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Writers : - Indu Singh, Jyoti Singh & Vinay Singh

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Kabir Daas ji ke dohe-4

Kabir Daas Ke Anmol Vachan


Durlabh manushy janm hain, Deh n baarmbar
अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि इस मनुष्य का जन्म मुश्किल से होता है। यह मनुष्यों का शरीर उसी तरह बार-बार नहीं प्राप्त होता जिस प्रकार वृक्ष से पत्ता  झड़ जाया करता है और दोबारा डाल पर नहीं आता।
Mange sabki khair, Kabira khada baajar men

अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि जब इस संसार में आऐ हैं तो अपने जीवन से यही तमवा रखना चाहिए कि सब जनो का भला हो और संसार में अगर किसी से दोस्ती नहीं तो दुश्मनी भी न करें।
Kabir amrit vani- aapas men dou ladi ladi mue

अर्थ : कबीर दास जी कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और मुस्लिम रहमान को इस बात को लेकर वे दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा जा रहे है और इसके बाद भी दोनों में से कोई सच को न जान पा रहा है।

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