Thursday, February 28, 2013

Hamari Kismat-Geet aur Kavita-7


 ये न थी हमारी क़िस्मत के निसाले यार होता . अगर और जीते रहते यही इन्तजार होता .. तेरे वादे पे जिये हम तो ये जान झूठ जाना. के ख़ुशी से मर न जाते अगर ऐतबार होता .. कोई मेरे दिल से पूछे तेरे तीरे-नीय कश को.

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