Friday, May 10, 2019

आप का सियासी ड्रामा है थप्पड़ कांड

आप, थप्पड़ कांड और सच - AAP ka Siyasi Drama

'आप' का सियासी ड्रामा है थप्पड़ कांड, - मीडिया कवरेज के लिए रचा गया ड्रामा

सुविचार

"कहते हैं न ड्रामा करते करते इतना मत बन जाओ कि लोग आपको पुरा ड्रामेबाज समझने लगे। "- Vinay Singh


चलिये थप्पड़ कांड कैसे है आप का सियासी ड्रामा, समझने की कोशिश करते हैं -

1978 में एक फिल्म बनी, किस्सा कुर्सी का। इसको लेकर बहुत विवाद भी हुआ। इंदिरा गांधी को आपत्ति थी। इसमे मुख्य रोल में शबाना आजमी भी थीं। ये फिल्म एक नुक्कड़ नाटक की तरह था। इसे फिल्म और मनोरंजन से जोड़ कर देखने पर निराशा हाथ लगेगी। फिल्म में शानदार तरीके से राजनीति के मनोविज्ञान को दर्शाया गया है। इस फिल्म को देख कर कम से कम 2014 तक की राजनीति का ज्ञान हो जायेगा। 2014 के बाद तो राजनीति को बस मोदी नाम से जाना जाता है।

आप, थप्पड़ कांड और सच


किस्सा कुर्सी का, इस फिल्म में दिखाते हैं कि दो व्यापारी घराने के युवा जोड़ा कुछ अलग करना चाहते हैं जिससे उनकी दौलत, शोहरत और शक्ति में वृद्धि हो। इन दोनो को रोड के किनारे एक नट (जादू टोना जैसे करतब दिखाने वाले) दिखता है जो बोलने में एकदम स्टोरी टेलर होता है। लोगों ने उसे घेर रखा होता है। एक अनपढ़ नट जिसे दुनिया दारी का कोई ज्ञान नही, उसका लोगों पर प्रभाव देख कर युवा जोड़े को अपना लक्ष्य दिख जाता है। दोनो उस नट को बड़े सपने दिखाते हुए राजनीति में लॉन्च कर देते हैं। बोलने में वो एक्सपर्ट होता ही है इसलिए अपने सामर्थ्य का इस्तेमाल करते हुए युवा जोड़ा व्यापार जगत से निकल कर राजनीति में अपनी जगह बनाते हुए देश के सिस्टम का हिस्सा बन जाता है।

अब इस प्रसंग से नट को बाहर निकाल लेते हैं जो श्री श्री चार सौ बीस अरविंद केजरीवाल हैं। राजनीति, फिल्म और बाबागिरी जैसे कुछ क्षेत्रों में सारा खेल जबान का है। जैसे सपने दिखाओ वैसी मलाई। व्यक्तिगत स्वार्थ में डूबे लोगों को सपने दिखाना आसान है। केजरीवाल ने सबसे पहले अन्ना आंदोलन से अपना प्लेटफॉर्म तैयार किया। इसके बाद इसने अपने बच्चों की झूठी कसम खाते हुए राजनीति में आने का मेन्स एग्जाम पास किया।

राजनीति में आने से लेकर अब तक केजरीवाल ने तीन मुख्य काम किये। पहला काम लोगों को बड़े बड़े प्रलोभन भरे सपने दिखाना, दूसरा काम दिन रात मोदी को कोसना, तीसरा मुख्य काम येन केन प्रकारेण मीडिया में बने रहना।

पहले और दूसरे काम में फ्लॉप होने के बाद केजरीवाल ने हमेशा तीसरे काम पर फोकस किया। लोग अपने सामर्थ्य के हिसाब से अपना प्रदर्शन करते हैं इसलिए केजरीवाल को लेकर सच्चे आम आदमी में अब कोई संदेह नही रहा। अब हाल फिलहाल की घटनाओं पर नजर डालते हैं।

दो तीन महीने पहले केजरीवाल चंडीगढ़ में रैली करने गये। इतनी भीड़ थी कि दूरबीन से भी ना दिखे। इससे केजरीवाल भड़क गये और ये बिना भाषण दिये लौट आये। इससे आयोजक खर्चे को लेकर केजरीवाल पर भड़क गये। जाहिर है वो पैसा आयोजक ने ही अपनी जेब से भरा होगा। दूसरा वाकया है लाल मिर्च पावडर वाला। इस घटना के घटते ही ट्वीटर सहित सभी साइट पर आम आदमी पार्टी ने इसे मोदी का हमला बताते हुए रुदाली गान प्रारम्भ कर दिया। बहुत बड़ा जानलेवा हमला घोषित कर दिया इसको। मैं अब तक नही समझ पा रहा हूं कि लाल मिर्च से कैसे जान ली जा सकती है।

अब अंत में थप्पड़ कांड पर आते हैं जो पहली बार नहीं है।

अभी बहुत दिनों से सोशल साइट पर सास बहु की तरह आप कांग्रेस गठबंधन का पाणिग्रहण होगा या नही का सीजन चल रहा था। नतीजा कुछ नही निकला और लोग भी बोर हो गये। इसी हफ्ते केजरीवाल ने मोदी जी को छोटा दिखाने के लिए अपने कोर वोटर एरिया, अर्थात जामा मस्जिद इलाके में रोड शो किया। इस रोड शो भीड़ में नाम पर बस वो समर्थक थे जो रोड शो का हिस्सा थे। इसे ना मीडिया ने कवर किया और ना ही ये खुद अपने पेज पर दिखा सकते थे। अब क्या किया जाये? इसी के लिए थप्पड़ कांड रिटर्न्स का आयोजन किया गया जिसका प्रभाव स्पष्ट है।

फिर से थप्पड़ कांड का आयोजन होते ही केजरीवाल सुर्खिया बटोरने लगे। सभी सोशल साइट पर यही चल रहा है। कोरा भी अछूता नही रहा। इस पर कई सवाल और दर्जन भर जवाब आ चुके होंगे। अब तक केजरीवाल पार्टी के लोग कई प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर चुके हैं और इसे जान लेवा हमला बता चुके हैं। क्या वाकई एक थप्पड़ जान लेवा हमला हो सकता है? केजरीवाल ने इस थप्पड़ को दिल्ली वालों के गाल पर लगा थप्पड़ बताया है जिसे केजरीवाल के सिवा और कोइ आम दिल्ली नागरिक नही मानेगा। वो तो खुद ये स्वर्णिम मौका प्राप्त करना चाहेंगे। बस केजरीवाल के समर्थक इससे इत्तेफाक नही रखेंगे और इसे मोदी की साजिश साबित करने के सबूत लाएंगे।

कुल मिलाकर इस थप्पड़ की गूंज वो शहनाई बन चुकी है जिसे केजरीवाल सुनना चाहते थे। जहां देखो वहां केजरीवाल छाये हुए हैं। मैं इस घटना की घोर निंदा करता हूं। ये थप्पड़ कांड तब तक चलना चाहिए जब तक केजरीवाल कोर्ट में साबित ना कर दें ये मोदी के इशारे पर हुआ है।

स्रोत - Quora Post, Pankaj Mishra, New Delhi

1 comment:

Unknown said...

Y to esa hi karega jb tk zinda h


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