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Writers : - Indu Singh, Jyoti Singh & Vinay Singh

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Kabir Daas ji ke dohe-1

Kabir Amrit Vani

 कबीर दास जी के दोहे


Bura jo dekhan main chala bura na miliya koye
अर्थ : कबीर जी कहते है कि मैं जब इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा न दिखाई दिया और जब मैंने अपने मन के अंदर झाँक कर देखा तो पाया कि मुझसे बुरा तो कोई नहीं है।
Pothi padi padi jag hua pandit bhaya na koy day aakhar prem ka pade so pandit hoye
अर्थ : कबीर जी कहते है कि  बड़ी बड़ी पुस्तकें को पढ़ कर संसार में कितने ही व्यक्ति मृत्यु के द्वार पहुँच गए, लेकिन सभी विद्वान न हो सके. वह यह भी मानते हैं कि यदि कोई प्रेम या प्यार से केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले अर्थात वह प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी हो जाता है।
Sadhu aisa chahiye, jaisa soop subhay, Saar saar ko gahi rahai, Thotha dei udaay.
अर्थ : कबीर जी कहते है कि  इस संसार में ऐसे व्यक्तियों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है कहने का अर्थ यह है कि जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा देंगे।
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