जून 2001 को हुआ था। 

Ankita Singh (Kavitri)

2019 में आजतक का एक कवि सम्मेलन (Poet Conference) हुआ था। जहां पर इंहोने भाग लिया और पुलवामा हमले पर एक कविता कही जो लोगों को काफी पसंद आया। इसके अलावा अंकिता सिंह बहुत अच्छी बेकर, चित्रकार और नर्तकी भी है। Ankita Singh की Popularity का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इनके बहुत सारे शो दुबई, अमेरिका और मलेशियां जैसे देशों में हो चुका है। Ankita Singh को ध्यान करने और आध्यात्मिकता में बहुत अधिक रुचि है। इनको पशुओं से बहुत अधिक लगाव है। 


यदि आप कवि सम्मेलन में रुचि रखते हैं और अंकिता सिंह के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आपने सही जगह का चुनाव किया है। यहां पर आपको Ankita Singh की सारी जानकारी मिलने वाली है जैसे - आयु, शैक्षिक योग्यता, वेतन व अन्य जानकारी। 


अंकिता सिंह (कवित्री) - जीवनी, अज्ञात तथ्य तथा कविता

मुझसे पूछों न Dard की हद अब
Jahar से आबलों को भर डाला
पहले Sasural में ही जलती थी
अब तो सत्ता ने Rakh कर डाला!

Ankita Singh

अंकिता सिंह से संबंधित सामान्य जानकारी

 

सामान्य जानकारी

पूरा नाम अंकिता सिंह राठौर
जन्म की तारीख 25 दिसंबर
आयु ज्ञात नहीं है
जन्म का दिन गया, बिहार, भारत
शादी की तारीख 17 जून 2001
पति / पति धीरेंद्र लोढ़ा
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिन्दू धर्म
राशि - चक्र चिन्ह राशि
प्रफेशन कवि
बालों का रंग काला
ऊँचाई (लगभग) सेंटीमीटर में - मीटर में 165 सेमी - पैर और इंच में 1.65 मीटर - 5 '5 "
वैवाहिक स्थिति शादी शुदा
बच्चे 2
भाई शिवा सिंह राठौर

शैक्षिक योग्यता


यहां पर हम आपको Ankita Singh की शैक्षणिक योग्यता के बारे में बताने जा रहे हैं। अधिकांश लोग अपने पसंदीदा व्यक्ति की शैक्षिक योग्यता जनना चाहते हैं। कुछ प्रशंसक अपनी गतिविधियों, शिक्षा आदि के बारे में जानने के लिए अपने प्रशंसनीय हस्तियों का अनुसरण करना पसंद करते हैं। नीचे दी गई तालिका शैक्षिक योग्यता के बारे में है। हम हमेशा एक विश्वसनीय स्रोत पर निर्भर करते हैं, लेकिन इसे खोजना कठिन है। उस स्थिति में, हम इसे खाली रखते हैं।

स्कूल का नाम क्रीं मेमोरियल हाई स्कूल, गया
कोलाज मोदी इंस्टिट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी एंड साइंस (एम आई टी एस), सीकर, राजस्थान
शैक्षिक योग्यता / शैक्षिक स्तर पता नहीं

अंकिता सिंह का मैरिटल स्टेटस

आजकल बहुत सारे लोग है जो अपने पसंदीदा व्यक्ति के Marital Status के बारे में जानने के इच्छुक होते हैं। हम आपको यहां पर अंकिता सिंह की वैवाहिक स्थिति को बताने वाले हैं। यदि आप इनके व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानने के इच्छु हैं तो यह प्रसंग आपके लिए है।

वैवाहिक स्थिति शादी शुदा
संबंध ज्ञात नहीं
शौक यात्रा करना, किताबें पढ़ना तथा कविताएँ लिखना
पसंदीदा चीज / व्यक्ति Civil Servant (IAS)
पति धीरेंद्र लोढ़ा

अंकिता सिंह के कुछ कविता

मौन सिंधु

मौन सिंधु के तले सहस्त्र शब्द सीप हैं ! डूब डूब चेतना अजस्त्र सीप चुन रही! (अजस्त्र:लगातार)

अनकहा रहा कभी,हुआ मुखर मुखर अभी दीप बातचीत का हुआ प्रखर प्रखर तभी कह रही स्वयं,स्वयं सुनूँ सभी कहा हुआ इस तरह समझ रही जटिल यथार्थ अनछुआ

दूर विश्व से कटी हुई पड़ी ज़मीन पर आज प्राण में विलुप्त एक विश्व सुन रही !

शांत शांत प्राण में भरा हुआ प्रमाद है गीत प्राण के उसी प्रमाद का निनाद है अब इसे दबा सकूँ न अब इसे छुपा सकूँ तो बता मुझे,इसे सहेज कर कहाँ रखूँ ?

गुनगुना रहा हृदय व पाँव भी थिरक रहे और रूह दूसरा सुरम्य गीत गुन रही !!

दब चुके सपन सभी प्रकट हुए निखर गए बीज बीज बढ़ गए घने विटप उभर गए (विटप:पेड़) छांव छांव ठंड है व शांति की बयार है विश्व में चलो कहीं मिला मुझे न क्षार है

एक स्वप्न जी रही,यक़ीन हो रहा नहीं और मौन व्यंजना अनेक स्वप्न बुन रही!

मौन सिंधु  Poem been written by ©अंकिता सिंह

मैं तुम को याद करती हूं

अकेले बैठकर तुमको कभी जब याद करती हूं, मैं तुम को याद करती हूं.... मैं रोना-मुस्कुराना हाय दोनों साथ करती हूं।

यहीं सोफे पे बैठे, सात अंबर घूम आती हूं, तुम्हारा नाम चखती हूं नशे में झूम जाती हूं। कहां हूं मैं..? जहां मेरी खबर मुझ तक नहीं आती, क्या मेरी गुमशुदी की ये खबर तुम तक नहीं जाती। गली दिल की तुम्हारी याद से आबाद करती हूं, अकेले बैठकर तुमको कभी जब याद करती हूं।।

तेरा जाना मेरी आंखों में प्यासे ख्वाब बोता है तेरा तकिया लिपट कर मुझसे सारी रात सोता है। तेरी खुशबू मेरी सांसो की गलियों में टहलती है, बड़ी कमबख्त है ये आग, आंखों में पिघलती है। मैं सारी रात, सोना-जागना एक साथ करती हूं अकेले बैठकर तुमको कभी जब याद करती हूं ।।

तेरी बातों के फूलों से गजल मखदूम करती हूं मैं चुपके से तेरी DP 👬 को जब भी जूम करती हूं। तेरे फुके हुए सिगरेट में अक्सर आंख होती हूं तेरी लत में कभी धूँआ, कभी मैं ख़ाक होती हूं मैं अपने जख्म पे अश्कों की खुद बरसात करती हूं। मैं रोना मुस्कुराना हाय दोनों साथ करती हूं, अकेले बैठकर तुमको कभी जब याद करती हूं।।

मैं तुम को याद करती हूं  Poem been written by ©अंकिता सिंह


Ankita Singh Poem - Maun Sindhu

दूर विश्व से कटी हुई पड़ी ज़मीन पर

गुनगुना रहा हृदय व पाँव भी थिरक रहे

एक स्वप्न जी रही,यक़ीन हो रहा नहीं


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21 जन॰ 2020

BASANTI HAWA HOON - - केदारनाथ अग्रवाल

बसंती हवा हूँ

BASANTI HAWA HOON



हवा हूँ, हवा मैं
बसंती हवा हूँ।

सुनो बात मेरी -
अनोखी हवा हूँ।
बड़ी बावली हूँ,
बड़ी मस्तमौला।
नहीं कुछ फिकर है,
बड़ी ही निडर हूँ।
जिधर चाहती हूँ,
उधर घूमती हूँ,
मुसाफिर अजब हूँ।

न घर-बार मेरा,
न उद्देश्य मेरा,
न इच्छा किसी की,
न आशा किसी की,
न प्रेमी न दुश्मन,
जिधर चाहती हूँ
उधर घूमती हूँ।
हवा हूँ, हवा मैं
बसंती हवा हूँ!

जहाँ से चली मैं
जहाँ को गई मैं -
शहर, गाँव, बस्ती,
नदी, रेत, निर्जन,
हरे खेत, पोखर,
झुलाती चली मैं।
झुमाती चली मैं!
हवा हूँ, हवा मै
बसंती हवा हूँ।

चढ़ी पेड़ महुआ,
थपाथप मचाया;
गिरी धम्म से फिर,
चढ़ी आम ऊपर,
उसे भी झकोरा,
किया कान में 'कू',
उतरकर भगी मैं,
हरे खेत पहुँची -
वहाँ, गेंहुँओं में
लहर खूब मारी।

पहर दो पहर क्या,
अनेकों पहर तक
इसी में रही मैं!
खड़ी देख अलसी
लिए शीश कलसी,
मुझे खूब सूझी -
हिलाया-झुलाया
गिरी पर न कलसी!
इसी हार को पा,
हिलाई न सरसों,
झुलाई न सरसों,
हवा हूँ, हवा मैं
बसंती हवा हूँ!

मुझे देखते ही
अरहरी लजाई,
मनाया-बनाया,
न मानी, न मानी;
उसे भी न छोड़ा -
पथिक आ रहा था,
उसी पर ढकेला;
हँसी ज़ोर से मैं,
हँसी सब दिशाएँ,
हँसे लहलहाते
हरे खेत सारे,
हँसी चमचमाती
भरी धूप प्यारी;
बसंती हवा में
हँसी सृष्टि सारी!
हवा हूँ, हवा मैं
बसंती हवा हूँ!
- केदारनाथ अग्रवाल


BASANTI HAWA HOON


Hawa Hoon, Hawa Main
Basanti Hawa Hoon.

Suno Baat Meri -
Anokhee Hawa Hoon.
Badi Baavalee Hoon,
Badi Mastamaula.
Nahin Kuchh Phikar Hai,
Badi Hee Nidar Hoon.
Jidhar Chaahatee Hoon,
Udhar Ghoomatee Hoon,
Musaaphir Ajab Hoon.

Na Ghar-Baar Mera,
Na Uddeshy Mera,
Na Ichchha Kisee Kee,
Na Aasha Kisee Kee,
Na Premee Na Dushman,
Jidhar Chaahatee Hoon
Udhar Ghoomatee Hoon.
Hawa Hoon, Hawa Main
Basanti Hawa Hoon!

Jahaan Se Chalee Main
Jahaan Ko Gaee Main -
Shahar, Gaanv, Bastee,
Nadee, Ret, Nirjan,
Hare Khet, Pokhar,
Jhulaatee Chalee Main.
Jhumaati Chalee Main!
Hawa Hoon, Hawa Mai
Basanti Hawa Hoon.

Chadhi Ped Mahua,
Thapaathap Machaaya;
Giree Dhamm Se Phir,
Chadhi Aam Oopar,
Use Bhee Jhakora,
Kiya Kaan Mein Koo,
Utarakar Bhagee Main,
Hare Khet Pahunchee -
Vahaan, Genhunon Mein
Lahar Khoob Maaree.

Pahar Do Pahar Kya,
Anekon Pahar Tak
Isee Mein Rahee Main!
Khadee Dekh Alasee
Lie Sheesh Kalasee,
Mujhe Khoob Soojhee -
Hilaaya-Jhulaaya
Giree Par Na Kalasee!
Isee Haar Ko Pa,
Hilaee Na Sarason,
Jhulaee Na Sarason,
Hawa Hoon, Hawa Main
Basanti Hawa Hoon!

Mujhe Dekhate Hee
Araharee Lajaee,
Manaaya-Banaaya,
Na Maanee, Na Maanee;
Use Bhee Na Chhoda -
Pathik Aa Raha Tha,
Usee Par Dhakela;
Hansi Zor Se Main,
Hansi Sab Dishaen,
Hanse Lahalahaate
Hare Khet Saare,
Hansi Chamachamaatee
Bhari Dhoop Pyaaree;
Basanti Hawa Mein
Hansi Srshti Saaree!
Hawa Hoon, Hawa Main
Basanti Hawa Hoon!

- Kedaaranaath Agravaal

3 दिस॰ 2019

Kaisi Chhayee Hain IS Desh Men Ye Kaali Andhkar

कैसी छाई है इस देश में ये काली अंधकार

प्रियंका रेड्डी से रेप और हत्या की घटना (Dr. Priyanka Reddy case) के बारे में सुनकर हमें आज इंसान होने पर घिन आ रही है और हम ये सोचने पर मजबूर है कि कैसा समाज आज हम बना रहे हैं.....


Dr. Priyanka Reddy case

कैसी छायी इस देश में ये काली अंधकार
दिन दहाढ़े बेटियों से कर लेते हैं बलात्कार
कहा गई ओ भीड़ और कहाँ गई वो बाज़ार
जब खुद के इजत बचाने की कोशश कर रही होती हैं लाचार
कबतक कड़ी निंदा करोगे देश के गद्दार

किसी को इंसाफ दलाने के लिए, जो निर्दोष हैं
क्या ये जरूरी है? तुम्हारी ही होनी चाहिए सरकार
उमी द मत रखो ! कुछ नहीं करेगी ऐसी है सरकार
या हम देश वासियों का हाथ पैर हो गया हैं लाचार
कुछ स्वार्थी लोग खुदके फायदे के लए देते हैं धरना
पापियों का खात्मा करो तकाल, देश खाली हो जायेगा वरना
न्यूज चैनेल पर कड़ी निंदा करने वाले नेताओं पर
करो सबसे पहले तलवार से उनके ऊपर वार
क्योंकि सबसे पहले हैं ओ देश के असली गद्दार
उनको चाहिए बस अपनी बनी हुई सरकार
देश में मचा हो चाहे चारों तरफ हाहाकार
देश वासियों से अनुरोध है मेरा, और विचार
घुसकर मार दो दरिंदो को जहाँ रखा गया, दो हो या चार
इतनी ताकत हैं जनता में, कर सकता है साथ-साथ विचार
फिर कही जाकर मट सकता है येअंधकार
अगर जनता कुछ नहीं करेगी,फिर ये होता रहेगा बार-बार
कोई निक्कमा कुछ नहीं करेगा,चाहे जिसकी भी हो सरकार
माना हर बार देश में बदलती रहेगी सरकार
अगर हम नहीं जागे, फिर तो होता रहेगा बलात्कार
कलयुग हैं ये सारे पैसों के लालची ,नहीं होगा चमत्कार
देश के रक्षक है जो , ओ भी करते है छुप-छुपकर बलात्कार
कुछ तो सहज जाता है, क्योंकि होते है बहुत लाचार
अगर ऐसे ही लुटते रहे बगीचों को, फिर नहीं आयेगी बहार
खत्म हो जाएगी दुनियां, रह जायेग अधंकार
कुछ तो हिसेदारी है उनका,जो है फ़िल्मकार
अर्ध नंगी अभिनेत्री नंगा पूरा बदन कैसा ये संस्कार
ऐसी चलचित्र को देखकर युवा हो रहे है बेकार
हवस को काबू ना कर पाकर, कर रहे है बलाकार
एक समय चलिचत्र को माना जाता था समाज का आइना
संकृती को चलचित्र लुट रहा है,जैसे बाज़ार लुट रहा है चाइना
कुछ हदतक ठीक है अभनेता सलमान और अक्षय कुमार
जो देश के कम को करते है उजगार
हर चीज में कसी जानी चाहिए कठोर फंदा
ताकि बंद हो जाये संकृती को ख़राब करने वाला धंदा
कौन करेगा इंसाफ आकर इन निर्दोषष बेटियों का,मत करो इंतजार
घुसकर इन सालों के घर में, मारो काटों कर दो चिर फार
फिर देखते है इतने सारे लोगों को सजा कैसे देती है सरकार
अगर सरकार कुछ बोलेगी तो देश में फिर होगा वोट
फिर इनको लगेगा बलात्कार से भी बड़ा चोट
आज बस देश उनके लए है जिनके पास है नोट
कोई नेता देश के लिए नहीं सोचता, सबके मन में है खोट
ऐसे ही चलता रहेगा देश और बनता रहेगा सरकार
आज कसान की कल किसी डॉक्टर की परसों किसी इंजिनीयर की
बेटियों से होता रहेगा हर रोज कही-न-कही बलात्कार
न्यूज चैनेल में आकर कड़ी निंदादा करती रहेगी सरकार !!!!!!!!!!!!!!

 ✍️ Written By Chandan Kumar and Edited by VK Singh


11 जून 2019

Pulkit Thi, Praphoolit Thi - Meri Gudiya, Twinkle Sharma

Pulkit Thi, Praphoolit Thi, Main To Hansti Khelit Ek Phool ki Kali Thi

पुलकित थी, प्रफुल्ल थी, मैं तो हंसती खेलती एक फूल की कली थी।

पुलकित थी, प्रफुल्ल थी, मैं तो हंसती खेलती एक फूल की कली थी।
अनजानी सी इस दुंनिया में, मुझे क्या पता चारो ओर हैवानो की मंडली थी।।

पुलकित थी, प्रफुल्ल थी, मैं तो हंसती खेलती एक फूल की कली थी।
धर्म की नगरी में,  मुझे क्या पता अधर्म की बोली थी।।

पुलकित थी, प्रफुल्ल थी, मैं तो हंसती खेलती एक फूल की कली थी।
अपनो की इस बस्ती में, मुझे क्या पता किसी अपनो में ही हैवानियत थी।।

पुलकित थी, प्रफुल्ल थी, मैं तो हंसती खेलती एक फूल की कली  थी।
कर्ज की मजबूरी में, मुझे क्या पता ब्याज की वसूली थी।।

पुलकित थी, प्रफुल्ल थी, मैं तो हंसती खेलती एक फूल की कली  थी।
न्याय की कानूनी पेच में, मुझे क्या पता अन्याय की टोली थी।।

         ✍️ Vinay Singh, Suvichar4u.com

8 जून 2019

Twinkle Sharma Main Nishabd Hoon

Gudia Main Nishabd Hoon

अलीगढ़ के टप्पल ब्लोक में रहने वाली 3 साल की मासूम बच्ची ट्विंकल शर्मा को कुछ दरिंदे लोगों ने बेरहमी के साथ कत्ल किया, उसके हाथ-पैर काटकर आंखे निकाल ली और मासूम के शव को फेंक दिया। जबसे यह खबर सुनी है तब में मैं बहुत ही दुखी हूं और निशब्द हूं कि क्या प्रतिक्रिया दूं। मुझे ऐसा लगता है कि कुछ लोग तो इंसान क्या जानवर कहलने के लायक भी नहीं है क्योंकि जानवर भी ऐसा नहीं करते। इन लोगों को जल्द से जल्द फांसी हो ताकि लोगों का विश्वास कानून व्यवस्था पर बना रहें।

Twinkle Sharma Main Nishabd Hoon


गुड़ियां मैं निशब्द हूं.....


मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं,
बेबस हूं, मजबूर हूं जो तेरे कतिल को अभी तक फांसी के तख्त तक पंहुचा न सका,
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

बेबस हूं, मजबूर हूं जो उन चंद लोगों को समझा न सका कि इसको धर्म की चश्मे से न देंखे। 
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

बेबस हूं, मजबूर हूं जो ऐसे देश में रहता हूं जहां की न्याय व्यवस्था कमजोर है।
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

बेबस हूं, मजबूर हूं इन मीडियां को देखकर जो तुम्हारी आवाज न बन सकी, जो तुम्हे इंसाफ न दिला सकी। 
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

बेबस हूं, मजबूर हूं जब इस खबर को सुना कि महज कुछ चंद नोट की टुकरों के खातिर वहशियों ने तुम्हे मार डाला।
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

बेबस हूं, मजबूर हूं जो कुछ नेताओं की राजनीति को समझ न सका, जिनको हमने वोट दिया।
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

बेबस हूं, मजबूर हूं उन लोगों को देखकर जो बात बात पर मोमबत्ती लेकर चले आते हैं लेकिन वहशियों को नहीं जलाते हैं।
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

एक बार वहशियों को जलाने की कोशिश तो करों मेरे भाई, फिर न कोई वहशी बचेगा और न कोई कातिल। 
मैं निशब्द हूं, निशब्द हूं, गुड़ियां मैं निशब्द हूं।।

✍️ Vinay Singh, Suvichar4u.com

गुड़ियां मैं निशब्द हूं.....
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट
यह उस 2.5 वर्षीय बच्ची ट्विंकल शर्मा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट है जिसे रमज़ान में एक रोज़ेदार शांतिदूत मुहम्मद जाहिद ने बलात्कार कर मार दिया, उसकी आंखें नोचकर निकाल ली, उसके हाथ पैर काट दिए, उसके गुप्तांगों में चाकू से वार किये, उसका पेट फाड़ दिया, फिर उसके शव को कुत्तों के खाने के लिए फेंक दिया।

यह रिपोर्ट पढ़ने के बाद मुझे विश्वास नहीं हुआ कि कोई मनुष्य इतना विभत्स आचरण भी कर सकता है

जरा इस रिपोर्ट के उन अंशों पर एक दृष्टि डालिये जिन्हें मैंने हरे रंग से हाईलाइट किया है आपको भी उस शांतिदूत जाहिद द्वारा 2.5 वर्षीय ट्विंकल के संग किया गया पैशाचिक आचरण समझ आ जाएगा

⭕ बच्ची के शरीर मे छोटी व् बड़ी आंत मिली ही नहीं
⭕ बच्ची के शरीर मे किडनी मिली ही नही 
⭕ यूरिनरी ब्लैडर मिला ही नहीं
⭕ जेनिटल्स मिले ही नहीं 
⭕ बच्ची के शरीर मे आंखें थी ही नहीं
⭕ बच्ची के हाथ पैर उसकी हत्या से पूर्व काटे गए थे

रमज़ान के महीने में रोज़ेदार मुहम्मद जाहिद ने अपने हिन्दू पड़ोसी की 2.5 वर्षीय बच्ची का बलात्कर किया उसकी आंखें नोचकर निकाल दीं, उसके हाथ पैर काटे फिर उसके गुप्तांगों में चाकू घुसाकर फाड़ा और अपने हाथ से खींचकर उसकी आंतें व् यूरिनरी ब्लैडर व् वेजाइना बाहर निकाल दीं,
फिर बच्ची का पेट चाकू से काटा और उसकी किडनी बाहर निकालकर फेंक दी।
Justice For Twinkle

Twinkle Sharma murder case को लेकर कुछ फेमस हस्तियों के ट्वीट:














#JusticeForTwinkle #twinklesharma #Aligarh #RealFaceOfIslam #ReligionOfTerrorists #ReligionOfRapists #NoOutrage #NoPlaycards #Killed4BeingHindu

1 मई 2019

याद

याद

याद


याद आती हो इस चांदनी रात में

याद आती हो मेरी हर बात में

कमबख्त, ये बसंत भी बसंत ना रहा

तेरी यादों का अब, कोई अंत ना रहा |

तारों के टूटने की आवाज सी आती है

वीरान पड़े इस दिल में, एक हलचल सी हो जाती है

पत्थर से दरिया, अब निकलता भी नहीं

तुम्हें भूलने का जरिया, अब मिलता भी नहीं |

काश, तेरी यादों का पिटारा बना लेता

तेरी एक-एक बात को, सितारा बना लेता

जाने दो, तेरी यादों को अब यहीं छोड़ देता हूँ

इस मुकाम पर अब, जिंदगी को नया मोड़ देता हूँ ||
- श्रीधर शर्मा (Sridhar Sharma)

2 मार्च 2013

Jaane Wale Aur Honge - Geet aur kavita

Jaane Wale Aur Honge

Hum To Yahi Reh Jaenge Paana Chahoge Hame Kabhi Aas Paas Mil Jaenge Aawaaz Doge Ek Baar Kabr Se Bhi Uth Kar Aaenge

Ye Dost B Ajeeb Hote hai - Geet aur kavita

Ye Dost B Ajeeb Hote hai

Ye Dost B Ajeeb Hote hai, Dene pe aaye To Jaan de de, Lene Pe Aaye To Hansi Tak Cheen Le, Kehne Pe Aaye To Dil K Tmam Kono K Raaz Tak Kah De,

Bada pyara tha wo dosti ka paigam - Geet aur kavita

Bada pyara tha wo dosti ka paigam

 jo aaya tha ek din hamare naam shayad ab tak the hum sacchi dosti se anjaan jo is rishte ko ye dil na paya pehchan aapni us soach par aaj khud hain hum hairaan,magar

Teri Ankhe Ab Hogi na Kabhi nam - Geet aur kavita

Teri Ankhe Ab Hogi na Kabhi nam

तेरी आँखें अब होगी ना कभी नम  तू जो देख ले तो भुला दे में सारे ग़म  तू जो चाहे जो बदलेगा मौसम  यह जो पल हैं इन्हे ख़ुशियो से भर लो तुम

Sach To Yeh Hai ki - Geet aur Kavita

Sach To Yeh Hai ki

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