Friday, March 1, 2013

Har sitam Har julm-Geet aur kavita-22


हर सितम हर ज़ुल्म जिसका आज तक सहते रहे हम उसी के वास्ते हर दिन दुआ करते रहे  दिल के हाथों आज भी मजबूर हैं तो क्या हुआ मुश्किलों के दौर में हम हौसला रखते रहे  बादलों की बेवफ़ाई से हमें अब क्या गिला हम पसीने से ज़मीं आबाद जो करते रहे

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