Ujade hue chaman ka-Geet aur kavita-10


उजड़े हुए चमन का, मैं तो बाशिंदा हूँ कोई साथ है तो लगता है, मैं भी अभी ज़िंदा हूँ  ज़िंदगी अब लगती है, बस इक सूनापन जब से बिछडे हुए हैं, तुमसे हम जान अब तो तेरे लिए ही, बस मैं ज़िंदा हूँ

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