Kahane ko to-Geet aur Kavita-27


कहने को तो हम, खुश अब भी हैं हम तुम्हारे तब भी थे, हम तुम्हारे अब भी हैं  रूठने-मनाने के इस खेल में, हार गए हैं हम हम तो रूठे तब ही थे, आप तो रूठे अब भी हैं

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