Friday, March 1, 2013

Aaj bhi in aankhon men wo khamoshiyan kyon hai-Geet aur kavita-31


मुद्दत हो गयी उन तनहाइयों को गुजरे , आज भी इन आँखों में वो खामोशियाँ क्यों है चुन चुन कर जिसकी यादों को अपने जीवन से निकाला मैंने

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