Jindagi abhishai bhi-Geet aur Kavita-3


ज़िंदगी अभिशाप भी, वरदान भी ज़िंदगी दुख में पला अरमान भी कर्ज़ साँसों का चुकाती जा रही ज़िंदगी है मौत पर अहसान भी

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