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17 मई 2024

Kabir Daas Ke Dohe - Amrit Vani, Poets | अमृत वचन सुविचार

Kabir Amrit Vani Aur Dohe

 कबीर दास जी के दोहे और सुविचार

नमस्कार दोस्तों, आज सुविचार के इस ब्लोग में आपको कबीर दास (Kabir Das) के दोहे की चर्चा करेंगे और उससे कुछ अनमोल वचन को समझेंगे। कबीर दास भारत के सबसे सम्मानित और प्रभावशाली कवियों (respected and influential poets) में से एक थे। इन्होंने भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ताने-बाने पर एक अमिट छाप छोड़ी। इनके द्वारा रचित दोहे बहुत सरल और शक्तिशाली शब्दों से गढ़े हुए है जो बहुत सारे ज्ञान को समाहित किये हुए है।  हम यहां पर कबीर दास के दोहे - अमृत वाणी (Amrit Vani) को पढ़ेंगे जो कबीर दास जी के  शिक्षाओं के सार को उजागर करता है तथा हमें अपने अंदर की गहराइयों तक सोचने के लिए प्रेरित करता है। तो चलिए फिर इनके कुछ दोहे को पढ़ते हैं तथा प्रेरित और मार्गदर्शन के इस ब्लोग में गोता लगाते हैं। 

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिल्या कोय; जो मन देखा अपना, मुझसे बुरा ना कोय। - कबीर दास

कबीर जी के इस दोहे का अर्थ यह है कि अगर मैं किसी बुरे आदमी की तलाश में गया तो कोई भी बुरा नहीं मिला लेकिन जब मैं अपने हृदय को टटोला, तो मुझे मुझसे बुरा कोई नहीं मिला। कहने का मतलब यह है कि किसी बुरे आदमी की तलाश करने से पहले अपने अंदर की बुराई को देखना चाहिए। अगर आप सही है तभी आप किसी को बात सकते हैं कि वे गलत है। नहीं तो आपको कोई हक नहीं बनता कि आप किसी की गलती को उजागर करें। 

कबीर दास जी के दोहें से हम क्या शिक्षा मिलती है?

जैसे की हमने आपको एक कबीर जी के दोहे और उसके अर्थ को जाना और समझा की उसमें कितनी गहरी और ज्ञान की बातों को पिरोया गया है। ऐसे ही इनके अन्य दोहे को पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि उसमें कितनी अधिक आध्यात्मिक ज्ञान और व्यावहारिक जीवन (spiritual knowledge and practical life) के पाठ को संजोया गया है। कबीर दास जी ने अपने दोहे को 15वीं शताब्दी में लिखे थे। इनके दोहे से हमें प्रेम, विनम्रता, आत्म-बोध और परमात्मा के विषयों को समझने का एक मौका मिलता है। कबीर दास जी काव्यात्मक अभिव्यक्तियाँ धार्मिक सीमाओं से परे हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को अपने दोहे के माध्यम से आकर्षित करते हैं। उनके द्वारा दोहों में पिरोये गये शब्द आत्मनिरीक्षण का आह्वान करते हैं और हमारे भीतर निहित शाश्वत सत्य की याद दिलाते हैं। चलिए फिर कबीर दास जी के कुछ अन्य दोहों को पढ़ते हैं और अपने ज्ञानकोष को बढ़ाते हैं। 

पोथी पढ़ पढ़ि जग उदास, पंडित भया न कोय।

ढाई आखर प्रेम के, जो पढ़े सो पंडित होय।। - कबीर दास

कबीर दास जी इस दोहें के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि इस संसार में आप चाहे कितने भी शास्त्र को पढ़ लें आपको एक दिन मृत्यु के द्वार पर पंहुचना ही है। इसलिए आप सबसे पहले प्रेम के ढाई अक्षर को समझने का प्रयास करें क्योंकि यही वह है जिससे द्वारा आप लोगों के लिए प्रेमी बन सकते हैं अथार्त लोगों के लिए प्रिय और अच्छे व्यक्ति बन सकते हैं। 

साईं इतना दीजिये, जामे कुटुंब समाये, 

मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाए - कबीर दास

इस दोहे के माध्यम से कबीर दास जी कहना चाहते हैं कि हे साईं मुझ पर इतना कृपा कीजिए की मैं अपने परिवार का भरण-पोषण सकूं और मैं भी भूखा न रहूं और कोई मेरे द्वार पर भिखारी भी आता है तो में उसे कुछ दे संकू। 

चलिए अब कबीर दास के अन्य दोहें को जानते और समझते हैं तथा उससे कुछ शिक्ष लेकर अपने जीवन में अमल करते हैं।

कबीर दास के दोहें और अमृत वाणी को समझते है-

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब



Kaal kare so aaj kar, aaj kare so ab; 
pal mein parlay hoyegi, bahuri karega kab? - Kabir Das
कबीर दास इस दोहे के माध्यम से कहना चाहते हैं कि कभी भी कोई काल पर नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि कल कभी आता नहीं है। हर काम को यदि आप कल पर टालेंगे तो वह कभी भी पूरा नहीं हो सकता है। इसलिए आज का काम आज ही करों और जो कल के लिए सोच रहे थे उसे अब शुरू कर दों।


Bura jo dekhan main chala bura na miliya koye

अर्थ : कबीर जी कहते है कि मैं जब इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न दिखाई दिया और जब मैंने अपने मन के अंदर झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा तो कोई नहीं है।

कबीरा खड़ा बाजार में, सबकी मांगे खैर



Kabira khada bazar mein, sabki mange khair; 
na kahu se dosti, na kahu se bair. - Kabir Das
कबीर दास जी इस दोहे के माध्यम से कहना चाहते हैं कि यह संसार एक बाजार के समान है, यहां पर किसी से दोस्ती और बैर नहीं रखना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से ही आप अपनी जीवन को ठीक प्रकार से जी सकते हैं। 

Pothi padi padi jag hua pandit bhaya na koy day aakhar prem ka pade so pandit hoye

अर्थ : कबीर जी कहते है कि  बड़ी बड़ी पुस्तकें को पढ़ कर संसार में कितने ही व्यक्ति मृत्यु के द्वार पहुँच गए, लेकिन सभी विद्वान न हो सके. वह यह भी मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार से केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले अर्थात वह प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी हो जाता है।

मोको कहां ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में

Moko kahan dhoonde re bande, main to tere paas mein; 
na teerath mein, na murat mein, na ekant niwas mein. - Kabir Daas
इस दोहों के माध्यम से कबीर दास यह संदेश देना चाहते हैं कि किसी भी ईश्वर को आप तीर्थ और मूर्तियों में क्यों देख रहे हो, वह तो आपके हृदय में बसा है। आप उसे दिल से महसूस करों वह आपके साथ ही है। 

Sadhu aisa chahiye, jaisa soop subhay, Saar saar ko gahi rahai, Thotha dei udaay.

अर्थ : कबीर जी कहते है कि  इस संसार में ऐसे व्यक्तियों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है कहने का अर्थ यह है कि जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा देंगे।

Tinka kabahu na nindiye jo paawan tar hoye.

अर्थ : कबीर जी कहते है कि  एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा नहीं करनी चाहिए जो तुम्हारे पांवों के नीचे दब जाता है। अगर कभी वह तिनका उड़कर आँख में आ जाता है तो बहुत अधिक पीड़ा होती है।


Dhire Dhire re mana dhere sab kuchh hoye.

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि मन में धीरज रखने से सब कुछ प्राप्त होता है और यदि कोई भी माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो समच आने पर ही आयेगा।


Mala pherat jug bhaya phira n man ka pher


अर्थ : कबीर दास जी किसी व्यक्ति को सलाह देते हुए कहते हैं कि कोई व्यक्ति चाहे लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की माला फेरता रहे हैं, लेकिन उसके मन का भाव नहीं बदल सकता और न ही  उसके मन की हलचल शांत होगी क्योंकि किसी भी व्यक्ति को हाथ की माला फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलना चाहिए।

Jaati n puchho saadhu ki puchh lijiye gyan


अर्थ : इस दोहे में कबीर दास जी कहते है कि सज्जन व्यक्ति की जाति न पूछ कर उसके ज्ञान को समझना की कोशिश करनी चाहिए। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि  कभी भी तलवार का मूल्य होता है उसकी मयान का नहीं


Dos paraye dekhi kari, chala hasant hasant


अर्थ : कबीर दास जी इस दोहे में कहते है कि मनुष्य में एक प्रकार का ऐसा स्वभाव होता है कि जब वह दूसरों के दोष पर हंसता है तो उसे अपने दोष याद नहीं आते। इसका कभी न अंत है और न आदि।


Jin khota tin piayea gahare paani paith

अर्थ : इस दोहे में कबीर दास जी ने मेहनत के बारे में बताया है और कहा है कि जो व्यक्ति प्रयत्न करते हैं, वे कुछ न कुछ उसी प्रकार से पा लेते  हैं जिस प्रकार से कोई मेहनत करने वाला गोताखोर गहरे पानी के अंदर जाता है और कुछ प्राप्त करके आता है लेकिन कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो डूबने के भय से किनारे पर ही बैठे रहते हैं और कुछ भी नहीं करते।

Boli ek anmol hai, jo koi bolata hai wahi janata hai

अर्थ : इस दोहे में कबीर दास जी ने मेहनत के बारे में बताया है कि यदि कोई सही रूप से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रत्न समान हो जाती है। इसलिए कभी भी बोली को ह्रदय के तराजू में तोलकर ही मुंह से बाहर आने देना चाहिए।

Ati ka bhala na bolana aur ati ki bhali n choop

अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि हमें कभी भी न तो अधिक बोलना चाहिए और न ही जरूरत से ज्यादा कम क्योंकि यह ठीक उसी प्रकार से है। जैसे कि बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं होती और बहुत अधिक धूप भी अच्छा नहीं कम।

Nindak niyare rakhiye aagan kuti chavay

अर्थ : कबीर दास जी ने इस दोहे में कहा हैं कि जो हमारी निंदा करता है, उस व्यक्ति के अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो ऐसा व्यक्ति होता है जो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ बनाता है।


Durlabh manushy janm hain, Deh n baarmbar

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि इस मनुष्य का जन्म मुश्किल से होता है। यह मनुष्यों का शरीर उसी तरह बार-बार नहीं प्राप्त होता जिस प्रकार वृक्ष से पत्ता  झड़ जाया करता है और दोबारा डाल पर नहीं आता।


Mange sabki khair, Kabira khada baajar men


अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि जब इस संसार में आऐ हैं तो अपने जीवन से यही तमवा रखना चाहिए कि सब जनो का भला हो और संसार में अगर किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न करें।


Kabir amrit vani- aapas men dou ladi ladi mue

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और मुस्लिम रहमान को इस बात को लेकर वे दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा जा रहे है और इसके बाद भी दोनों में से कोई सच को न जान पा रहा है।

अभी तक आपने कबीर दास जी के दोहों को पढ़ा और समझा की उसमें कौन-कौन सी ज्ञान के बाते दी गई है और वे क्यों आज के समय में हामारे लिए अमृत के समान है। चलिए अब कबीर दास से संबंधित कुछ प्रश्न और उत्तर पढ़ते हैं:

प्रश्न और उत्तर:

कबीर दास कौन थे?

कबीर दास 15वीं शताब्दी के भारतीय रहस्यवादी एक प्रसिद्ध कवि और संत थे। इनकी रचनाओं ने भक्ति आंदोलन (Bhakti movement) को उस समय बहुत अधिक प्रभावित किया था। इनके द्वारा रचित दोहे जितना उस समय प्रसिद्ध थे आज भी उतने अधिक प्रसिद्ध है। कबीर दास के दोहें बहुत सरल भाषा में है जो गहरी आध्यात्मिक और दार्शनिक अंतर्दृष्टि (spiritual and philosophical) का परिचय देते हैं। 

कबीर दास के दोहे का क्या महत्व है?

कबीर दास के दोहे उनके शाश्वत ज्ञान और सार्वभौमिक अपील (वैश्विक अपील) की तरह हैं। इनके दोहों से मानव जीवन, आध्यात्मिकता और नैतिकता के बुनियादी पहलुओं को समझने का मौका मिलता है। जब आप कबीर दास जी के दोहों को पढ़ेंगे तो आपको आत्मनिरीक्षण और स्वयं और परमात्मा की गहरी समझ को जानने और पहंचानने का सुख प्राप्त होगा। 

कबीर की शिक्षाओं को आधुनिक जीवन में कैसे लागू किया जा सकता है?

कबीर दास जी की शिक्षाएँ प्रेम, विनम्रता और आत्म-जागरूकता पर बल देती है जो आज के लिए भी प्रासंगिक हैं। इनके दोहों को पढ़कर आप आंतरिक शांति, रिश्तों में सुधार और कैसे प्रेम पूर्वक जीवन व्यतित करना चाहिए आदि को जान सकते हैं। 

क्या कबीर दास की रचनाएँ धार्मिक हैं?

नहीं, कबीर दास की रचनाएँ आध्यात्मिक है और वे किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। इनकी दोहों में दी गई शिक्षाएँ धार्मिक सीमाओं को पार करती हैं और सार्वभौमिक सच्चाइयों को बताती है जो सभी धर्मों के लोगों के लिए ज्ञानवर्धक है। 

कबीर दास के दोहे कहां मिल सकते हैं?

कबीर दास के दोहे विभिन्न संकलनों और अनुवादों की बहुत सारी किताबों को आप ऑनलाइन या बुक स्टोर से खरीद सकते हैं। इसके अलावा आप इंटरनेट के माधयम से भी इनके दोहो को पढ़ सकते हैं। सुविचार के इस ब्लोग में भी हमने इनके कई दोहों को ऊपर अर्थ के साथ प्रस्तुत किया है जिनको आप पढ़कर उनकी बातों को गहराई से समझ सकते हैं।

निष्कर्ष:

आपने Suvichar4u इस ब्लोग के माध्यम से कबीर दास जी के दोहे के आध्यात्मिकता और मानव अस्तित्व की एक झलक को पढ़ा। उनके सरल लेकिन शक्तिशाली शब्द दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। हम कबीर दास जी के शिक्षाओ को अपनाकर रोजमर्रा के जीवन में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं और अपने आस-पास के लोगों के साथ एक गहरा संबंध स्थापित कर सकते हैं। चलिए कबीर दास जी के दोहों से प्रेरणा लें और दूसरों को प्रेरित करने के लिए इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें।


आपके लिए कुछ अन्य सुविचार को पढ़ने के लिए लिंक्स नीचे दी जा रही है, इन्हें पढ़े और अच्छा लगे तो दूसरों के साथ साक्षा करें।

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मात-पिता बिन जन्म नहीं- गुरु बिन गति नहीं!!

जिस प्रकार बिना माता-पिता के जन्म संभव नहीं और जिस प्रकार बिना गुरू के ज्ञान की प्राप्ति नहीं उसी प्रकार बिना अप्लाईन वेस्टीज में सफलता नहीं। 

आइये एक कहानी के माध्यम से इसे समझने की कोशिश करते हैं - 

एक पंडित रोज रानी के पास कथा करता था। कथा के अंत में सबको कहता कि ‘राम कहे तो बंधन टूटे’। तभी पिंजरे में बंद तोता बोलता, ‘यूं मत कहो रे पंडित झूठे’। पंडित को क्रोध आता कि ये सब क्या सोचेंगे, रानी क्या सोचेगी। पंडित अपने गुरु के पास गया, गुरु को सब हाल बताया। गुरु तोते के पास गया और पूछा तुम ऐसा क्यों कहते हो?

तोते ने कहा- ‘मैं पहले खुले आकाश में उड़ता था। एक बार मैं एक आश्रम में जहां सब साधू-संत राम-राम-राम बोल रहे थे, वहां बैठा तो मैंने भी राम-राम बोलना शुरू कर दिया। एक दिन मैं उसी आश्रम में राम-राम बोल रहा था, तभी एक संत ने मुझे पकड़ कर पिंजरे में बंद कर लिया, फिर मुझे एक-दो श्लोक सिखायें। आश्रम में एक सेठ ने मुझे संत को कुछ पैसे देकर खरीद लिया। अब सेठ ने मुझे चांदी के पिंजरे में रखा, मेरा बंधन बढ़ता गया। निकलने की कोई संभावना न रही। एक दिन उस सेठ ने राजा से अपना काम निकलवाने के लिए मुझे राजा को गिफ्ट कर दिया, राजा ने खुशी-खुशी मुझे ले लिया, क्योंकि मैं राम-राम बोलता था। रानी धार्मिक प्रवृत्ति की थी तो राजा ने रानी को दे दिया। अब मैं कैसे कहूं कि ‘राम-राम कहे तो बंधन छूटे’।

तोते ने गुरु से कहा आप ही कोई युक्ति बताएं, जिससे मेरा बंधन छूट जाए। गुरु बोले- आज तुम चुपचाप सो जाओ, हिलना भी नहीं। रानी समझेगी मर गया और छोड़ देगी। ऐसा ही हुआ। दूसरे दिन कथा के बाद जब तोता नहीं बोला, तब संत ने आराम की सांस ली। रानी ने सोचा तोता तो गुमसुम पढ़ा है, शायद मर गया। रानी ने पिंजरा खोल दिया, तभी तोता पिंजरे से निकलकर आकाश में उड़ते हुए बोलने लगा ‘सतगुरु मिले तो बंधन छूटे’। अतः शास्त्र कितना भी पढ़ लो, कितना भी जाप कर लो, लेकिन सच्चे गुरु के बिना बंधन नहीं छूटता🙏🏻

इसी प्रकार वेस्टीज में आप चाहे कितनी भाग-दौड़ कर लें, बिना अप्लाईन की बात माने आप सफल तो हो सकते हैं लेकिन कामयाबी लम्बे समय तक टिकी नहीं रह सकती। अपनी अप्लाईन का सम्मान करें, क्यूकि आप भी कल एक सम्मानित अप्लाईन बनेगें। 

सभी सम्मानित अप्लाईन को समर्पित
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

सदैव प्रसन्न रहिये
जो प्राप्त है-पर्याप्त है

कुछ खास सुविचार


1. सोच बदलों, किस्मत बदलते देर नहीं लगेगी। 

2. इरादे पक्के हो तो पर्वत भी शीश झुका देते हैं

1 मार्च 2019

The Indian Lion - Wing Commander Abhinandan

भारत माता का बहादुर शेर - विंग कमांडर अभिनंदन

The Indian Lion, Wing Commander Abhinandan

दोस्तों आज भारत का एक शेर (The Indian Lion - Wing Commander Abhinandan) पाकिस्तान के आंख में आंख डालकर और उनसे लोहा लेकर सकुशल भारत लौट आया है। दोस्तों विंग कमांडर अभिनंदन हमारा वह शेर है जिसने पाकिस्तान के घर में घुसकर, भारत माता की जय बोलकर आये हैं। ऐसे शेर को मेरा लाखों सलाम। यह ही हमारे असली हीरों है, दोस्तों फिल्मी हीरों के लिए तो न जाने कितने लोग दिवाने बन जाते हैं। लेकिन विंग कमांडर अभिनंदन हमारा वह हीरों है जिसके सामने तो सारे हीरों बेकार है। हमे विंग कमांडर अभिनंदन जैसे भारतीय जांबाजों को अपना रोल मॉडल बनाना चाहिए ताकि इनके नक्शे कदमों पर चलकर, हम हमेशा भारत माता की हिफाजत कर सकें।

भारत माता का बहादुर शेर - विंग कमांडर अभिनंदन

दोस्तों पाकिस्तान आर्मी द्वारा बंदी बनाए गए भारतीय शरे विंग कमांडर अभिनंदन वतन वापस लौट आये है। दोस्तों पाकिस्तानी सेना उन्हें अटारी बॉर्डर लेकर पहुंची और  भारत के हवाले कर दिया। अमेरिका तथा रूस  समेत कई देशों के दबाव और भारत के आक्रामक रुख को देखते हुए पाकिस्तान को हमारे शेर को लौटानी ही पड़ा। दोस्तों हमारे सरकार ने इस मामले में बहुत ही अच्छा कार्य किया है। कहते हैं न कि झुकती है दुनियां झुकाने वाला चाहिए। यह बात आज सही साबित हो चुकी है क्योंकि भारत ने पाकिस्तान तो घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। यह हम सब भारतीयों की जीत है।

दोस्तों यदि इतना होने के बाद भी पाकिस्तान नहीं सुधरा तो फिर उसका अंत नजदीक है क्योंकि अभी तक उसने हमारे एक अभिनंदन को देखा है, अब विंग कमांडर अभिनंदन को हमारे युवा रोल मॉडल मानकर अपने आप को अभिनंदन बनाना लेंगे। संभल जाओ पाकिस्तान तुम्हारा अंत नजदीक है।

 विंग कमांडर अभिनंदन के लिए Suvichar4u.com की ओर से कुछ पंक्तियां


अभिनंदन हमारा अभिनंदन है।
यह रक्त नहीं मुख पर चंदन है।
अभिनंदन हमारा अभिनंदन है।
लड़ा वतन की खातिर प्यारा,
फंसा हुआ दुश्मन दल में,
जोश देखकर वीर शेर का,
कमी नहीं लगती बल में।
रहे सलामत भारतीय वीर मेरा,
कृपा श्री रघुनन्दन है।
अभिनंदन हमारा अभिनंदन है।

गगन भेदकर मीलों जाता,
पुन-पुन सकुशल वह लौटा,
आज समय ने किया अभिनंदन है।
अभिनंदन हमारा अभिनंदन है।

जीवन-मृत्यु अटल सत्य है,
देखा जाता मगर कृत्य है,
मृात भूमि की करे सुरक्षा,
किया भगवती ने उसकी रक्षा,
वही तो हमारा अभिनंदन है।

विंग कमांडर के साथ पाकिस्तान में घटी घटना -

 विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान जब पैराशूट से उतरे तो वे शुरू में समझ नहीं सके कि कौन सी यह जगह है। फिर उन्होने कुछ लोगों से पूछा कि ये भारत है या पीओके। स्थानीय लोगों ने झूठ बोला कि भारत है। ये सुनकर अभिनंदन ने भारत माता की जय के नारे लगाए। इस पर लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए उन्हें घेर लिया। अभिनंदन के पास अहम कागज़ात थे जो पाकिस्तानी सेना के हाथ लग जाते तो गज़ब हो जाता। ये विचार आते ही विंग कमांडर अभिनंदन ने हवाई फायर करते हुए दौड़ लगा दी। उन्हें हवाई फायर करने पड़े क्योंकि लोग पत्थर मारते हुए उनके करीब आने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने दौड़ लगाकर पास के तालाब में छलांग मार दी और सबसे पहले कागज़ात नष्ट कर दिए। लगभग एक घंटे की भागदौड़ के बाद स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया।

बाता दें कि विंग कमांडर अभिनंदन  पाकिस्तानियों के गिरफ्त में होने के बावजूद भी अपना सिर उच्चा रखा और उन्होने भारत से संबंधित को भी जानकारी किसी को नहीं दिया यह हमारे शेर की बहादुरी को बताता है कि भारत के शेर जांहा भी जाते हैं फक्र से सिर अपना उच्चा रखते हैं और दिल से भारत माता की जय बोलते हैं। विंग कमांडर अभिनंदन ने एक भारतीय सैनिक का रौब बरकरार रखा। सिर नहीं झुकाया क्योंकि वे जानते थे कि मेरा सिर झुका तो पुरे देश का शीश झुकेगा। ऐसा भारत के शेर को मेरा लाखों सलाम। नमन है भारत भूमि के ऐसे लाल को। तुम्हारा रौब देखकर गर्दन गर्व से तन गई। दुश्मनों के बीच शेर का बच्चा सुकून से चाय पीता दिखाई दिया। इस बात पर हमें गर्व है।

हमारे 130 करोड़ लोगों का सिर उस समय गर्व से उच्चा है गया जब हमारे देश का प्रधान सेवक (श्री नरेंद्र मोदी) ने कहा कि 'मेरे देश का सैनिक देश में ही नहीं, सीमा पार भी पराक्रम दिखा रहा है।'

जय हिंद 🙏
जय भारत की सेना, भारत माता की जय



- विनय हिंदुस्तानी

25 मई 2015

Munshi Premchand Ke Anmol Vachan

सुविचार : Kul Ki Pratishtha Bhi Vinmrata Aur Sadavyavahar Se Hoti Hai, Haikadi Aur Rooaab Dikhane Se Nahi


मुंशी प्रेमचंद के अनमोल वचन (सुविचार)


1. Kul Ki Pratishtha Bhi Vinmrata Aur Sadavyavahar Se Hoti Hai, Haikadi Aur Rooaab Dikhane Se Nahi. -


2. Man Ek Bhiroo Shatru Hai Jo Sadaiv Pith Ke Pichhe Se Vaar Karta Hai.

3. Chaaploosi Ka Jaharila Pyala Aapko Tab Tak Nuksaan Nahi Pahucha Sakta Jab Tak Ki Aapke Kaan Use Amrit Samjh Kar Pi Na Jayen. 

4. Mahan Vyakti Mahatvakanksha Ke Prem Se Bahut Adhik Aakarshit Hote Hain.

5. Jis Saahity Se Hamari Suruchi Na Jage, Aadhyatmik Aur Maansik Tripti Na Mile, Hamme Gati Aur Shakti Na Paida Ho, Hamara Saundrya Prem N Jagrit Ho, Jo Hammen Sankalp Aur Kathinaiyon Par Vijay Prapt Karne Ki.


6. Sachch Dreedhta Na Utapann Kare, Wah Hamare Liye Bekar Hai, Wah Saahity Kahalane Ka Adhikari Nahi Hai.

7. Aakash Men Udane Wale Panchhi Ko Bhi Apne Ghar Ki Yaad Aati Hai. 

8. Jis Prakar Netrahin Ke Liye Darpan Bekar Hai Usi Prakar Budhdhihin Ke Liye Vidya Bekar Hai. 

9. Nayay Aur Niti Lakshmi Ke Kilhaune Hain, Wah Jaise Chahati Hai Nachati Hai.

10. Yuvavastha Aaveshmay Hoti Hai, Wah Krodh Se Aag Ho Jaati Hai To Karoona Se Paani Bhi.

11. Apani Bhool Apne Hi Haathon Se Sudhar Jaye To Ya Usase Kahi Achchha Hai Ki Koee Doosara Use Sudhare.

12. Desh Ka Udhdar Vilasiyon Dwara Nahi Ho Sakta. Uske Liye Sachcha Tyagi Hona Aavashyak Hai. 

13. Masik Vetan Pooranmasi Ka Chand Hai Jo Ek Din Dikhayee Deta Hai Aur Ghatate Loopt Ho Jata Hai.

14. Krodh Men Manushy Apne Man Ki Baat Nahi Kahata, Wah Kewal Doosaron Ka Dil Dukhana Chahata Hai. 

15. Anuraag, Yauvan, Roop Ya Dhan Se Utpann Nahi Hota. Anuraag, Anuraag Se Utpann Hota Hai. 

16. Dukhiyaron Ko Hamadardi Ke Aansoo Bhi Kam Pyare Nahi Hote.

17. Vijayee Vyakti Swabhav Se, Bahimurkhi Hota Hai. Prajay Vyakti Ko Antmurkhi Banati Hai.

18. Ateet Chahe Jaisa Ho, Uski Smritiyan Pray: Sukhad Hoti Hai.

19. Dukhiyaron Ko Hamardardi Ke Aansoo Bhi Kam Pyare Nahi Hote.

20. Main ek majdoor hoon. Jis din kuchh likh na loon us din mujhe roti khane ka koi hak nahi.

21. Nirasha Sambhav Ko Asambhav Bana Deti Hai.

22. Bal Ki Shikayate Sab Sunte Hain, Nirbal Ki Phariyaad Koi Nahi Suntan.

23. Daulat Se Aadami Ko Jo Samman Milta Hai, Wah Uska Nahi, Uski Daulat Ka Samman Hai. -

24. Sansaar Ke Sare Naate Sneh Ken Ate Hain, Janha Sneh Nahi Waha Kuchh Nahi Hai.

25. Jis Bande Ko Pet Bhar Roti Nahi Milti, Uske Liye Maryada Aur Ijjat Dhong Hai.

26. Khane Aur Sone Ka Naam Jiwan Nahi Hai, Jiwan Naam Hai, Aage Badhae Rahane Ki Lagan Ka.

27. Jiwan Ki Durghatnaon Men Aksar Bade Mahatv Ke Naitik Pahaloo Chhipe Hue Hote Hain.

28. Namaskar Karane Wala Vyakti Vinmarta Ko Graham Karta Hai Aur Samaj Men Sabhi Ke Prem Ka Patra Ban Jaata Hai.

29. Achchhe Kaamon Ki Sidhdhi Men Badi Der Lagati Hai, Par Bure Kaamon Ki Sidhdi Men Yah Baat Nahi.



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