Bharat Band Kina Sahi Kitna Galat - भारत बंद, विचारणीय छंद

यह कैसा भारत बंद, जो आपस में लड़ाई करवायें!

 यह कैसा भारत बंद, जो भाई भाई को काटने पर मजबूर हो गये आप। किसी ने सच ही कहा है कि हिंदुओं में यदि जात पात खत्म नहीं हुआ तो इसका फायदा कोई और उठायेगा। इसका जिता जागता उदाहरण है 2 अप्रैल भारत बंद की कहानी। हमें अब एक होने की जरूरत है नहीं तो कुछ लोग जो हमे काफीर कहते हैं वे इसका फायदा उठा लेंगे। हे हिंदुओं आप जात पात को छोड़कर क्या एक जाती नहीं बन सकते जिसका नाम एक ही हो सकता है वह है हिंदुस्तानी। गर्व से कभी ये मत कहों की मैं राजपूत हूं, मैं पंडित हूं, मैं एक शूद्र हूं, मैं एक वैश्य हूं बल्कि यह कहों कि मैं एक हिंदुस्तानी हूं। जिस दिन सब एक होकर गर्व से ये कहेंगे कि मैं एक हिंदुस्तानी हूं उस दिल ये लोग जो भारत के टूकड़े करने के बात करते हैं वे दूम दबाके भाग जायेंगे और भारत फिर से विश्व गुरु कहलायेगा। इसलिए गर्व से कहों मैं एक हिंदू हूं। 

यह कैसा भारत बंद, जो आपस में लड़ाई करवायें!


अम्बेडकर जी को हम भी उतना मानते हैं जितना की आप तो फिर क्यों आपने भारत बंद किया ऐसा करने से क्या अम्बेडकर जी  का सीना चौड़ा हुआ नहीं। सोच के देखियें इससे किसका नुकसान हुआ। मेरे क्रांतिकारी मित्रों क्या ऐसा करने से आप बधाई के पात्र हुए नहीं बल्कि जब आप शाम को ऐसा करके घर पहुंचे होंगे तो कही न कही आपको जरूर महसूस हुआ होगा की ये भारत बंद नहीं हमारा अकल बंद था क्योंकि आपने अपना खुद नुकसान किया। हमारी आपसी फूट का फायदा कौन उठा रहा है जारा आप सोचिये।

मेरे भाइयों क्या आपको पता है कि आपकी इस आंदोलन की वजह से एक एम्बुलेंस में नवजात बच्चे की मृतु हो गई उसमें इसका क्या कसूर था, उसकी माँ अब तक रो रही है क्या आप उसके आंसू को पोछ सकते हैं नहीं ना और वह कब तक रोयेगी ये भी नहीं पता। क्या आप लोग उसके दोषी नहीं है। सोचों तुम एक दिन नवजात रहे होंगे क्या उस दिन ऐसा भारत बंद हुआ होता और खुद न करें आपके साथ ऐसा हदसा हुआ होता तो क्या आप इस धरती पर होते। सोचों मेरे भाई, जरा सोचों कौन लोग इसका फायदा उठा रहे हैं।

उदयमंदिर थाने के उप निरीक्षक महेन्द्र चौधरी को कुछ प्रर्दशनकारियों ने घेर कर पीटा जिसकी वजह से वे शहीद हो गयें। जरा सोचों मेरे भारी उसमें उनकी क्या गलती थी वे तो अपनी नौकरी कर रहे थे। आपके सर पर तो भारत बंद का जनून सवार था इसलिए आपको यह भी नहीं दिखरहा था कि यह भी किसी का भाई होगा। आपने किसको मारा वह भी एक हिंदुस्तानी था और आप भी तो भाई भाई को मारते समय आपको जरा सी भी लजा नहीं आई। ये कैसा भारत बंद था मेरे भाई मुझे कोई समझा दो या खुद सोचो की कौन लोग हमे आपस में लड़ाकर फायदा उठा रहा है।

इस आंदोलन में फायरिंग हुई और इस फायरिंग से एक छात्र की मौत हो गई। इसमें इस छात्र की क्या गलती थी मेरे भाई और न जाने कितने भाइयों को चोट लगी कितने का घर तबाह हो गया। क्या आपको अभी भी लग रहा है कि आपका भारत बंद सफल रहा नहीं। भारत बंद सफल नहीं रहा बल्कि भाई भाई के बीच में नफरत की दरार पड़ गई। बोलो ये दरार कैसे मिटाओंगे मेरे भाई। जिस देश को दिन रात मेहनत करके इस देश की तरकी में योगदान देना चाहिए उस देश के युवा एक दिन भारत बंद करायेंगे ये किसे पता था। भारत बंद होने से सिर्फ हमारा ही नुकसान हुआ उसको समझों मेरे भाई। आपसी लड़ाई झगड़े को छोड़ों और उन लोगों को सबक सिखाओं जो लोग भारत बंद का ऐलान किया। समझो ये लोग तो चाहते हैं कि ये आपस में लड़े ताकि वे इसका लाभ ले सकें। अब आगे क्या लिखूं मेरे इस कविता को पढ़े और समझने कि कोशिश करें कि भारत बंद से क्या लाभ मिला और यह कितना सफल रहा!
क्रांतिकारी मित्रों, बधाइयाँ.. आपका भारत बंद सफल रहा!

विचारणीय छंद

क्रांतिकारी मित्रों, बधाइयाँ.. आपका भारत बंद सफल रहा!

जब सैनिक पे पत्थर बरसे तब भारत बंद कराना था,
जब किसान रोटी को तरसे तब भारत बंद कराना था।

आधी रात जब खुला न्यायालय, तब भारत बंद कराना था,
जब खतरों में था देवालय, तब भारत बंद कराना था।

जब सिक्खों के नरसंहार हुए, तब भारत बंद कराना था।,
जब जेऐनयु में देश के खिलाफ नारे लगें, तब भारत बंद कराना था।

कोई ये तो बताए 2 अप्रेल को किस बात का भारत बंद कराना था

न कोई जात, न कोई पात, हम हैं सिर्फ हिंदुस्तानी

।।जय श्री राम।।  ।।हम है हिंदुस्तानी।।  ।।हम है भारतवासी।।
Author - Vinay Singh
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