Sunday, January 27, 2019

MOTIVATIONAL QUOTES FOR STUDENTS: SSC Exam में सफलता पाने के लिए मंत्र

SSC exam में सफलता पाने के लिए मंत्र

 SSC exam के उम्मीदवारों के लिए प्रेरणादायक सुविचार

SSC JE Notification आने वाली है और इसको लेकर बहुत से छात्रों ने मन बना लिया है कि इस बार एग्जाम देंगे। SSC परीक्षा सरकारी नौकरी चाहने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित परीक्षाओं में से एक हैं। इन परीक्षाओं को पास करने के लिए, उम्मीदवारों के पास उच्च स्तर की प्रेरणा होनी चाहिए। प्रेरणा तथा सुविचार लोगों की इच्छाओं, कार्यों तथा आवश्यकताओं को पुरा कराने का कारण बनते हैं। प्रेरणा से लोगों में कुछ करने की इच्छा पैदा होती है। SSC परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए, उम्मीदवारों को कम से कम 1 वर्ष कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और इसके लिए प्रेरणादायक सुविचार मन में हो तो उम्मीदवार अपने लक्ष्य से नहीं भटकता

SSC JE Notification Quotes

SSC JE Notification आने के बाद उम्मीदवारों का एक ही उद्देश्य होता है कि वे एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाये और अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सोच और प्रेरणा उच्च होना बहुत ही आवश्यक है। उम्मीदवारों को मोटीवेट होना बहुत ही जरूरी है ताकि वे अपने लक्ष्य पर फोक्स हो सके।
यहां पर हम कुछ महत्वपूर्ण प्रेरकदायक सुविचार प्रस्तुत कर रहे हैं जिसको पढ़ने के बाद आप अपने आप को  SSC एग्जाम देने के लिए मोटीवेट कर सकते हैं।


छात्रों के लिए उच्च प्रेरणा दायक सुविचार

1. सफल और असफल लोगों की क्षमतायें बहुत भिन्न होते हैं- सफल लोग हमेश अपने लक्ष्य पर फोक्स रहते हैं जब्कि असफल लोग ऐसा नहीं कर पाते। इसलिए एग्जाम में सफल होने के लिए लक्ष्य पर फोक्स रहें।

2. प्रत्येक छात्र अपनी सोच और धारणा में भिन्न हो सकते हैं लेकिन अपनी क्षमताओं में नहीं- कहने का मतलब यह है कि किसी ने अपना वांछित लक्ष्य असानी से प्राप्त कर लिया, तो दूसरे भी विभिन्न तरीकों उसे प्राप्त कर सकते है।

3. सफलता छोटे छोटे प्रयासों का योग होता है- प्रतिदिन लगातार मेहनत करने से एग्जाम में सफलता अवश्य प्राप्त होता है।

4. कोई भी महान कार्य एक दिन में पुरा नहीं होता है- बार-बार किए जाने वाले छोटे छोटे कार्य बड़ी बाधा को नष्ट कर देती है, ठीक ऐसे ही यदि आप अपने पढ़ाई को बार बार दोहरायेंगे तो आप एग्जाम को असानी से पास कर सकते हैं।

5. आप कर सकते हैं या नहीं कर सकते, इस हस्तक्षेप में न पड़े - खुद पर विश्वास रखें और पढ़ाई से ध्यान न भटने दें - अपनी क्षमताओं और अक्षमता के बारे में बार बार न सोचे याद रखे कि थॉमस अल्वा एडिसन बिजली के बल्ब बनाने में 1000 बार असफल हुए थे लेकिन उन्होने हार न मानी, जिसकी वजह से वह सफल हुए थे तो फिर यदि आप अपने प्रयास को बिना परिणाम सोचे जारी रखेंगे तो आप अवश्य सफल होंगे।

6. कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता- सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत ही एकमात्र कुंजी होती है। एक सही दिशा और उचित मार्गदर्शन के साथ अपने पढ़ाई में मन लगायेंगे तो आप अवश्य सफल होंगे।


7. ऐसा मत सोचो कि पढ़ाई के लिए प्रयाप्त समय नहीं – याद रखे कि सफल, कम सफल और असफल, सभी व्यक्तियों के पास दिन के 24 घंटे होते हैं। कुछ लोग इंही 24 घंटे का सही उपयोग करके सफलता प्राप्त करते हैं तो कुछ उसका दुरपयोग करके अपना ना नाश। समय का सही उपयोग करने लिए अपना दिनचर्या बनाये और उसके अनुसार अपनी पढ़ाई को अंजाम दें। ऐसा करने से सफलता आपकी कदमों को चुमेगी।

8. बिना प्रयास किये सफलता पाना असंभव है - छात्र जीवन में हर कोई देखता है कि कुछ छात्र न्यूनतम प्रयास करके दूसरों की तुलना में अधिक स्कोर कर लेते है तो कुछ कम। इसलिए अपनी क्षमताओं को स्वीकार करते हुए अपना प्रयास जारी रखें और याद रखें कि जब दूसरे लोग इस एग्जाम में अच्छा स्कोर प्राप्त कर सकते हैं तो आप क्यों नहीं। कड़ी मेहन और प्रयास जारी रखें सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

9. सफलता प्राप्त करने के लिए परीक्षा की तैयारी जहां हैं वहीं से शुरू करें-तैयारी शुरू करने का कोई सही समय नहीं हो सकता है और न ही अतिरिक्त सामान की जरूरत। SSC की तैयारी में आपके दृष्टिकोण और निरंतरता की आवश्यकता होती है। इसलिए पहले उन विषयों का अध्ययन करें जो आपके पास हैं और फिर अपनी तैयारी को आगे बढ़ाये।

10.उठो, जागो और तब तक मेहनत करों जब तक कि लक्ष्य पूरा न हो जाए- यह संवाद स्वामी विवेकानंद द्वारा बोला गया था जो बहुत ही लोकप्रिय हुआ था। इसका अर्थ यह है कि हमे अपने कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए तब तक मेहन करते रहना चाहिए जब तक कि वह हासिल न हो जाये। इसलिए आप परीक्षा कि तैयारी में हमेशा लगे रहें जब तक कि आपको परीक्षा में सफलता हाथ न लग जाये।
SSC JE Notification Quotes

Wednesday, January 23, 2019

Short Story Quotes: - एक स्त्री के लिए उसका सबसे किमती आभूषण क्या है?

एक स्त्री के लिए उसका सबसे किमती आभूषण क्या है?


कुछ दिन पहले मैं नौसेना के एक उत्सव में शामिल होने गया था। जब मैं वहाँ गया तो पता चला कि ये सिर्फ महिलाओं के सम्मान के आयोजित किया गया था। सभी नौ सैना में काम करने वाले कर्मचारियों की पत्नि वहाँ आई हुई थी।

एक स्त्री के लिए उसका सबसे किमती आभूषण क्या है?


मैंने वहां पर देखा कि आगे की पहली पंक्ति में जो तीन महिलाएं बैठी हुई है उनका बहुत खास ध्यान रखा जा रहा है। अगल बगल से पूछने पर पता चला कि उनमें से दो तो सबसे वरिष्ठ अधिकारियों की पत्नियां थी।

लेकिन जो चीज़ मुझे सबसे अज़ीब लगी वो ये कि वो दोनों महिलाओं का अन्य लोगों के प्रति रवैया बहुत बुरा था। वो खुद को जाने क्या समझ रही थी। सब पर हुकुम चला रही थी और बद्तमीजी से बात करना ही वे अपना शान समझ रही थी। 
मैं तो यही सोच रहा था कि आखिर इन महिलाओं के पास खुद का व्यक्तित्व ही क्या था। बस अधिकारी की पत्नी होना ही काफी है क्या?

वहीं दूसरी तरफ ये तीसरी महिला थी जो बहुत ही नम्र और शांत स्वभावी थी। सभी को आदर दे रही थी। आदेश वो भी दे रही थी कर्मचारियों को किन्तु भाषा सुशील थी। पूछने पर पता चला कि वो अध्यापक है यहाँ और इसलिए सबके सम्मान की अधिकारी भी।

तीसरी महिला की पहचान उसके पति से नहीं बल्कि उसकी अपनी थी। उसकी पहचान कराने के लिए वहाँ किसी को उसके पति का नाम नहीं लेना पड़ा।

एक महिला के लिए उसका सबसे किमती आभूषण है उसकी खुद की एक अलग पहचान।
आखिर कब तक हम किसी की बेटी, किसी की पत्नी और किसी की माँ का घण्टा गले मे डालकर घूमेंगे?
किसी भी महिला का आभूषण उसकी विद्या होने पर भी विनम्रता है, और विवेक है - क्या सही क्या गलत, कौन मित्र कौन शत्रु, क्या सत्य और क्या असत्य, क्या धर्म और क्या अधर्म। यह विवेक विद्या के बिना संभव नहीं। विद्या ही मनुष्यमात्र का सबसे किमती आभूषण है। यह बार इसी घटना से स्पस्ठ हो जाता है। विद्या से इन्सान को निर्णय लेना, आत्मनिर्भर बनना और आत्मविश्वास होना, यह सब स्वतः सिद्ध हो जाता है।

शिक्षा (Education):


  1. शिक्षा को कभी पैसे से नहीं तौला जा सकता, यह तो वह आभूषण है जो सबसे मूल्यवान है। 
  2. निपुणता एक प्रकार का मार्ग है, कोई गणतब्य स्थान नहीं, इस मार्ग पर चलना ही शिक्षा कहलाता है। 
  3. शिक्षण केवल यह बताता है कि क्या संभव है और क्या असंभव, लेकिन सीखना असंभव को संभव बना देता है। 

Monday, January 14, 2019

Should such education be able to build human

Education in India

Education coordinates life with Satyam, Shivam, Sundaram. By this it shows the beauty of the intellect, the beauty of the heart and the true nature of the soul. Education works in the process of disrupting inner light. It fills sublime values ​​in excellence and behavior in the character, brilliance, contemplation. On the one hand, where the material side is enriched, on the other hand it is also the proper and the best way to advance towards spiritual uplift.
Should such education be able to build human

Education is a natural inclusion of ethics and spiritual growth. Due to this the nation becomes prosperous and prosperous. It is believed to be akin to the idiocy. Education ignores ignorance and teaches the lessons of tolerance and hard work in the world of behavior. Something like this has manifested in its important policy century:

Jatiyay Dhio Hari Sinchati Rakshi Satyam Mannanti Dishti Pappamaparkoti.
Chetesh Prasadati Dikhu Tanoti Kirtimal Do not know how to do it

Surely education educates its nature. It reveals humanity in humans. This is the beauty of human interaction that makes sense and sense awake. Individuals and societies associate themselves with its sensing sources. For this reason, the cordial atmosphere of love and harmony remains in the educated society.

The teacher or mentor giving education is the person who instills education in the mind and brain of the student in an intuitive and simple way. The teacher's knowledge, style, communication and behavior are very important, because through this, he can realize his students knowledge.

Modern academicians have assessed the characteristics of the teachers under these points-the right knowledge, skillful style, simple and lucid language, sweet behavior, truthfulness, fairness, fairness and affection and goodwill approach towards students.

”The truth is that both the teacher and the learner are complementary to each other. Among them is the connection between holy knowledge. There is a learner who wishes to receive devotional education. It is said in the principle chamber about the qualities of the student- "Gurdodhana nanavaran chhatraam tattaalam aasthi isi studentam." This Upanishad says this way in this way: "I am unmindful of the untimely tani katya ashakhannuo aracashi."

In ancient times, the student reached the teacher with reverence. The teacher put his underlying teachings into the womb by rendering him into a rubbish of sacraments. With this noble feeling the teacher was embellished with the word Antvivar. The teacher used to provide her friendly education to the learner.

In today's modern scenario, it can also be tested in three forms- (1) Knowledgeable (2) affective and (3) functional. It is emphasized in understanding, composing, computing, computing in knowledgeable purposes. Under the emotional aspect, positive growth in students is awakened and motivated to study. The functional process emphasizes the acquired knowledge and inspiration in practical life. The process of obtaining maximum knowledge in the present era has been started in the shortest possible time.

Therefore, such methods are being used from primary schools to colleges, universities. In the methods used, speech or reading method, group discussion or seminar method, collective performance method and correspondence method are main. The help of radio, television and computer is being taken to make them simple, informative and comprehensive.

In the present scenario of education world, despite high level principles and state-of-the-art arrangements, repetition failure and personalization are increasing. When this fact goes deep in, the conclusion is the same. Today's education is prestigious on meaning and work. It has only become a source of livelihood or livelihood. The combination of education which can turn away from penance by joining with splendor and luxury, how can he change the character in contemplation and behavior. The truth is that today's educational landscape is completely misguided

If current education is to be creative, then the value, importance and purpose of education must be understood correctly and the ancient Indian tradition has to be timely revered. The above discrepancies can be overcome by incorporating the sage-consciousness in the teaching process. In the current education, the art of living or spiritual science is essential. True life can not be imagined without it.

Today, the coordination of the ideas of western world academics like Panter, Dewey, Freebell, James Vivekananda, Maharishi Arvind, Lokmanya Tilak, Brahmarshi Dayanand etc. are necessary. Because today society needs such education that can build human and make society and nation evolve and make dynamic.

Education Quotes for you:

  1. Education is a passport of future, so it should be prepared from today.
  2. Education is a powerful weapon that can change the world.
  3. Education teaches us to think deeply and seriously.
  4. Education is the base of life.
  5. Education is the key to opening the box of life.

Friday, January 4, 2019

Spiritual thoughts, Quotes and Suvichar

Quotes for you

आध्यात्मिक विचार और सुविचार

 (Spiritual Thoughts and Quotes)

Without Spiritual Knowledge, life (man and woman) is incomplete.
 If anyone has the property of billions of trillions, he still feels a little lacking in his life. That lack of devotion of God is lacking.
 For his fulfillment, going to the shelter of the perfect Guru will benefit from doing the spiritual pursuit of the full divine, 
 ■ Who is the perfect Guru?
 ■ What is Sanskrut sadana?
 ■ What is spiritual knowledge?
 ■ Which god should worship?
 ■ Who is the perfect divine?
 ■ What is salvation?


Spiritual thoughts in Hindi and English

Spiritual thoughts Sourced by Bhagavad Gita
 
Karma is important because of religion,
Because religion has to be solicited by God,
When doing karma ...
God has to give himself.


The flute is very dear to Lord Krishna, because the flute has three properties. The first flute is not lump. Which indicates that do not keep any kind of lump in your mind that means do not have a sense of exchange in mind. 


भगवान श्रीकृष्ण को गाय बहुत ही प्रिय है। इसका सबसे बड़ कारण यह है कि गाय सब कार्यों में उदार तथा समस्त गुणों से भरपूर होती है।
गाय का मूत्र, गोबर, दूध, दही और घी औषिधीय गुणों से पूर्ण होता है इसलिए इन्हे पंचगव्य कहते हैं।
जो गौ की एक बार प्रदक्षिणा करके प्रणाम करता है, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है तथा उसके सभी कार्य दिन प्रतिदिन सफल होने लगते हैं।

 
The second does not ring at all. Believe it, do not say until you say it.

The third plays whenever the melody starts. Say whatever it means, say sweet When such a person sees God in one, then lift it up and lift it with your lips.

By the astrological point of view, the flute removes the negative energy and the effect of kalsarp. Kalsarpa Yoga was also in the Kundali of Shri Krishna. That is why Sri Krishna has affection from the flute.  


Some things that are difficult to do in life

Doing the work that we find difficult and then waiting for its results, this is the time that it is very difficult to cross.

Speaking truth, speaking the truth is not very difficult, but it is very difficult to choose which people have to speak in front of and what place to speak.

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