Jo patthar tumne mara-Geet aur Kavita-11


जो पत्थर तुमने मारा था मुझे नादान की तरह उसी पत्थर को पूजा है किसी भगवान की तरह  तुम्हारी इन उँगलियों की छुअन मौजूद है उस पर उसे महसूस करता हूँ किसी अहसान की तरह

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