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Writers : - Indu Singh, Jyoti Singh & Vinay Singh

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Chanakya Suvichar-1



Only when you think deeply and find satisfactory answers to these questions, go ahead.
सेवक को तब परखें जब वह काम ना कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई  में , मित्र को संकट में , और पत्नी को घोर विपत्ति में.-चाणक्य
A man is boorn alone and dies alone; and he experiences the good and bad consequences of his karma alone; and he goes alone to hell or the supreme abode.

There is no austerity equal to a balanced mind, and there is no happiness equal to contentment; there is no disease like covetousness, and no virtue like mercy.-Chanakya
Koee kaam shuroo karane se pahale, swayam se tin prashan kijiyen- Main ye kyon kar raha hoon, iske parinam kay ho sakate hai aur kya main safal ho paunga aur jab gaharaee se sochane par in prashno ke santoshjanak uttar mil jayen tabhi aage baden.

संतुलित दिमाग से जैसी  कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा  कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है,और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है.-चाणक्य
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